​बिहार: ग्रामीण सड़कों के निर्माण में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर; अपर सचिव ने दिए कड़े निर्देश

पटना। बिहार में ग्रामीण बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को पटरी पर लाने के लिए सरकार ने अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना ली है। गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को पटना स्थित ग्रामीण कार्य विभाग के मुख्यालय में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। अपर सचिव संजय कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में प्रशाखा-04 के कामकाज का बारीकी से विश्लेषण किया गया। बैठक का मुख्य स्वर केवल फाइलों का निपटारा नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता रहा। अपर सचिव ने स्पष्ट कर दिया कि ग्रामीण सड़कों का निर्माण केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह करोड़ों ग्रामीणों की जीवनरेखा है, जिसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही, विभाग ने अपने कर्मियों, विशेषकर सेवानिवृत्त अभियंताओं के हितों की रक्षा के लिए भी सख्त रुख अपनाया है।

समयबद्ध निष्पादन: फाइलों की सुस्त रफ़्तार पर लगाम

​अपर सचिव संजय कुमार ने प्रशाखा-04 के अधीन लंबित संचिकाओं (Files) और प्राप्त पत्रों की वर्तमान स्थिति पर असंतोष व्यक्त करते हुए उन्हें तत्काल निष्पादित करने का आदेश दिया। विभाग का मानना है कि प्रशासनिक देरी अक्सर धरातल पर चल रहे सड़क प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता और समय सीमा को प्रभावित करती है।

​अधिकारियों को दिए गए प्रमुख निर्देश:

  • पारदर्शिता और जवाबदेही: हर कार्य का उत्तरदायित्व तय किया जाएगा। यदि कोई प्रोजेक्ट देरी से चल रहा है, तो संबंधित अधिकारी को उसकी ठोस वजह बतानी होगी।
  • दक्षता और गुणवत्ता: सड़कों के निर्माण में केवल कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि तकनीकी मानकों और निर्माण की गुणवत्ता पर ध्यान देना अनिवार्य है।
  • जनहित सर्वोपरि: प्रशासन का हर निर्णय आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीण कनेक्टिविटी में कोई बाधा न आए।

अभियंताओं के लिए ‘कंप्यूटर सक्षमता’ अनिवार्य

​आधुनिक दौर में जब सरकार के लगभग सभी कार्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो चुके हैं, विभाग ने तकनीकी दक्षता को कार्यकुशलता का आधार माना है। बैठक में यह बात सामने आई कि कई कनीय अभियंता (Junior Engineers) अभी भी डिजिटल रूप से उतने सक्षम नहीं हैं।

​इस संबंध में अपर सचिव ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया:

  1. स्मारित करना: उन कनीय अभियंताओं को तत्काल नोटिस (Smarit) भेजा जाए जिन्होंने अभी तक अनिवार्य कंप्यूटर सक्षमता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है।
  2. व्यक्तिगत संपर्क: अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे अभियंताओं से व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क करें और उन्हें शीघ्र परीक्षा पास करने के लिए प्रोत्साहित व निर्देशित करें।
  3. डिजिटल भविष्य: विभाग का लक्ष्य है कि भविष्य में कोई भी तकनीकी कार्य पारंपरिक फाइलों के बजाय डिजिटल माध्यमों से हो, जिसके लिए कंप्यूटर ज्ञान अनिवार्य है।

सेवानिवृत्त कर्मियों को राहत: 24 घंटे में लाभ का लक्ष्य

​बैठक का एक अत्यंत संवेदनशील और मानवीय पक्ष सेवानिवृत्त कर्मियों के हितों से जुड़ा रहा। विभाग में कई ऐसे मामले लंबित थे जहाँ सेवानिवृत्त कनीय अभियंता अपने सेवान्त लाभों (Retirement Benefits) के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे थे।

अपर सचिव ने इस पर सख्त आदेश जारी किए:

  • त्वरित निष्पादन: लंबित पेंशन और अन्य लाभों का भुगतान बिना किसी देरी के सुनिश्चित किया जाए।
  • बाधाओं का समाधान: जिन मामलों में प्रक्रियात्मक अड़चनें हैं, उन्हें संबंधित प्रशाखाओं के साथ समन्वय (Coordination) स्थापित कर तुरंत दूर किया जाए।
  • HRMS पोर्टल का उपयोग: मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) पोर्टल पर आवश्यक कार्रवाई को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया गया है ताकि डेटा पारदर्शी रहे और भुगतान में मानवीय हस्तक्षेप कम हो सके।

HRMS और समन्वय: डिजिटल सुशासन की ओर कदम

​अपर सचिव ने विभागीय कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए HRMS पोर्टल के अधिकतम उपयोग पर बल दिया है। अक्सर देखा जाता है कि विभिन्न प्रशाखाओं के बीच समन्वय की कमी के कारण फाइलें अटकी रहती हैं। संजय कुमार ने अधिकारियों से कहा कि वे समन्वय स्थापित कर ‘प्रोसीजरल बॉटलनेक्स’ को खत्म करें।

​यह बैठक दर्शाती है कि ग्रामीण कार्य विभाग अब केवल निर्माण एजेंसी के रूप में नहीं, बल्कि एक उत्तरदायी प्रशासनिक इकाई के रूप में उभरना चाहता है। 2026 के इस दौर में, जहाँ बिहार अपनी ग्रामीण सड़कों के नेटवर्क के लिए देश भर में सराहा जा रहा है, वहां इस प्रकार की आंतरिक समीक्षा बैठकें व्यवस्था की कमियों को दूर करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

निष्कर्ष: जवाबदेही से ही बदलेगी ग्रामीण तस्वीर

​पटना में हुई इस समीक्षा बैठक ने विभाग के भीतर एक नई ऊर्जा और दबाव का संचार किया है। अपर सचिव संजय कुमार का स्पष्ट संदेश है कि कर्मियों का हित और जनता का काम—दोनों ही विभाग की प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर हैं। कंप्यूटर परीक्षा से लेकर पेंशन भुगतान तक के निर्देश यह बताते हैं कि विभाग अब ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ के मंत्र पर काम कर रहा है।

​वॉयस ऑफ बिहार (VOB) ग्रामीण कार्य विभाग के इन सुधारों का स्वागत करता है। उम्मीद है कि इन कड़े निर्देशों के बाद बिहार की ग्रामीण सड़कों के निर्माण की गति में तेजी आएगी और सेवानिवृत्त अभियंताओं को उनके हक के लिए और अधिक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी।

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