
मुजफ्फरपुर। उत्तर बिहार की व्यापारिक राजधानी कहे जाने वाले मुजफ्फरपुर में कानून को हाथ में लेने और ‘ऑन द स्पॉट’ फैसले करने की एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। शहर के अहियापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत पुरानी मोतिहारी रोड के कोल्हुआ इलाके में बुधवार को एक ऐसी घटना घटी, जिसने मानवीय संवेदनाओं और पुलिसिया इकबाल दोनों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। एक युवक, जो राज्य के कृषि विभाग से सेवानिवृत्त एक रसूखदार अधिकारी का पुत्र बताया जा रहा है, उसे बकरी चोरी के आरोप में उग्र भीड़ ने पकड़ लिया। भीड़ का गुस्सा केवल पकड़ने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संवेदनहीनता की हदें पार करते हुए लोगों ने युवक को लोहे के बिजली के खंभे से बांध दिया और घंटों तक उसकी बेरहमी से पिटाई की। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है, जिसने जिले के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। हालांकि, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए युवक को भीड़ के चंगुल से मुक्त करा लिया है, लेकिन इस मामले ने एक रसूखदार परिवार के भीतर छिपे उस दर्द को भी उजागर कर दिया है जो नशे की लत के कारण पैदा हुआ है।
कोल्हुआ में ‘मॉब लिंचिंग’ की कोशिश: खंभे से बांधकर घंटों चला तांडव
घटना की पृष्ठभूमि पिछले दो-तीन दिनों से इलाके में हो रही लगातार चोरियों से जुड़ी है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कोल्हुआ और उसके आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से मवेशियों, विशेषकर बकरियों की चोरी की घटनाएं बढ़ गई थीं। इससे स्थानीय पशुपालकों और आम लोगों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त था। बुधवार की सुबह जब इलाका अपनी दैनिक गतिविधियों में जुटा था, तभी दो युवकों को संदिग्ध परिस्थितियों में बकरी के साथ भागने की कोशिश करते देखा गया। स्थानीय लोगों ने शोर मचाया और पीछा कर एक युवक को दबोच लिया, जबकि उसका दूसरा साथी अंधेरे और भीड़ का फायदा उठाकर बकरी छोड़कर फरार होने में सफल रहा।
पकड़े गए युवक की पहचान होते ही भीड़ का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। बिना पुलिस को सूचना दिए या कानून का इंतजार किए, लोगों ने खुद ही ‘जज और जल्लाद’ की भूमिका अपना ली। युवक को घसीटते हुए सड़क किनारे लगे एक लोहे के बिजली के पोल के पास लाया गया और उसे रस्सी से मजबूती से बांध दिया गया। इसके बाद शुरू हुआ बर्बरता का वह सिलसिला जो सभ्य समाज को शर्मसार करता है। भीड़ में शामिल लोग युवक पर लात-घूसे और डंडे बरसाने लगे। वह युवक रहम की भीख मांगता रहा, लेकिन आक्रोशित लोगों ने उसकी एक न सुनी। वहां मौजूद दर्जनों लोग मूकदर्शक बने रहे और कई लोग अपने मोबाइल कैमरों में इस अमानवीय कृत्य को कैद करने में व्यस्त थे।
पुलिस की एंट्री और ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’: डायल 112 ने बचाई जान
तकरीबन एक घंटे तक चले इस खूनी खेल की सूचना किसी ने गुप्त रूप से पुलिस को दी। सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम और अहियापुर थाना पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुँची। पुलिस जब वहां पहुँची तो नजारा काफी डरावना था। युवक लहूलुहान अवस्था में पोल से बंधा हुआ था और भीड़ अब भी उसे छोड़ने को तैयार नहीं थी। पुलिस अधिकारियों को भीड़ को शांत करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए पहले भीड़ को तितर-बितर किया और फिर पोल से बंधे युवक की रस्सियां काटीं।
घायल युवक की स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल पुलिस वाहन से श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, युवक के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान हैं और उसे आंतरिक चोटें भी आई हैं, हालांकि फिलहाल उसकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और वायरल वीडियो को अपने कब्जे में लिया है ताकि उन चेहरों की पहचान की जा सके जिन्होंने कानून को अपने हाथ में लेकर एक युवक की जान लेने की कोशिश की।
अधिकारी का बेटा और नशे का ‘अंधेरा’: एक परिवार की त्रासदी
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने पकड़े गए युवक की पहचान उजागर की। घायल युवक का नाम गोलू कुमार है, जो शहर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र अंतर्गत पोखर के समीप का निवासी है। जांच में पता चला कि गोलू के पिता बिहार सरकार के कृषि विभाग में एक उच्च पदस्थ अधिकारी रहे हैं और फिलहाल सेवानिवृत्त हैं। एक रसूखदार और शिक्षित परिवार से ताल्लुक रखने वाले युवक का बकरी चोरी जैसे मामले में पकड़ा जाना और सड़क पर इस तरह अपमानित होना, हर किसी को हैरान कर रहा था।
गोलू की मां ने पुलिस के सामने जो बयान दिया है, वह आधुनिक समाज में युवाओं के भटकने और नशे के बढ़ते जाल की दर्दनाक कहानी बयां करता है। मां ने रुंधे गले से पुलिस को बताया कि गोलू पिछले काफी समय से प्रतिबंधित नशीले पदार्थों के सेवन का आदी हो चुका है। नशे की इस लत ने न केवल उसके स्वास्थ्य को बर्बाद किया, बल्कि उसकी मानसिक स्थिति को भी असंतुलित कर दिया है। परिवार ने उसे सुधारने की बहुत कोशिश की, लेकिन नशे के सौदागरों के चंगुल में फंसा गोलू अपना विवेक खो चुका था। मां का कहना है कि गोलू की मानसिक हालत ठीक नहीं रहती और वह नशे की पूर्ति के लिए अक्सर घर से बाहर निकल जाता था। एक अधिकारी के घर में पला-बढ़ा बेटा आज अस्पताल के बेड पर भीड़ की बर्बरता का शिकार होकर पड़ा है, जो ड्रग्स के कारण तबाह होते परिवारों की एक बड़ी चेतावनी है।
भीड़ पर FIR: “कानून हाथ में लेना अपराध है”
मुजफ्फरपुर पुलिस ने इस मामले में बेहद कड़ा रुख अपनाया है। गोलू की मां के लिखित आवेदन के आधार पर अहियापुर थाने में एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। यह FIR उन अज्ञात और चिन्हित लोगों के खिलाफ है जिन्होंने गोलू को खंभे से बांधा और उसकी पिटाई की। एसडीपीओ (नगर) ने स्पष्ट किया है कि भले ही युवक पर चोरी का आरोप हो, लेकिन किसी भी नागरिक या भीड़ को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी को शारीरिक दंड दे या उसे बंधक बनाए।
एसडीपीओ ने मीडिया को बताया कि ब्रह्मपुरा के गोलू कुमार की पिटाई का वायरल वीडियो पुलिस के पास है। इस वीडियो के आधार पर पुलिस उन हमलावरों की पहचान कर रही है जो युवक को डंडों से पीट रहे थे। पुलिस ने चेतावनी दी है कि मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि जहाँ गोलू की मां ने भीड़ के खिलाफ मामला दर्ज कराया है, वहीं दूसरी तरफ खबर लिखे जाने तक बकरी चोरी को लेकर किसी भी स्थानीय निवासी या पशुपालक ने गोलू के खिलाफ थाने में कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई है। यह कानूनी रूप से गोलू के पक्ष को मजबूत करता है, जबकि पिटाई करने वालों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
सभ्य समाज के चेहरे पर तमाचा: क्यों बेखौफ हो रही भीड़?
मुजफ्फरपुर की यह घटना उस बढ़ती प्रवृत्ति की ओर इशारा करती है जहाँ लोगों का भरोसा कानूनी प्रक्रिया से उठता जा रहा है। कोल्हुआ इलाके के लोगों का कहना है कि वे बार-बार हो रही चोरियों से परेशान थे, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि वे किसी की जान लेने पर उतारू हो जाएं। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि लोग किस तरह मनोरंजन के तौर पर पिटाई का वीडियो बना रहे थे, जबकि युवक दर्द से कराह रहा था।
पुलिस का कहना है कि गोलू की मानसिक स्थिति और उसके पारिवारिक बैकग्राउंड को देखते हुए उसे सुधार गृह या नशामुक्ति केंद्र भेजने पर विचार किया जा सकता था, लेकिन भीड़ ने उसे अपराधी मानकर अपना न्याय कर दिया। अब पुलिस की टीम उन इलाकों में गश्ती बढ़ा रही है जहाँ हाल के दिनों में चोरियों की शिकायतें मिली हैं, ताकि भविष्य में ऐसी ‘उग्र न्याय’ की पुनरावृत्ति न हो। अहियापुर पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध को पकड़ें तो उसे तुरंत पुलिस के हवाले करें, न कि स्वयं कानून बनें। फिलहाल गोलू SKMCH में पुलिस की निगरानी में उपचाराधीन है और उसके घर वाले अपनी बदनामी और बेटे की हालत पर आंसू बहा रहे हैं।
वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट।


