
पटना। बिहार की विकास यात्रा में बुधवार, 22 अप्रैल 2026 का दिन एक नए मील का पत्थर के रूप में दर्ज हो गया है। दिल्ली प्रवास से वापस लौटते ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शासन की बागडोर संभालते हुए ‘एक्शन मोड’ में कैबिनेट की बैठक की। मुख्य सचिवालय स्थित मंत्रिमंडल कक्ष में शाम 6:00 बजे शुरू हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के सर्वांगीण विकास से जुड़े कुल 22 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र यादव की उपस्थिति में लिए गए ये निर्णय बुनियादी ढांचे, शिक्षा, सुरक्षा, शहरी नियोजन और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में बिहार की दिशा और दशा बदलने वाले साबित होंगे। सरकार ने इस बैठक के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि उसकी प्राथमिकता विकास की रफ़्तार को थामने की नहीं, बल्कि उसे नई ऊंचाइयों पर ले जाने की है।
हवाई कनेक्टिविटी: भागलपुर और सोनपुर में बनेंगे नए एयरपोर्ट
बिहार सरकार ने राज्य में हवाई सेवाओं के विस्तार और पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए दो बड़े ‘ग्रीनफील्ड’ हवाई अड्डों के निर्माण का ऐतिहासिक निर्णय लिया है:
- अजगैबीनाथ धाम (भागलपुर): अंग जनपद की पुरानी मांग को पूरा करते हुए भागलपुर के सुल्तानगंज स्थित अजगैबीनाथ धाम में नया हवाई अड्डा बनाया जाएगा।
- सोनपुर (सारण): उत्तर बिहार की कनेक्टिविटी में सुधार के लिए सोनपुर में भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का विकास किया जाएगा।
- परामर्श शुल्क: इन दोनों हवाई अड्डों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का जिम्मा ‘राइट्स लिमिटेड’ (RITES Ltd.) को सौंपा गया है, जिसके लिए 5.06 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
- दरभंगा एयरपोर्ट: दरभंगा हवाई अड्डे के विस्तार के लिए 1.35 एकड़ भूमि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को सौंपी जाएगी, जिससे वहां स्थायी सिविल एन्क्लेव का निर्माण संभव होगा।
पर्यटन विकास: काशी की तर्ज पर हरिहरनाथ कॉरिडोर
धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने सारण और मुंगेर के लिए महत्वपूर्ण आवंटन किए हैं:
- बाबा हरिहरनाथ मंदिर: सोनपुर स्थित प्रसिद्ध बाबा हरिहरनाथ मंदिर का विकास अब वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर होगा। इसके लिए सरकार ने 680 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया है।
- तारापुर (मुंगेर): तारापुर में सांस्कृतिक और धार्मिक सुविधाओं के विस्तार हेतु 15 एकड़ से अधिक भूमि पर्यटन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित की गई है।
सुरक्षा व्यवस्था: ‘पुलिस दीदी’ और हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर
राज्य में कानून-व्यवस्था और विशेषकर महिला सुरक्षा को लेकर सरकार ने ‘सॉफ्ट’ और ‘हार्ड’ दोनों तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया है:
- पुलिस दीदी योजना: स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों के बाहर छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘पुलिस दीदी’ तैनात होंगी। इसके लिए 1500 स्कूटी और पुलिस बल की गतिशीलता के लिए 3200 मोटरसाइकिलें खरीदी जाएंगी। इस पूरी योजना पर 66.75 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
- डाटा सेंटर: पटना के राजीव नगर में 172.80 करोड़ रुपये की लागत से ईआरएसएस (ERSS) और राज्य पुलिस डाटा सेंटर के लिए स्थायी भवन का निर्माण होगा।
- अग्नि सुरक्षा: बहुमंजिला इमारतों में आग से बचाव के लिए 18 करोड़ रुपये की लागत से 62 मीटर ऊँचा हाइड्रोलिक प्लेटफार्म खरीदा जाएगा।
शहरी नियोजन: 11 नए सेटेलाइट टाउनशिप की घोषणा
बिहार के प्रमुख शहरों पर बढ़ते आबादी के बोझ को कम करने के लिए मंत्रिपरिषद ने 11 ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप विकसित करने का क्रांतिकारी निर्णय लिया है:
- निर्माण पर रोक: इन टाउनशिप के लिए चिन्हित ‘कोर क्षेत्र’ में अब बिना अनुमति के भूमि की खरीद-बिक्री और किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
- उद्देश्य: इस पहल का मुख्य उद्देश्य अनियोजित शहरीकरण को रोकना और मास्टर प्लान के अनुसार आधुनिक नागरिक सुविधाओं से लैस सुव्यवस्थित शहर बसाना है।
शिक्षा और कौशल: आईआईटी पटना और पीएम-सेतु योजना
युवाओं के भविष्य और तकनीकी शिक्षा को संवारने के लिए कैबिनेट ने बड़े वित्तीय निवेश को मंजूरी दी है:
- आईआईटी पटना: संस्थान में रिसर्च पार्क की स्थापना के लिए 305 करोड़ रुपये और इन्क्यूबेशन सेंटर के दूसरे चरण के लिए 39.01 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
- पीएम-सेतु (PM-SETU): राज्य के 75 आईटीआई (ITI) को अत्याधुनिक कौशल केंद्रों में बदला जाएगा। इस 3615 करोड़ रुपये की योजना में बिहार सरकार 1192.95 करोड़ रुपये (33%) का योगदान देगी।
- उच्च शिक्षा परिसर: पटना के पुनपुन में राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) के लिए 287 करोड़ रुपये की लागत से 50 एकड़ भूमि का अधिग्रहण होगा। वहीं, बेगूसराय में निफ्ट (NIFT) के लिए 20 एकड़ और पटना में सीएनएलयू (CNLU) के लिए 7 एकड़ भूमि आवंटित की गई है।
सामाजिक कल्याण: सड़क दुर्घटनाओं को मिला ‘विशेष आपदा’ का दर्जा
कैबिनेट ने आम जनता के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किया है:
- अनुग्रह अनुदान: अब सामूहिक सड़क दुर्घटनाओं को राज्य की ‘विशेष स्थानीय आपदा’ माना जाएगा। इसके तहत मृतकों के परिजनों और घायलों को राज्य आपदा रिस्पांस फंड (SDRF) के मानकों पर मुआवजा मिलेगा।
- पूर्वव्यापी प्रभाव: सरकार ने सितंबर 2021 से मार्च 2022 के बीच हुए पीड़ितों को भी इस लाभ के दायरे में शामिल करने का फैसला किया है।
कृषि, जल संसाधन और बुजुर्गों का सम्मान
- बाणसागर जल साझाकरण: बिहार और झारखंड के बीच पानी के बंटवारे का नया प्रारूप तय हुआ, जिसमें बिहार को 5.75 एमएएफ और झारखंड को 2.00 एमएएफ जल आवंटित किया गया है।
- बीज फार्म नीति: शहरी क्षेत्रों में स्थित बीज फार्मों की जमीन विकास कार्यों के लिए ली जा सकेगी, जिसके बदले ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विभाग को दोगुनी जमीन मिलेगी।
- बुजुर्गों को प्राथमिकता: ‘बिहार निबंधन नियमावली 2026’ के तहत 80 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धों को संपत्ति निबंधन के दौरान विशेष सुविधाएं और प्राथमिकता दी जाएगी।
- सहयोग हेल्पलाइन: जनता की समस्याओं के समाधान के लिए 72.76 करोड़ रुपये की लागत से ‘सहयोग हेल्पलाइन’ की शुरुआत को मंजूरी दी गई है।
विकसित बिहार का संकल्प
मंत्रिपरिषद के ये 22 फैसले केवल कागजी घोषणाएं नहीं, बल्कि धरातल पर बदलाव लाने की सरकार की मंशा को दर्शाते हैं। हवाई अड्डों से लेकर ‘पुलिस दीदी’ तक और सेटेलाइट टाउनशिप से लेकर आईटीआई के अपग्रेडेशन तक, यह कैबिनेट बैठक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार को एक आधुनिक और आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में बड़ी छलांग है।


