​नारायणपुर में रफ़्तार का तांडव: आइसक्रीम खरीद रहे मासूमों को नई कार ने रौंदा; दो बच्चों की हालत नाजुक; भागलपुर रेफर

नारायणपुर (भागलपुर)। बिहार के भागलपुर जिले में अनियंत्रित रफ़्तार और ड्राइवरों की लापरवाही मासूमों की जान पर भारी पड़ रही है। गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 की सुबह नारायणपुर प्रखंड में एक ऐसा हादसा हुआ जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। भवानीपुर थाना क्षेत्र के नारायणपुर गांव स्थित बजरंगबली मंदिर के समीप एक तेज रफ़्तार सफेद रंग की कार ने मौत का ऐसा मंजर पैदा किया कि हर कोई दहल उठा। जिस वक्त बच्चे चिलचिलाती धूप से राहत पाने के लिए सड़क किनारे एक आइसक्रीम के ठेले पर खड़े होकर अपनी पसंद की आइसक्रीम चुन रहे थे, उसी वक्त काल बनकर आई एक बेकाबू कार ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। इस भीषण टक्कर में दो मासूम बच्चे जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं, जबकि दो अन्य को गहरी चोटें आई हैं। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण सड़कों पर बेलगाम दौड़ते वाहनों और यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले चालकों के प्रति आक्रोश पैदा कर दिया है।

हादसे का मंजर: खुशियों के बीच पसरा सन्नाटा

​घटना सुबह करीब 10:30 बजे की है। नारायणपुर गांव के बजरंगबली मंदिर के पास रोज की तरह चहल-पहल थी। गर्मी बढ़ने के साथ ही बच्चे ठंडी चीजों की तलाश में घरों से बाहर निकले थे। स्थानीय निवासी सोनू रजक का पुत्र गुलशन कुमार और बनारसी यादव की नतनी मोनिका कुमारी अपने अन्य साथियों दीपक और ऋतिक के साथ सड़क किनारे खड़े थे। वे एक आइसक्रीम वाले के पास खड़े होकर पैसे दे रहे थे और अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।

​तभी अचानक एक सफेद रंग की नई कार, जो मनोहरपुर की दिशा से आ रही थी, अत्यंत तेज गति में अनियंत्रित होकर भीड़ की ओर मुड़ गई। चश्मदीदों के अनुसार, कार की रफ़्तार इतनी अधिक थी कि बच्चों को संभलने या भागने का एक पल भी समय नहीं मिला। कार सीधे बच्चों से टकराते हुए उन्हें कुछ दूर तक घसीट ले गई। टक्कर की आवाज इतनी जोरदार थी कि पूरा इलाका चीख-पुकार से गूंज उठा। आइसक्रीम का ठेला पलट गया और चारों बच्चे खून से लथपथ होकर सड़क पर बिखर गए।

बैकस्टोरी: मनोहरपुर से शुरू हुआ था ‘खूनी खेल’

​इस हादसे की जड़ें केवल नारायणपुर तक सीमित नहीं हैं। पीड़ित परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। बताया जा रहा है कि नारायणपुर में बच्चों को रौंदने से पहले इसी कार चालक ने मनोहरपुर गांव में भी एक महिला को जोरदार धक्का मारा था। महिला को टक्कर मारने के बाद चालक ने गाड़ी रोकने के बजाय उसकी रफ़्तार और बढ़ा दी और वहां से भागने की कोशिश की।

​मनोहरपुर में हुई इस घटना के बाद दो साहसी मोटरसाइकिल सवारों ने उस सफेद कार का पीछा करना शुरू किया। कार चालक पकड़े जाने के डर से पागलपन की हद तक रफ़्तार बढ़ा चुका था। पीछा किए जाने के दौरान, जैसे ही वह नारायणपुर बजरंगबली मंदिर के पास पहुँचा, उसका संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया। संकरी सड़क और सामने बच्चों की भीड़ को देखकर उसने शायद अचानक ब्रेक लगाया या मोड़ने की कोशिश की, लेकिन रफ़्तार अधिक होने के कारण कार सीधे मासूमों के ऊपर चढ़ गई। यह चालक की न केवल लापरवाही थी, बल्कि पकड़े जाने के डर से अन्य जिंदगियों को दांव पर लगाने का आपराधिक कृत्य था।

घायलों की स्थिति: गुलशन और मोनिका की हालत गंभीर

​इस हादसे में सबसे अधिक चोट गुलशन कुमार और मोनिका कुमारी को आई है।

  • गुलशन कुमार: सोनू रजक का यह मासूम पुत्र इस वक्त जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। कार की सीधी टक्कर उसके सिर पर लगी है, जिससे उसे गंभीर ‘हेड इंजरी’ हुई है। इसके अलावा उसका बायां पैर बुरी तरह टूट गया है। अस्पताल में उसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
  • मोनिका कुमारी: बनारसी यादव की नतनी मोनिका का भी एक पैर इस हादसे में टूट गया है और उसे शरीर के कई हिस्सों में अंदरूनी चोटें आई हैं।
  • दीपक और ऋतिक: इन दोनों बच्चों को भी मामूली चोटें आई हैं और वे गहरे सदमे में हैं।

​हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से सभी बच्चों को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने गुलशन और मोनिका की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (मायागंज), भागलपुर रेफर कर दिया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में इस घटना को लेकर मौन संवेदना के साथ-साथ भारी गुस्सा है।

ग्रामीणों का आक्रोश: खदेड़कर पकड़ा गया आरोपी चालक

​नारायणपुर के लोग अक्सर शांत स्वभाव के माने जाते हैं, लेकिन मासूमों के खून से सनी सड़क को देखकर उनका धैर्य जवाब दे गया। जैसे ही कार बच्चों को मारकर रुकी, चालक ने फिर से भागने का प्रयास किया। लेकिन स्थानीय युवाओं और पीछा कर रहे मोटरसाइकिल सवारों ने सूझबूझ दिखाई। ग्रामीणों ने चारों तरफ से घेराबंदी कर कार चालक को वाहन सहित पकड़ लिया।

​गुस्साई भीड़ ने चालक की जमकर क्लास लगाई, हालांकि कुछ समझदार लोगों के हस्तक्षेप के कारण मामला मॉब लिंचिंग तक नहीं पहुँचा। सूचना मिलते ही भवानीपुर थाना पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने आरोपी चालक को हिरासत में ले लिया है और दुर्घटनाग्रस्त सफेद कार को जब्त कर लिया है। पुलिस अब चालक का मेडिकल परीक्षण करा रही है ताकि यह पता चल सके कि कहीं वह नशे की हालत में तो नहीं था।

सड़क सुरक्षा पर सुलगते सवाल: आखिर जिम्मेदार कौन?

​नारायणपुर की यह घटना बिहार के ग्रामीण इलाकों में सड़क सुरक्षा की खोखली दास्तां बयां करती है।

  1. रफ़्तार पर लगाम क्यों नहीं?: मनोहरपुर से नारायणपुर के बीच की दूरी तय करने के दौरान चालक ने दो बार हादसे किए। यदि मुख्य सड़कों पर गश्त होती या रफ़्तार रोकने के लिए पर्याप्त बैरिकेडिंग होती, तो शायद बच्चों तक पहुँचने से पहले ही उसे रोका जा सकता था।
  2. हिट एंड रन की मानसिकता: मनोहरपुर में महिला को मारने के बाद चालक का भागना यह दर्शाता है कि उसे कानून का कोई डर नहीं था। भागने की इसी कोशिश ने चार और मासूमों को अस्पताल पहुँचा दिया।
  3. सड़कों के किनारे अतिक्रमण और बाजार: बजरंगबली मंदिर के पास अक्सर भीड़ रहती है। सड़कों के बिल्कुल किनारे ठेलों का होना और वाहनों की अनियंत्रित गति का मेल हमेशा जानलेवा साबित होता है।
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