कहलगांव पुलिस की बड़ी ‘दियारा स्ट्राइक’: कुख्यात टिब्बा मंडल और अकबाली यादव गिरफ्तार; पन्नूचक रंगदारी कांड का हुआ खुलासा, 14 मुकदमों का ‘डॉन’ चढ़ा हत्थे

कहलगांव/भागलपुर। भागलपुर जिले के कहलगांव अनुमंडल अंतर्गत दियारा इलाकों में दहशत का पर्याय बन चुके अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। जिले के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) के कड़े रुख और अपराधियों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत कहलगांव पुलिस ने कुख्यात अपराधी चंद्रभानू उर्फ टिब्बा मंडल और उसके सक्रिय सहयोगी अकबाली यादव को गिरफ्तार कर लिया है। बुधवार, 29 अप्रैल 2026 की देर शाम कहलगांव एसडीपीओ-2 पंकज कुमार ने एक प्रेस वार्ता के दौरान इस गिरफ्तारी की पुष्टि की। टिब्बा मंडल और उसकी मंडली पिछले काफी समय से गंगा के कछार और दियारा इलाकों में रंगदारी, लूट और हिंसक वारदातों के जरिए किसानों व व्यवसायियों के बीच खौफ पैदा कर रही थी। पुलिस ने इन दोनों अपराधियों को एकचारी दियारा के दुर्गम इलाकों से दबोचा है, जिसे अपराधियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता था। इस गिरफ्तारी के साथ ही पन्नूचक के व्यवसायी संजीव गुप्ता से मांगी गई रंगदारी के मामले का भी पटाक्षेप हो गया है।

एसएसपी के निर्देश पर ‘स्पेशल-20’ की छापेमारी

​जिले में संगठित अपराध और रंगदारी मांगने वाले गिरोहों के खिलाफ वरीय पुलिस अधीक्षक ने एक विशेष टीम का गठन किया था। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि घोघा और कहलगांव क्षेत्र का कुख्यात टिब्बा मंडल अपने सहयोगियों के साथ एकचारी दियारा के उसयारी बासा इलाके में छिपा हुआ है। यह इलाका भौगोलिक रूप से काफी दुर्गम है, जहाँ पुलिस की आवाजाही की खबर अपराधियों को काफी पहले लग जाती है। रणनीति के तहत पुलिस ने सादे लिबास में और दियारा की स्थानीय गतिविधियों का फायदा उठाते हुए घेराबंदी शुरू की।

​इस विशेष टीम ने सबसे पहले प्राथमिक अभियुक्त अकबाली यादव (पिता गोरेलाल यादव) को उसयारी बासा से दबोचा। अकबाली की गिरफ्तारी पुलिस के लिए इस मिशन की सबसे बड़ी चाबी साबित हुई। पुलिस ने जब उससे कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपने आका टिब्बा मंडल के छिपने के सटीक ठिकानों का खुलासा कर दिया।

अकबाली की निशानदेही और टिब्बा का सरेंडर

​अकबाली यादव से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने बिना समय गंवाए बड़ी मोहनपुर खवासपुर और एकचारी दियारा स्थित जटाधारी बाबा मंदिर के समीप सघन छापेमारी शुरू की। पुलिस की भारी घेराबंदी देखकर टिब्बा मंडल ने भागने की कोशिश की, लेकिन चारों ओर से घिर जाने के बाद उसे सरेंडर करना पड़ा। टिब्बा मंडल के पकड़े जाने की खबर जैसे ही कहलगांव और घोघा थाना क्षेत्रों में फैली, स्थानीय व्यवसायियों ने राहत की सांस ली। टिब्बा मंडल केवल एक अपराधी नहीं था, बल्कि वह दियारा के उस ‘क्राइम सिंडिकेट’ का हिस्सा था जो गंगा पार की जमीनों पर वर्चस्व और फसलों की रंगदारी वसूलने के लिए कुख्यात था।

अपराध का लंबा कच्चा चिट्ठा: 14 संगीन मामले दर्ज

​प्रेस वार्ता के दौरान एसडीपीओ-2 पंकज कुमार ने टिब्बा मंडल के आपराधिक इतिहास का जो ब्योरा पेश किया, वह चौंकाने वाला है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, चंद्रभानू उर्फ टिब्बा मंडल के खिलाफ भागलपुर जिले के विभिन्न थानों में अब तक 14 आपराधिक मामले दर्ज पाए गए हैं। इनमें हत्या का प्रयास, रंगदारी, लूट, आर्म्स एक्ट और दंगा भड़काने जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं।

  • घोघा थाना: रंगदारी और वर्चस्व की जंग के सर्वाधिक मामले।
  • कहलगांव थाना: लूट और व्यापारियों को धमकाने के मुकदमे।
  • अंतिचक और एकचारी थाना: दियारा क्षेत्रों में हिंसक वारदातों और अवैध हथियारों की तस्करी के मामले।

​एसडीपीओ ने बताया कि टिब्बा मंडल एक शातिर अपराधी है जो जेल जाने के बाद जमानत पर बाहर आते ही फिर से अपने गिरोह को सक्रिय कर लेता था। हाल के दिनों में उसकी गतिविधियां एकचारी और घोघा के सीमावर्ती इलाकों में काफी बढ़ गई थीं।

संजीव गुप्ता रंगदारी कांड का खुलासा

​टिब्बा मंडल की ताजी तलाश पिछले साल के अंत में दर्ज एक मामले के बाद तेज हुई थी। 29 दिसंबर 2025 को पन्नूचक निवासी संजीव गुप्ता ने घोघा थाना में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। संजीव गुप्ता ने आरोप लगाया था कि टिब्बा मंडल और उसके गिरोह ने उनसे मोटी रकम की रंगदारी मांगी है और पैसा न देने पर जान से मारने की धमकी दी है। इस मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी, लेकिन टिब्बा मंडल लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस को चकमा दे रहा था।

​पुलिस ने बताया कि संजीव गुप्ता जैसे कई अन्य छोटे-बड़े व्यवसायी टिब्बा के खौफ के कारण सामने नहीं आ रहे थे, लेकिन इस प्राथमिकी ने पुलिस को टिब्बा के खिलाफ ‘नॉन-बेलेबल वारंट’ (NBW) निकलवाने का आधार दिया। अकबाली यादव भी इस रंगदारी कांड में नामजद अभियुक्त था, जिसकी गिरफ्तारी से केस की कड़ियां अब पूरी तरह जुड़ गई हैं।

दियारा की भौगोलिक चुनौती और पुलिस की सक्रियता

​कहलगांव और भागलपुर का दियारा क्षेत्र हमेशा से अपराधियों के लिए ‘सेफ हेवन’ रहा है। नदी की धाराएं और ऊंचे कांस के जंगल अपराधियों को छिपने में मदद करते हैं। एसडीपीओ पंकज कुमार ने बताया कि वरीय पुलिस अधीक्षक के स्पष्ट निर्देश हैं कि दियारा में अपराधियों का कोई भी ‘बासा’ (अस्थायी ठिकाना) शेष नहीं रहना चाहिए।

​इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब उन सफेदपोशों की भी तलाश कर रही है जो टिब्बा मंडल जैसे अपराधियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट या कानूनी मदद पहुँचाते थे। पुलिस का मानना है कि टिब्बा की गिरफ्तारी से दियारा में चल रहे अवैध वसूली के नेटवर्क को एक बड़ा झटका लगा है। आने वाले समय में पुलिस अन्य फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए कुर्की-जब्ती जैसी सख्त कार्रवाई भी कर सकती है।

व्यवसायियों और किसानों ने ली राहत की सांस

​टिब्बा मंडल और अकबाली यादव की गिरफ्तारी कहलगांव अनुमंडल के लिए एक बड़ी प्रशासनिक जीत मानी जा रही है। दियारा के किसानों के लिए फसल कटनी और बोआई का समय हमेशा से ‘रंगदारी’ के साये में बीतता था। घोघा और एकचारी के स्थानीय लोगों का कहना है कि टिब्बा की गिरफ्तारी से अब वे बिना किसी डर के अपने खेतों में जा सकेंगे। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई भी अपराधी या गिरोह उनसे रंगदारी मांगता है, तो वे डरे नहीं और तुरंत स्थानीय थाने या सीधे एसडीपीओ को इसकी सूचना दें। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

​प्रेस वार्ता के अंत में एसडीपीओ ने छापेमारी टीम में शामिल पुलिसकर्मियों की सराहना की और बताया कि इस सफलता से जिला पुलिस के मनोबल में वृद्धि हुई है। टिब्बा मंडल और अकबाली यादव को कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इन दोनों अपराधियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल (त्वरित सुनवाई) की अनुशंसा करेगी ताकि उन्हें जल्द से जल्द उनके किए की सजा मिल सके।

  • ये भी पढ़े..

    बिहार के दो स्टार क्रिकेटरों को मिलेगा DSP पद! मुकेश कुमार और आकाश दीप की सीधी नियुक्ति की सिफारिश

    Share Add as a preferred…

    लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर RJD के पूर्व विधायक मुकेश रौशन को धमकी! SSP से लगाई सुरक्षा की गुहार

    Share Add as a preferred…