
भागलपुर/बिहपुर/नवगछिया। रिश्तों की मर्यादा जब स्वार्थ और अवैध संबंधों की भेंट चढ़ती है, तो परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण भागलपुर जिले के बिहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत भगवतीपुर गांव में देखने को मिला है। यहाँ एक वृद्ध की हत्या के पीछे किसी बाहरी दुश्मन का हाथ नहीं, बल्कि घर के भीतर ही रची गई एक खौफनाक साजिश थी। नवगछिया पुलिस अधीक्षक ने इस सनसनीखेज प्रकाश मंडल हत्याकांड का महज कुछ ही समय में सफल उद्भेदन करते हुए यह साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे कितनी भी चतुराई से अपनी पहचान छिपाने की कोशिश करे, कानून के लंबे हाथ उन तक पहुँच ही जाते हैं। इस मामले में पुलिस ने मृतक की छोटी बहू सहित कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने मिलकर एक निर्दोष वृद्ध की जीवनलीला समाप्त कर दी। यह पूरी घटना समाज के गिरते नैतिक मूल्यों और पारिवारिक विघटन की एक ऐसी कहानी है जो किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकती है।
अवैध संबंधों की भेंट चढ़ी रिश्तों की शुचिता
इस जघन्य हत्याकांड की नींव कोई तात्कालिक विवाद नहीं, बल्कि करीब एक महीने पहले शुरू हुआ अपमान और बदले का सिलसिला था। पुलिस की गहराई से की गई जांच में यह तथ्य उजागर हुआ है कि प्रकाश मंडल की छोटी बहू के गांव के ही एक युवक संजीव कुमार के साथ अवैध संबंध थे। इन संबंधों की गोपनीयता तब भंग हुई जब करीब एक माह पूर्व प्रकाश मंडल ने अपनी बहू और संजीव को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था।
एक वृद्ध पिता और परिवार के मुखिया के लिए यह दृश्य असहनीय था। इसके बाद गांव की पंचायत बुलाई गई, जहां सामाजिक लोक-लाज के बीच संजीव की सार्वजनिक रूप से पिटाई की गई। पंचायत के फैसले के अनुसार, संजीव से एक बॉन्ड भरवाया गया और उसे गांव छोड़ने की चेतावनी दी गई। उस समय तो संजीव वहां से दिल्ली के गाजियाबाद चला गया, लेकिन उसके भीतर सुलग रही बदले की आग शांत नहीं हुई थी। उसे लग रहा था कि प्रकाश मंडल ही उसके और उसकी प्रेमिका के बीच की सबसे बड़ी बाधा हैं और उसी ने उसे समाज में अपमानित करवाया है।
साजिश का ताना-बाना: गाजियाबाद से भगवतीपुर तक
दिल्ली के पास गाजियाबाद में रहते हुए भी संजीव लगातार प्रकाश मंडल की बहू के संपर्क में था। दोनों ने मिलकर प्रकाश मंडल को रास्ते से हटाने की योजना तैयार की। साजिश इतनी सटीक थी कि संजीव ने वारदात की रात ही गाजियाबाद से वापस आने का फैसला किया। वह लगातार अपनी प्रेमिका से मोबाइल के जरिए पल-पल की जानकारी ले रहा था।
20 और 21 अप्रैल की वह काली रात इस खौफनाक अंजाम की गवाह बनी। जब पूरा गांव गहरी नींद में था, तब घर के भीतर ही एक भेदी ने हत्यारे के लिए रास्ता साफ कर दिया था। पुलिस की पूछताछ में पतोहू ने यह स्वीकार किया है कि संजीव ने उसे फोन करके ससुर के सोने की सटीक जगह पूछी थी। बहू ने न केवल ससुर की लोकेशन बताई, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि जिस कमरे में वे सो रहे हैं, वहां कोई दरवाजा नहीं है, जिससे हमलावर को घुसने में कोई परेशानी न हो।
खौफनाक वारदात और अंधेरे का फायदा
घटना की रात गांव की बिजली कटी हुई थी, जिसका पूरा फायदा संजीव ने उठाया। वह अंधेरे का सहारा लेकर घर के आंगन और फिर उस कमरे तक पहुँचा जहां प्रकाश मंडल सो रहे थे। कमरे में कोई किवाड़ न होने के कारण उसे भीतर जाने में कोई मशक्कत नहीं करनी पड़ी। संजीव ने बिना देर किए सोते हुए वृद्ध पर बेहद करीब से गोली चला दी। गोली की आवाज से सन्नाटा तो टूटा, लेकिन जब तक घर के अन्य सदस्य कुछ समझ पाते, हत्यारा वहां से चंपत हो चुका था।
हैरानी की बात यह है कि उस समय कमरे में एक 10 वर्षीय मासूम बच्चा भी सो रहा था। अचानक हुए इस हमले और अंधेरे के कारण किसी को भी हमलावर की पहचान का आभास नहीं हुआ। परिवार के सदस्यों को लगा कि शायद कोई बाहरी अपराधी लूटपाट के इरादे से आया था, लेकिन हकीकत कुछ और ही थी।
पुलिस की वैज्ञानिक जांच और एसआईटी का गठन
वारदात की गंभीरता को देखते हुए नवगछिया पुलिस अधीक्षक ने तत्काल एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। इस टीम की कमान अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) को सौंपी गई, जिसमें बिहपुर थाना प्रभारी और तकनीकी शाखा (DIU) के माहिर खिलाड़ियों को शामिल किया गया। पुलिस ने अपनी जांच की दिशा तकनीकी साक्ष्यों की ओर मोड़ी।
जब पुलिस ने इलाके के मोबाइल टावर लोकेशन और कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) खंगाले, तो संजीव की मौजूदगी उस रात भगवतीपुर गांव में पाई गई। सबसे बड़ा सुराग पतोहू के मोबाइल से मिला। उसके कॉल रिकॉर्ड्स से यह साफ हो गया कि घटना से ठीक पहले और घटना वाली रात वह लगातार संजीव के साथ घंटों बातचीत कर रही थी। तकनीकी साक्ष्यों ने पतोहू के झूठ की दीवार को ढहा दिया और पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, जिसके बाद उसने सारा राज उगल दिया।
बरामदगी और मुख्य आरोपियों की धर-पकड़
पुलिस की त्वरित छापेमारी में न केवल छोटी बहू को पकड़ा गया, बल्कि इस साजिश में संजीव की मदद करने वाले उसके दो करीबियों, निखिल कुमार (लत्तीपुर निवासी) और दिवाकर कुमार (सोनबरसा निवासी) को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने इनकी निशानदेही पर वह अवैध हथियार (देसी कट्टा) भी बरामद कर लिया है जिससे इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। चौंकाने वाली बात यह रही कि बरामद कट्टे के बैरल में ही वह खोखा फंसा हुआ था जो वारदात के वक्त चलाया गया था। इसके अतिरिक्त पुलिस ने दो जिंदा कारतूस और वारदात में इस्तेमाल किए गए चार मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।
हालांकि मुख्य आरोपी संजीव अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है, लेकिन पुलिस अधीक्षक का दावा है कि उसे बहुत जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस ने इस मामले में कुल चार लोगों की संलिप्तता की पुष्टि करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की तैयारी पूरी कर ली है।
सामाजिक संवेदना और कानून का पहरा
भगवतीपुर की यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। एक तरफ जहां रिश्तों में भरोसे का कत्ल हुआ, वहीं दूसरी ओर वासना और बदले की भावना ने एक बुजुर्ग की जान ले ली। इस खुलासे के बाद पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग इस बात से स्तब्ध हैं कि घर की बहू ही ससुर की कातिल निकल सकती है।
नवगछिया पुलिस अब इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाने की योजना बना रही है ताकि पीड़ित परिवार को त्वरित न्याय मिल सके और समाज में यह कड़ा संदेश जाए कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। पुलिस अधीक्षक ने इस सफल उद्भेदन के लिए पूरी टीम की सराहना की है और लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के पारिवारिक विवाद को सुलझाने के लिए सामाजिक मर्यादाओं का पालन करें और कानून को अपने हाथ में न लें।


