
मधुबनी/भागलपुर। बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था के एक जांबाज और ईमानदार प्रहरी कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार बुधवार को उस अनंत यात्रा पर निकल गए, जहाँ से कोई वापस नहीं आता। सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय के भीतर मंगलवार शाम अपराधियों की कायराना गोली का शिकार हुए 38 वर्षीय कृष्ण भूषण कुमार का अंतिम संस्कार बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को पूरे राजकीय सम्मान के साथ संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश के बाद प्रशासन ने अपने इस वीर सिपाही को वह सम्मान दिया, जिसके वे हकदार थे। शहर से सटे जीवछ मुक्ति धाम में जब उनके छोटे भाई डॉ. चन्द्र भूषण कुमार ने रुंधे गले से मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं और दिल में अपराधियों के प्रति भारी आक्रोश था। यह केवल एक शव का अंतिम संस्कार नहीं था, बल्कि कर्तव्यनिष्ठा की उस मशाल की विदाई थी, जिसने अंतिम क्षण तक माफियाओं के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया।
गदियानी लोहरसारी में कोहराम: मासूम बच्चों को देख फट गया कलेजा
बुधवार की सुबह जब कृष्ण भूषण कुमार का पार्थिव शरीर गदियानी लोहरसारी मोहल्ला स्थित उनके आवास पर पहुँचा, तो समूचा इलाका चीख-पुकार से दहल उठा। जिस घर में कुछ दिन पहले तक हंसी-ठिठोली गूँजती थी, वहां अब केवल मातम का सन्नाटा और अपनों का करुण विलाप था। पत्नी शालू कुमारी की स्थिति देखकर वहां मौजूद हर महिला की आंखें भीग गईं। बहन जानकी, मुन्नू, बेबी और भाई सूर्यभूषण, चन्द्र भूषण व अजय कुमार का रो-रोकर बुरा हाल था।
सबसे हृदयविदारक दृश्य तब सामने आया जब कृष्ण भूषण के दो मासूम बच्चों, 2 वर्षीय ऋषभ और 1 वर्षीय ऋषिका को पिता के अंतिम दर्शन के लिए लाया गया। वे मासूम अभी ‘मौत’ शब्द का अर्थ भी नहीं समझते थे, लेकिन अपने घर में मची चीख-पुकार और पिता को निस्पंद देख उनकी सिसकियां हर पत्थर दिल इंसान को भी झकझोर रही थीं। मोहल्ले के लोगों का कहना था कि भगवान ऐसी क्रूर नियति किसी को न दे। परिजनों के चीत्कार से पूरा वातावरण गमगीन हो गया और हर कोई इस जघन्य हत्याकांड के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग कर रहा था।
प्रशासनिक अमला और गार्ड ऑफ ऑनर: सम्मान के साथ विदाई
दिवंगत अधिकारी को अंतिम विदाई देने के लिए बिहार सरकार और जिला प्रशासन के तमाम वरीय अधिकारी मधुबनी पहुँचे। जिलाधिकारी आनंद शर्मा, नगर विकास विभाग के विशेष सचिव मनन राम, एसपी योगेंद्र कुमार और नगर आयुक्त उमेश कुमार भारती ने पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
जैसे ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई, 12 पुलिस जवानों की एक विशेष टीम ने अपनी राइफलें झुकाकर ‘शोक शस्त्र सलामी’ दी। गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान बिगुल की मातमी धुन ने माहौल को और भी भारी कर दिया। राजकीय सम्मान के साथ दी गई यह विदाई इस बात का प्रतीक थी कि सरकार अपने कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देगी। इस मौके पर मेयर अरुण राय, उप मेयर अमानुल्लाह खान सहित आरएसएस के अरविंद कुमार यादव, पवन साह, संजय कुमार प्रसाद और विष्णु राउत जैसे गणमान्य लोग भी मौजूद रहे, जिन्होंने कृष्ण भूषण कुमार को समाज के लिए एक बड़ी क्षति बताया।
रामधनी यादव का अंत और न्याय का भरोसा
अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने जनता के बीच व्याप्त आक्रोश को शांत करने और व्यवस्था में विश्वास जगाने का प्रयास किया। एसपी योगेंद्र कुमार ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि इस गोलीबारी की घटना का मुख्य मास्टरमाइंड और कुख्यात अपराधी रामधनी यादव पुलिस एनकाउंटर में मारा जा चुका है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने महज कुछ ही घंटों के भीतर मुख्य अभियुक्त को ढेर कर यह संदेश दिया है कि अपराधियों के लिए अब बिहार में कोई जगह नहीं है। डीएम आनंद शर्मा ने शोक संतप्त परिवार को आश्वस्त किया कि घटना में शामिल अन्य जो भी दोषी हैं या जिन्होंने पर्दे के पीछे से इस साजिश को रचा है, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई का भरोसा देते हुए कहा कि स्पीडी ट्रायल के जरिए बचे हुए अपराधियों को फांसी के फंदे तक पहुँचाया जाएगा।
छावनी में तब्दील रहा इलाका: चप्पे-चप्पे पर पुलिस की नजर
शहीद अधिकारी की अंतिम यात्रा और शहर में व्याप्त तनाव को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। सदर एसडीओ चंदन झा, एसडीपीओ अमित कुमार और ट्रैफिक डीएसपी सुजीत कुमार स्वयं मोर्चा संभाले हुए थे। शहर से लेकर मुक्ति धाम तक के पूरे रास्ते को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। भारी संख्या में पुलिस बल और दंगा निरोधी वाहनों की तैनाती की गई थी ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को टाला जा सके।
प्रशासनिक सजगता का आलम यह था कि हर आने-जाने वाले पर नजर रखी जा रही थी। सुल्तानगंज से लेकर मधुबनी तक के इस दुखद सफर में लोगों ने सड़कों पर खड़े होकर अपने चहेते अधिकारी को अंतिम विदाई दी। स्थानीय लोगों का कहना था कि कृष्ण भूषण कुमार जैसे अधिकारी का जाना पूरे नगर परिषद के लिए एक अपूर्णीय क्षति है, क्योंकि उन्होंने बहुत ही कम समय में भ्रष्टाचार पर लगाम कसकर विकास कार्यों को नई गति दी थी।
कर्तव्य की वेदी पर सर्वोच्च बलिदान
कृष्ण भूषण कुमार की शहादत ने यह बहस फिर से छेड़ दी है कि ईमानदारी की कीमत क्या अब जान देकर चुकानी होगी? लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई और रामधनी यादव के एनकाउंटर ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर अपराधी दुस्साहस करेंगे, तो उनका अंत भी निश्चित है। 38 साल की अल्पायु में कृष्ण भूषण कुमार ने जिस वीरता का परिचय दिया, वह आने वाली प्रशासनिक पीढ़ी के लिए एक नजीर होगी।
जीवछ मुक्ति धाम की चिता से उठती लपटें यह गवाही दे रही थीं कि एक नायक चला गया, लेकिन उसकी छोड़ी हुई ईमानदारी और साहस की विरासत अब भी जीवित है। पूरा शहर आज कृष्ण भूषण के परिवार के साथ खड़ा है और सरकार की उस घोषणा की सराहना कर रहा है जिसमें राजकीय सम्मान और सहायता राशि के जरिए परिवार को संबल देने का प्रयास किया गया है। अब सुल्तानगंज को उस दिन का इंतजार है जब इस पूरी साजिश की जड़ें खोद दी जाएंगी और हर गुनहगार अपने अंजाम तक पहुँचेगा।


