सुल्तानगंज कांड पर मुख्यमंत्री का सख्त रुख: डीजी ऑपरेशन को तलब कर ली पूरी रिपोर्ट; भागलपुर पुलिस से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

पटना/भागलपुर। भागलपुर के सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार की हत्या और उसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई ने राज्य की राजधानी से लेकर दिल्ली तक प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस पूरी घटना को लेकर अत्यंत गंभीर हैं और वे स्वयं पल-पल की गतिविधियों की निगरानी कर रहे हैं। बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री ने पटना स्थित अपने आवास पर बिहार पुलिस मुख्यालय के डीजी (ऑपरेशन) को तलब किया। इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने सुल्तानगंज शूटआउट से लेकर मुख्य आरोपी रामधनी यादव के एनकाउंटर तक के हर घटनाक्रम की गहन समीक्षा की। सरकार का संदेश स्पष्ट है कि राज्य में कानून के इकबाल के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन साथ ही प्रशासनिक स्तर पर हुई चूकों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

मुख्यमंत्री का ‘एक्शन मोड’: डीजी ऑपरेशन के साथ लंबी मंत्रणा

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पदभार संभालने के बाद ही यह स्पष्ट कर दिया था कि अपराध और भ्रष्टाचार उनकी सरकार की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर हैं। सुल्तानगंज की घटना ने न केवल एक अधिकारी की जान ली, बल्कि सरकारी दफ्तरों के भीतर सुरक्षा के दावों की भी पोल खोल दी। इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री ने डीजी (ऑपरेशन) के साथ बैठक की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने पूछा कि जब नीलामी जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया चल रही थी, तब सुरक्षा के क्या इंतजाम थे?

​बैठक में डीजी (ऑपरेशन) ने मुख्यमंत्री को उस मुठभेड़ की भी जानकारी दी जिसमें मुख्य आरोपी रामधनी यादव मारा गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस गिरोह के बचे हुए सदस्यों और उनके मददगारों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे पहुँचाया जाए। मुख्यमंत्री की इस सक्रियता से यह साफ हो गया है कि भागलपुर पुलिस पर अब केवल केस सुलझाने का ही नहीं, बल्कि एक फूलप्रूफ सुरक्षा तंत्र विकसित करने का भी भारी दबाव है।

पुलिस मुख्यालय की सख्ती: भागलपुर पुलिस से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट

​इधर, मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय ने भी अपनी जांच तेज कर दी है। मुख्यालय ने भागलपुर पुलिस से इस पूरे मामले पर एक ‘कॉम्प्रिहेंसिव रिपोर्ट’ (विस्तृत रिपोर्ट) तलब की है। पुलिस मुख्यालय ने भागलपुर के एसएसपी और डीआईजी से कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है।

​मुख्यालय द्वारा मांगी गई रिपोर्ट में निम्नलिखित बिंदुओं को प्राथमिकता दी गई है:

  • घटना का मूल कारण: रामधनी यादव और नगर परिषद के बीच विवाद की असली जड़ क्या थी और क्या पुलिस को इसकी भनक पहले से थी?
  • सुरक्षा में चूक: क्या नगर परिषद कार्यालय में पुलिस बल की तैनाती थी? यदि नहीं, तो इतनी बड़ी नीलामी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
  • हथियारों का स्रोत: अपराधियों के पास अत्याधुनिक हथियार कहाँ से आए और वे कार्यालय के भीतर तक कैसे पहुँचे?
  • गिरफ्तारी और कार्रवाई: अब तक कितने लोगों की गिरफ्तारी हुई है और एनकाउंटर की परिस्थितियों का पूरा ब्योरा क्या है?

​पुलिस मुख्यालय का मानना है कि यदि स्थानीय स्तर पर इंटेलिजेंस विफलता नहीं होती, तो शायद इस जघन्य हत्याकांड को टाला जा सकता था।

सुरक्षा ऑडिट और अधिकारियों का मनोबल

​सुल्तानगंज की घटना के बाद पूरे बिहार के प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों में असुरक्षा की भावना देखी जा रही है। बिहार प्रशासनिक सेवा संघ (बासा) ने भी इस पर गहरी चिंता जताई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने डीजी (ऑपरेशन) को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि फील्ड में काम कर रहे अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए। विशेष रूप से उन अधिकारियों को जो माफियाओं और संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं।

​मुख्यालय अब राज्य के सभी नगर निकायों और संवेदनशील सरकारी कार्यालयों का ‘सुरक्षा ऑडिट’ कराने की योजना बना रहा है। भागलपुर पुलिस को यह निर्देश दिया गया है कि वे सुल्तानगंज की घटना से सबक लेते हुए भविष्य के लिए एक नई सुरक्षा नियमावली (SOP) तैयार करें। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि कर्तव्य पथ पर बलिदान देने वाले अधिकारियों का सम्मान सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

भविष्य की रणनीति और पुलिसिया दबिश

​भागलपुर के सुल्तानगंज में अभी भी पुलिस की गश्ती तेज है। रामधनी यादव के मारे जाने के बाद पुलिस अब उसके राजनैतिक और व्यापारिक संपर्कों को खंगाल रही है। पुलिस मुख्यालय ने यह भी निर्देश दिया है कि भागलपुर में सक्रिय अन्य पेशेवर गिरोहों की सूची अपडेट की जाए और उन पर निगरानी बढ़ाई जाए।

​मुख्यालय को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख होगा कि क्या रामधनी यादव को स्थानीय स्तर पर किसी का मौन समर्थन प्राप्त था। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने डीजी (ऑपरेशन) को स्पष्ट कहा है कि जाँच निष्पक्ष होनी चाहिए और इसमें किसी भी ‘सफेदपोश’ का दबाव आड़े नहीं आना चाहिए। पुलिस की इस कार्रवाई और मुख्यालय की सख्ती ने अपराधियों के बीच एक खौफ पैदा कर दिया है, लेकिन असली चुनौती यह है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

प्रशासनिक सतर्कता और जवाबदेही का नया दौर

​मुख्यमंत्री की इस पहल को बिहार में एक नई प्रशासनिक संस्कृति की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। आमतौर पर ऐसी घटनाओं के बाद केवल पुलिसिया कार्रवाई होती है, लेकिन यहाँ मुख्यमंत्री स्वयं डीजी स्तर के अधिकारी से सीधा संवाद कर रहे हैं। भागलपुर पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिर सकती है, विशेष रूप से उन पर जिनकी लापरवाही से अपराधी नगर परिषद कार्यालय के भीतर तक पहुँचने में सफल रहे।

​बिहार पुलिस मुख्यालय ने भागलपुर एसएसपी को यह भी कहा है कि वे घायल सभापति और अन्य गवाहों के बयान को प्राथमिकता के आधार पर दर्ज करें ताकि केस को कानूनी रूप से भी मजबूती प्रदान की जा सके। फिलहाल, पटना से लेकर भागलपुर तक पुलिस का पूरा तंत्र इस एक ही मिशन में जुटा है कि सुल्तानगंज कांड की जड़ों तक पहुँचा जाए और व्यवस्था में व्याप्त खामियों को दूर किया जाए।

वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क की विशेष प्रशासनिक रिपोर्ट।

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