बिहार की सड़कों पर अब ‘एआई’ का पहरा: 800 जोखिम भरे मोड़ों पर लगेगा आईटीएमएस; हादसों पर लगेगी लगाम

पटना। बिहार में सड़कों का जाल बिछने के साथ ही बढ़ती रफ़्तार अब जानलेवा साबित होने लगी है। आए दिन होने वाले सड़क हादसों और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी को देखते हुए राज्य सरकार ने अब तकनीक का सहारा लेने का बड़ा फैसला किया है। प्रदेश की सड़कों पर बढ़ते मृत्यु दर को कम करने के लिए परिवहन विभाग अब राज्य के लगभग 700 से 800 ऐसे स्थानों को चिन्हित कर चुका है, जो सुरक्षा के लिहाज से ‘अति संवेदनशील’ या ‘ब्लैक स्पॉट’ की श्रेणी में आते हैं। इन सभी जोखिम वाले कोरिडोर और प्रमुख चौक-चौराहों पर अब इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) लगाया जाएगा। गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को विभाग द्वारा साझा की गई यह जानकारी राज्य की यातायात व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव का संकेत है। इस पूरी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन ने अपनी तैयारी तेज कर दी है और इसी सिलसिले में 28 अप्रैल को एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई है।

विकास आयुक्त की अध्यक्षता में 28 अप्रैल को महामंथन

​इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को अमली जामा पहनाने के लिए विभागीय स्तर पर हलचल तेज है। आईटीएमएस परियोजना के सफल कार्यान्वयन और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण परामर्श बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। 28 अप्रैल को होने वाली इस बैठक में परिवहन विभाग के अलावा पुलिस, पथ निर्माण विभाग और अन्य संबंधित हितधारक शामिल होंगे।

​बैठक का मुख्य उद्देश्य परियोजना की लागत, तकनीकी बारीकियों और इसके संचालन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे पर अंतिम मुहर लगाना है। सरकार चाहती है कि यह प्रणाली केवल चालान काटने तक सीमित न रहे, बल्कि यह वास्तविक समय में सड़कों की निगरानी करने और आपातकालीन स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो। 28 अप्रैल की इस बैठक के बाद परियोजना के टेंडर और कार्यान्वयन की समय सीमा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

आईटीएमएस: केवल कैमरा नहीं, बल्कि सड़कों का ‘डिजिटल दिमाग’

​आम तौर पर लोग आईटीएमएस को केवल सीसीटीवी कैमरों का एक समूह मानते हैं, लेकिन तकनीकी रूप से यह उससे कहीं अधिक उन्नत है। यह एक ऐसी एकीकृत प्रणाली है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के आधार पर काम करती है।

इस प्रणाली की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • एआई आधारित ई-चालान: अब पुलिस को हर मोड़ पर खड़े रहने की जरूरत नहीं होगी। एआई कैमरे खुद-ब-खुद नियम तोड़ने वाले वाहनों (जैसे बिना हेलमेट, ट्रिपलिंग या रेड लाइट जंप) की पहचान करेंगे और स्वचालित रूप से ई-चालान जनरेट होगा।
  • अनुकूल यातायात नियंत्रण (ATCS): यह तकनीक सड़कों पर वाहनों के दबाव को भांपकर ट्रैफिक सिग्नल के समय को खुद ही एडजस्ट करेगी। इससे अनावश्यक जाम से मुक्ति मिलेगी और ईंधन की बचत होगी।
  • चेहरे की पहचान (Facial Recognition): अपराधियों और हिट-एंड-रन के मामलों में संलिप्त लोगों को पकड़ने के लिए इसमें ‘एफआर’ सिस्टम लगा होगा, जो डेटाबेस से मिलान कर संदिग्धों की पहचान कर सकेगा।
  • घटना पहचान और निगरानी: सड़क पर अगर कोई वाहन दुर्घटनाग्रस्त होता है या अचानक रुकता है, तो यह सिस्टम तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजेगा ताकि समय रहते एम्बुलेंस या क्रेन भेजी जा सके।

परिवहन सचिव का विजन: रफ़्तार पर लगाम और मीडिया का संज्ञान

​परिवहन विभाग के सचिव राज कुमार ने इस परियोजना की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आईटीएमएस के प्रभावी होने से राज्य की यातायात व्यवस्था काफी सुदृढ़ होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेज रफ़्तार से वाहन चलाने वालों के कारण ही सबसे अधिक हादसे होते हैं, और यह तकनीक सीधे तौर पर उनकी रफ़्तार को नियंत्रित करने का काम करेगी।

​विशेष बात यह है कि पिछले कुछ दिनों में मीडिया में सड़क सुरक्षा और बढ़ते हादसों को लेकर चली खबरों पर विभाग ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। सचिव ने बताया कि जनता की चिंताओं और मीडिया के फीडबैक के आधार पर ही इन 800 स्थानों का चयन किया गया है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे सड़कों पर चलते समय पूरी सावधानी बरतें। विशेषकर पैदल यात्रियों को फुट ओवरब्रिज का उपयोग करने और सड़क पार करते समय सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

खनन और ई-वे बिल की भी होगी डिजिटल निगरानी

​आईटीएमएस का उपयोग केवल ट्रैफिक कंट्रोल तक ही सीमित नहीं रहेगा। यह बिहार सरकार के राजस्व को सुरक्षित करने में भी बड़ी भूमिका निभाएगा।

  1. खनन सामग्री की ट्रैकिंग: राज्य राजमार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध खनन सामग्री ले जाने वाले वाहनों पर अब पैनी नजर रखी जा सकेगी। वाहनों की जीपीएस और कैमरा ट्रैकिंग के जरिए यह पता चल सकेगा कि किस वाहन के पास वैध परमिट है और कौन अवैध तरीके से सामग्री ले जा रहा है।
  2. ई-वे बिल सत्यापन: चयनित टोल प्लाजा पर ई-वे बिल का डिजिटल सत्यापन संभव होगा, जिससे माल ढुलाई में होने वाली चोरी और टैक्स चोरी पर लगाम लगेगी।
  3. एकीकृत निगरानी: प्रमुख शहरों और टोल प्लाजा को एक ही नेटवर्क से जोड़ने से पूरे राज्य की सड़कों का एक ‘डिजिटल मैप’ तैयार होगा, जहाँ हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा सकेगी।

बुनियादी ढांचे का विकास: टीएमसी और वीसी का जाल

​परियोजना की सफलता केवल कैमरों पर नहीं, बल्कि उसके पीछे के मजबूत नेटवर्क और मानव संसाधन पर टिकी है। इसके तहत निम्नलिखित बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा:

  • यातायात प्रबंधन केंद्र (TMC): यह राज्य स्तर का मुख्य कंट्रोल रूम होगा जहाँ से पूरे बिहार की सड़कों की निगरानी होगी।
  • अवलोकन केंद्र (VC): प्रत्येक जिले में अलग से ऑब्जर्वेशन सेंटर बनाए जाएंगे ताकि स्थानीय स्तर पर पुलिस और प्रशासन तुरंत कार्रवाई कर सके।
  • तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर: सॉफ्टवेयर विकास, होस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (डीसी एवं डीआर), हाई-स्पीड नेटवर्क और निर्बाध बिजली व्यवस्था के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
  • मानव संसाधन: इन केंद्रों को संचालित करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों और प्रशिक्षित कर्मियों की सेवाएं ली जाएंगी।

बिहार में सड़क हादसों का भयावह आंकड़ा और समाधान

​बिहार में हर साल हजारों लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवाते हैं। राष्ट्रीय उच्च पथ (NH) और राज्य उच्च पथ (SH) पर होने वाले हादसों का मुख्य कारण ओवरस्पीडिंग और गलत दिशा में वाहन चलाना रहा है। आईटीएमएस के आने से मनोवैज्ञानिक दबाव भी बढ़ेगा। जब चालकों को पता होगा कि हर 10-20 किलोमीटर पर वे कैमरे की नजर में हैं और उनकी गलती पर बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के चालान सीधे उनके मोबाइल पर पहुँचेगा, तो नियमों के प्रति सतर्कता अपने आप बढ़ेगी।

​700-800 चिन्हित स्थानों का चयन वैज्ञानिक आधार पर किया गया है, जहाँ पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन स्थानों पर ‘स्पीड लिमिट बोर्ड’ के साथ ‘स्पीड रडार’ भी लगाए जाएंगे।

डिजिटल सुशासन और सुरक्षित सफर का वादा

​अंततः, बिहार परिवहन विभाग की यह पहल राज्य को ‘स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट’ वाले राज्यों की श्रेणी में खड़ा कर देगी। सचिव राज कुमार और उनकी टीम ने तकनीक के जरिए मानवीय त्रुटियों को कम करने का जो रोडमैप तैयार किया है, वह सराहनीय है। 28 अप्रैल की बैठक इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

​वॉयस ऑफ बिहार (VOB) अपने पाठकों से अपील करता है कि तकनीक अपनी जगह है, लेकिन सड़क सुरक्षा की पहली जिम्मेदारी स्वयं चालक की है। नियमों का पालन करें, क्योंकि घर पर कोई आपका इंतजार कर रहा है। आने वाले समय में जब ये 800 स्पॉट आईटीएमएस से लैस होंगे, तब उम्मीद की जा सकती है कि बिहार की सड़कों पर सफर न केवल तेज होगा, बल्कि अधिक सुरक्षित भी होगा।

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