
भागलपुर। रेशम नगरी भागलपुर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्रों में शुमार तिलकामांझी चौक पर गुरुवार की रात नगर निगम प्रशासन का कड़ा और निर्णायक प्रहार देखने को मिला। नगर निगम की बेशकीमती भूमि पर दशकों से जमे अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासन ने ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसी कार्रवाई को अंजाम दिया। गुरुवार शाम से शुरू हुआ बुलडोजर का प्रहार देर रात तक जारी रहा, जिसमें विवादों में रहे रिमझिम होटल के पुराने और मजबूत भवन को पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया। यह कार्रवाई केवल एक भवन को ढहाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह उन तमाम लोगों के लिए एक कड़ा संदेश था जिन्होंने सरकारी जमीनों पर कब्जा कर रखा है। सालों से चल रही कानूनी लड़ाई और हाई कोर्ट के स्थगन आदेश (स्टे) के कारण रुकी हुई यह प्रक्रिया जैसे ही बहाल हुई, निगम ने बिना समय गंवाए कुछ ही घंटों के भीतर उस भूमि को अतिक्रमण मुक्त करा लिया। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान पूरे तिलकामांझी क्षेत्र में अफरा-तफरी और हड़कंप का माहौल बना रहा, हालांकि भारी पुलिस बल की मौजूदगी के कारण किसी भी पक्ष ने विरोध करने का दुस्साहस नहीं दिखाया।
2021 से चल रही कानूनी जंग का हुआ अंत
तिलकामांझी चौक स्थित इस भूमि पर अतिक्रमण का मामला कोई नया नहीं था। नगर निगम के दस्तावेजों के अनुसार, इस बेशकीमती भू-भाग को मुक्त कराने के लिए साल 2021 से ही कानूनी कवायद चल रही थी। उस दौरान जब निगम ने कार्रवाई की कोशिश की थी, तब होटल संचालक पक्ष ने माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट से स्थगन आदेश (स्टे) मिल जाने के कारण पिछले पांच वर्षों से निगम के हाथ बंधे हुए थे और शहर के सौंदर्यीकरण तथा यातायात सुगमता की योजनाएं अटकी पड़ी थीं।
प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि इसी सोमवार को हाई कोर्ट से इस स्टे को खत्म करने का अंतिम आदेश प्राप्त हुआ। जैसे ही यह आदेश जिला प्रशासन और नगर निगम के पास पहुँचा, अधिकारियों ने गोपनीय तरीके से ध्वस्तीकरण की रणनीति तैयार की। गुरुवार को जैसे ही सूर्य ढलने की ओर था, भारी मशीनों और पुलिस बल के साथ निगम की टीम ने मोर्चा संभाल लिया। यह नगर निगम की कार्यकुशलता का ही परिणाम था कि आदेश मिलने के मात्र तीन दिनों के भीतर उन्होंने सालों पुराने विवाद को मलबे में तब्दील कर दिया।
शाम 4 बजे शुरू हुआ ‘बुलडोजर एक्शन’
अतिक्रमण हटाने की यह बड़ी कार्रवाई गुरुवार शाम करीब 4 बजे शुरू हुई। नगर निगम के अतिक्रमण दस्ता के वरीय प्रभारी असगर अली और प्रभारी जयप्रकाश यादव के नेतृत्व में निगम की टीम दलबल के साथ तिलकामांझी चौक पहुँची। कार्रवाई की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने संसाधनों का व्यापक प्रबंध कर रखा था। अभियान की शुरुआत में दो विशाल जेसीबी मशीनों को भवन ढहाने के काम में लगाया गया।
जैसे-जैसे काम आगे बढ़ा, अधिकारियों ने महसूस किया कि भवन की मजबूती काफी अधिक है और दो मशीनों से रात होने तक काम पूरा करना मुश्किल होगा। काम की गति तेज करने के लिए दो घंटे बाद एक और शक्तिशाली जेसीबी मशीन को मौके पर बुलवाया गया। तीन जेसीबी मशीनों के एक साथ प्रहार से होटल का ढांचा धीरे-धीरे भरभरा कर गिरने लगा। देर रात तक बुलडोजर गरजते रहे और मलबे के ढेर में रिमझिम होटल का वजूद खो गया। मौके पर मौजूद लोगों के लिए यह नजारा किसी फिल्म के दृश्य से कम नहीं था, जहाँ प्रशासन पूरी सख्ती के साथ कानून का राज स्थापित कर रहा था।
मजदूरों और पुलिस बल का अभूतपूर्व समन्वय
भवन को ढहाने के साथ-साथ मलबे के प्रबंधन के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मौके पर करीब 20 मजदूरों को लगाया गया था जो मशीनों के साथ-साथ हाथों से भी मलबे को हटाने और सुरक्षित करने में जुटे थे। दो ट्रैक्टरों को निरंतर मलबे की ढुलाई और उसे व्यवस्थित करने के काम में तैनात किया गया था। इस पूरी कार्रवाई को प्रशासनिक सुरक्षा देने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
मजिस्ट्रेट के तौर पर सांख्यिकी पदाधिकारी राजेश कुमार और जगदीशपुर के बीडीओ अमित कुमार ने कमान संभाल रखी थी। तिलकामांझी थाना की पुलिस टीम सहित करीब 20 से 25 महिला और पुरुष पुलिसकर्मी सुरक्षा घेरा बनाए हुए थे। नगर निगम के पदाधिकारी और कर्मचारी भी रात भर डटे रहे। राहत की बात यह रही कि इतनी बड़ी और अचानक हुई कार्रवाई के बावजूद होटल संचालक या उनके समर्थकों की ओर से कोई हिंसक विरोध या आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई। शांतिपूर्ण ढंग से मलबे को समेटने और भवन को ढहाने का काम चलता रहा, जिससे यातायात पर भी न्यूनतम असर पड़ा।
भविष्य की योजना: सड़क चौड़ीकरण या नया कार्यालय?
तिलकामांझी चौक पर अतिक्रमण हटाने के बाद जो बेशकीमती भूमि खाली हुई है, उसके उपयोग को लेकर नगर निगम प्रशासन अब दो बड़े विकल्पों पर विचार कर रहा है। अतिक्रमण दस्ता प्रभारी जयप्रकाश यादव ने बताया कि फिलहाल तोड़े गए भवन के मलबे को पास ही एक स्थान पर एकत्रित किया गया है, जिसका बाद में निस्तारण किया जाएगा। इस खाली जमीन के उपयोग को लेकर भागलपुर की जनता की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं।
निगम प्रशासन के पास दो मुख्य प्रस्ताव हैं:
- यातायात सुगमता: तिलकामांझी चौक भागलपुर का एक महत्वपूर्ण जंक्शन है जहाँ अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। इस भूमि का उपयोग सड़क चौड़ीकरण के लिए किया जा सकता है, जिससे चौक पर गाड़ियों की आवाजाही सुगम हो सकेगी और लोगों को जाम से निजात मिलेगी।
- निगम कार्यालय: दूसरा विकल्प यह है कि यहाँ नगर निगम के किसी महत्वपूर्ण प्रभाग का कार्यालय भवन बनाया जाए, जिससे स्थानीय नागरिकों को नगर निगम की सेवाओं के लिए मुख्य कार्यालय तक नहीं जाना पड़ेगा।
अंतिम फैसला नगर निगम प्रशासन के उच्चाधिकारियों के स्तर से लिया जाना है। उम्मीद की जा रही है कि शहर की बढ़ती आबादी और ट्रैफिक के दबाव को देखते हुए सड़क चौड़ीकरण के प्रस्ताव को प्राथमिकता मिल सकती है।
अवैध कब्जाधारियों में हड़कंप: अब किसकी बारी?
तिलकामांझी की इस कार्रवाई ने भागलपुर के अन्य इलाकों में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों की नींद उड़ा दी है। नगर निगम ने साफ कर दिया है कि हाई कोर्ट के आदेश का सम्मान सर्वोपरि है और किसी भी कीमत पर अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रिमझिम होटल पर चले बुलडोजर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रसूख और पुरानी कानूनी अड़चनों के सहारे अब सरकारी जमीन को दबाकर रखना संभव नहीं होगा।
अतिक्रमण दस्ता प्रभारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में शहर के अन्य प्रमुख चौक-चौराहों पर भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी। तिलकामांझी की इस सफलता ने नगर निगम के मनोबल को बढ़ाया है। शहर के बुद्धिजीवियों ने भी प्रशासन के इस कदम की सराहना की है, क्योंकि तिलकामांझी चौक का यह हिस्सा लंबे समय से अतिक्रमण के कारण संकुचित था, जिससे आम राहगीरों को भारी परेशानी होती थी। देर रात तक चली इस कार्रवाई के बाद शुक्रवार की सुबह तिलकामांझी चौक का नजारा बदला हुआ दिखा, जहाँ सालों बाद सरकारी जमीन पर खुला आसमान नजर आ रहा था।


