भागलपुर में आंधी-पानी का दौर: 5 मई तक 60 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी

भागलपुर। बिहार के सिल्क सिटी और आसपास के इलाकों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। चिलचिलाती धूप और झुलसाने वाली लू की जगह अब बादलों की लुकाछिपी और पूरवा हवा के झोंकों ने ले ली है। शुक्रवार, 1 मई 2026 की सुबह जिले के कई हिस्सों में हुई हल्की बूंदाबांदी ने वातावरण में ठंडक घोल दी है, जिससे पिछले कई दिनों से गर्मी की मार झेल रहे लोगों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, यह राहत अपने साथ कुछ सावधानियां भी लेकर आई है। मौसम विभाग और बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने अगले पांच दिनों के लिए जो पूर्वानुमान जारी किया है, वह संकेत दे रहा है कि भागलपुर में ‘धूल भरी आंधी और गरज के साथ बारिश’ का सिलसिला अभी थमने वाला नहीं है। मौसम वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से किसानों और बागवानों को सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि तेज हवाओं की रफ्तार बागों और खड़ी फसलों को नुकसान पहुँचा सकती है।

पिछले 24 घंटों का हाल: बारिश से लुढ़का पारा

​भागलपुर में पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम के मिजाज में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा गया। गुरुवार, 30 अप्रैल की शाम से शुरू हुई बादलों की गर्जना और तेज हवाओं के बीच जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 9.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इस बारिश का सीधा असर तापमान पर पड़ा है। गुरुवार को दिन का अधिकतम तापमान गिरकर 28.6 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जो सामान्य से काफी कम है। वहीं, न्यूनतम तापमान 20.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

​हवा में नमी की मात्रा बढ़कर 89 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जिसके कारण सुबह और शाम के समय वातावरण में काफी नमी महसूस की जा रही है। गुरुवार को हवा की औसत गति करीब 10 किमी प्रति घंटा रही, लेकिन आगामी दिनों में इसके पांच से छह गुना बढ़ने की संभावना जताई गई है। बादलों के ढके होने के कारण सूरज के तेवर नरम पड़ गए हैं, जिससे भागलपुर के लोगों को मई की शुरुआत में ही अप्रैल जैसी तपिश से मुक्ति मिल गई है।

अगले 5 दिनों का पूर्वानुमान: 50-60 किमी की रफ्तार से चलेगी आंधी

​बीएयू सबौर और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा संयुक्त रूप से जारी बुलेटिन के अनुसार, 1 मई से 5 मई 2026 के दौरान भागलपुर जिले में मौसम काफी अस्थिर रहने वाला है। पूर्वानुमान के मुताबिक:

  • तेज हवाएं: जिले के एक-दो स्थानों पर गरज और चमक के साथ 50 से 60 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं (Squall) चलने का अनुमान है। यह रफ्तार पेड़ों की टहनियों को तोड़ने और कच्चे मकानों या छप्परों को नुकसान पहुँचाने के लिए पर्याप्त है।
  • वर्षा की संभावना: 5 मई तक जिले के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुक कर हल्की बारिश होने की संभावना है। आसमान में मध्यम से घने बादल छाए रहेंगे, जिससे चिलचिलाती धूप का प्रभाव कम रहेगा।
  • तापमान का रुख: अधिकतम तापमान धीरे-धीरे बढ़कर 30 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुँच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 20 से 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहेगा। हालांकि बादल छाए रहने और हवा में नमी होने के कारण उमस (Humidity) का अनुभव अधिक हो सकता है।

किसानों के लिए ‘मस्ट-डू’ लिस्ट: मक्का और आम पर विशेष ध्यान

​मौसम के इस बदलते मिजाज के बीच बीएयू, सबौर के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के नोडल पदाधिकारी डॉ. बीरेन्द्र कुमार ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया है। उन्होंने कहा है कि इस समय फसलों की देखभाल में थोड़ी सी लापरवाही उत्पादन पर बड़ा असर डाल सकती है।

1. बसंतकालीन मक्का की देखभाल:

भागलपुर के मैदानी इलाकों में बसंतकालीन मक्का की फसल इस समय महत्वपूर्ण चरण में है। डॉ. कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में निकाई-गुड़ाई का कार्य प्राथमिकता के आधार पर करें ताकि खरपतवारों को हटाया जा सके। खरपतवार न केवल पोषक तत्वों को सोख लेते हैं, बल्कि कीटों को भी पनाह देते हैं। इसके साथ ही, पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए यूरिया का उपरिवेशन (Top Dressing) करना आवश्यक है। यूरिया डालने के तुरंत बाद मिट्टी चढ़ाने का काम करें, ताकि तेज हवाओं के दौरान पौधों को मजबूती मिले और वे गिरें नहीं।

2. आम के बागवानों के लिए चेतावनी:

भागलपुर का ‘जर्दालु आम’ पूरी दुनिया में मशहूर है, लेकिन इस समय आम के पेड़ों पर मिलीबग (दहिया कीट) का खतरा मंडरा रहा है। यह कीट फूलों और छोटे फलों के रस को चूसकर उन्हें सुखा देता है।

  • निगरानी: किसान अपने बागों की नियमित निगरानी करें। यदि सफेद रूई जैसे कीट पेड़ों पर दिखें, तो तुरंत कार्रवाई करें।
  • कीटनाशक का प्रयोग: रोकथाम के लिए स्पिरोटेट्रामैट 30 ईसी (Spirotetramat 30 EC) दवा का उपयोग करें। इसकी 0.5 एमएल मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर पेड़ों पर समान रूप से छिड़काव करें।
  • सावधानी: छिड़काव केवल तभी करें जब मौसम पूरी तरह साफ हो और तेज हवा न चल रही हो। यदि छिड़काव के तुरंत बाद बारिश हो जाती है, तो दवा का असर खत्म हो जाएगा।

तेज हवाओं से बचाव के उपाय

​50-60 किमी की रफ्तार वाली हवाएं न केवल फसलों बल्कि जनजीवन के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। मौसम विभाग ने सुझाव दिया है कि:

  • खेतों की सिंचाई रोकें: तेज हवा की चेतावनी के दौरान खेतों में पानी न भरें, क्योंकि गीली मिट्टी में जड़ें ढीली हो जाती हैं और तेज हवा से फसलें (विशेषकर मक्का और केला) गिर सकती हैं।
  • पशुओं की सुरक्षा: पशुपालक अपने मवेशियों को ऊंचे और पक्के शेड में रखें। पेड़ों के नीचे या जर्जर भवनों के पास पशुओं को न बांधें।
  • आम जनमानस: आंधी और बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लें। बिजली के खंभों और ऊंचे ढांचों से दूर रहें।

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर प्रभाव

​मई की शुरुआत में इस तरह का मौसम ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी का परिणाम माना जा रहा है। तापमान कम होने से राहत तो मिली है, लेकिन हवा में बढ़ी हुई नमी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ सकता है। साथ ही, तापमान में अचानक बदलाव से सर्दी-खांसी और वायरल बुखार के मामले भी बढ़ सकते हैं। चिकित्सकों ने सलाह दी है कि लोग ठंडे और गर्म वातावरण के बीच संतुलन बनाए रखें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।

​भागलपुर की मिट्टी और हवा इस समय खेती के लिए अनुकूल है, बशर्ते किसान मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर अपने कृषि कार्यों का प्रबंधन करें। 5 मई के बाद मौसम के दोबारा शुष्क होने और तापमान में वृद्धि की संभावना है, इसलिए यह सप्ताह कृषि कार्यों के निपटारे और बागों के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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