
भागलपुर। अक्षय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सशक्त कदम उठाते हुए बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को भागलपुर के ऐतिहासिक सैंडिस कंपाउंड में ‘सौर मेला’ का भव्य आयोजन किया गया। इस मेले का विधिवत उद्घाटन जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर किया। वर्तमान समय में जब बिजली की बढ़ती कीमतें और पर्यावरण प्रदूषण बड़ी चिंता का विषय हैं, तब सरकार की ‘पीएम सूर्य घर योजना’ आम नागरिकों के लिए राहत की एक नई किरण बनकर उभरी है। इस मेले का मुख्य उद्देश्य न केवल लोगों को सौर ऊर्जा के प्रति जागरूक करना था, बल्कि उन्हें मौके पर ही तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाना भी था। सैंडिस कंपाउंड में जुटे विभिन्न बैंकों के स्टॉल और सौर पैनल कंपनियों के प्रतिनिधियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाला समय ‘हरित ऊर्जा’ का है और भागलपुर इस दिशा में नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
पीएम सूर्य घर योजना: 300 यूनिट मुफ्त बिजली और भारी सब्सिडी
मेले के दौरान लोगों को प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की बारीकियों से अवगत कराया गया। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके तहत उपभोक्ताओं को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिल सकती है। इसके अतिरिक्त, अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगाने के इच्छुक नागरिकों को सरकार द्वारा मोटी सब्सिडी दी जा रही है।
प्रशासन द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार सब्सिडी का गणित इस प्रकार है:
- 01 किलोवाट (KV) क्षमता के लिए: ₹30,000 की सब्सिडी।
- 02 किलोवाट (KV) क्षमता के लिए: ₹60,000 की सब्सिडी।
- 03 किलोवाट (KV) क्षमता के लिए: अधिकतम ₹78,000 तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
यह सब्सिडी सीधे तौर पर सौर पैनल लगाने की लागत को कम करती है, जिससे एक मध्यमवर्गीय परिवार भी आसानी से इस तकनीक को अपना सकता है। जिलाधिकारी ने जोर देकर कहा कि यह योजना न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि दीर्घकालिक बचत का भी एक शानदार माध्यम है।
मौके पर ऋण स्वीकृति: 31 आवेदकों को मिले स्वीकृति पत्र
सौर मेला केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यहाँ उन लोगों के लिए ‘ऑन-द-स्पॉट’ वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई गई जो सोलर पैनल लगाना चाहते हैं। जिलाधिकारी के हाथों मेले में लगभग 31 आवेदकों को स्वीकृत ऋण पत्र (Loan Approval Letters) प्रदान किए गए। यह इस बात का प्रमाण है कि जिला प्रशासन और बैंकिंग संस्थाएं इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए तालमेल के साथ काम कर रही हैं।
विभिन्न बैंकों द्वारा स्वीकृत ऋणों का विवरण निम्नलिखित है:
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI): 08 ऋण पत्र।
- यूको बैंक (UCO Bank): 06 ऋण पत्र।
- यूनियन बैंक: 05 ऋण पत्र।
- पंजाब नेशनल बैंक (PNB): 04 ऋण पत्र।
- बैंक ऑफ इंडिया (BOI): 04 ऋण पत्र।
- इंडियन बैंक: 04 ऋण पत्र।
बैंकों को सख्त निर्देश: ‘प्रति बैंक 100 लोगों को दिलाएं लाभ’
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने बैंकिंग क्षेत्र के प्रति अपनी अपेक्षाएं स्पष्ट कर दीं। उन्होंने मेले में उपस्थित सभी बैंकों के वरीय प्रबंधकों को निर्देशित किया कि वे केवल औपचारिकताओं तक सीमित न रहें। उन्होंने हर बैंक को एक लक्ष्य (Target) दिया कि वे कम से कम 100 लोगों को इस योजना के तहत ऋण की स्वीकृति प्रदान कर लाभान्वित करें।
उन्होंने कहा कि ऋण प्रक्रिया में सरलता और तेजी होनी चाहिए ताकि इच्छुक नागरिक सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाएं। जिलाधिकारी का यह रुख दर्शाता है कि वे भागलपुर को सौर ऊर्जा के मामले में बिहार का एक ‘आदर्श जिला’ बनाने की मंशा रखते हैं। मेले में अग्रिम बैंक प्रबंधक सहित विभिन्न बैंकों के शीर्ष अधिकारी भी उपस्थित थे, जिन्होंने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
पात्रता और आवेदन प्रक्रिया: कौन उठा सकता है लाभ?
मेले में विशेषज्ञों ने उन नागरिकों के लिए पात्रता के मापदंड भी स्पष्ट किए जो इस योजना से जुड़ना चाहते हैं।
- नागरिकता: आवेदक अनिवार्य रूप से भारतीय नागरिक होना चाहिए।
- आवास: आवेदक के पास अपना स्वयं का ‘पक्का छत’ वाला घर होना चाहिए।
- बिजली कनेक्शन: घर में वैध बिजली का कनेक्शन होना अनिवार्य है।
इच्छुक नागरिक इस योजना के लिए आधिकारिक पोर्टल pmsuryaghar.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल रखा गया है ताकि लोग स्वयं अपने मोबाइल या कंप्यूटर से भी इसे पूरा कर सकें।
ऊर्जा स्वतंत्रता की ओर भागलपुर के बढ़ते कदम
भागलपुर में इस प्रकार के सौर मेलों का आयोजन एक व्यापक बदलाव का संकेत है। बिजली बिलों की बढ़ती मार से त्रस्त आम आदमी के लिए अपनी छत पर ‘बिजली कारखाना’ लगाना एक क्रांतिकारी विचार है। 3 किलोवाट तक के पैनल एक सामान्य घर की बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त होते हैं। सरकार की सब्सिडी और बैंकों द्वारा सुलभ ऋण इस सपने को हकीकत में बदल रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सौर ऊर्जा को अपनाने से न केवल ग्रिड पर बोझ कम होगा, बल्कि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने से वायु प्रदूषण में भी गिरावट आएगी। बिहार जैसे कृषि प्रधान और विकासशील राज्य के लिए, जहाँ गर्मियों में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच जाती है, वहाँ सौर ऊर्जा ही एकमात्र स्थायी समाधान है।


