जमुई की बेटियों के साथ लखीसराय में हैवानियत: दो सगी बहनों का दिनदहाड़े अपहरण कर दुष्कर्म, आरोपियों ने बनाया ‘लाइव वीडियो’

जमुई/लखीसराय। बिहार के जमुई जिले से एक ऐसी हृदयविदारक और रूह कँपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने न केवल शासन-प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है, बल्कि समाज के गिरते नैतिक स्तर को भी नग्न कर दिया है। जमुई जैसे व्यस्त शहर के बीचों-बीच स्थित महिसौड़ी चौक से दो सगी बहनों का दिनदहाड़े अपहरण कर लिया गया और पड़ोसी जिले लखीसराय ले जाकर उनके साथ वहशीपन की सीमाओं को लांघ दिया गया। इस घृणित वारदात में न केवल एक 15 वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया, बल्कि मानवता को शर्मसार करते हुए आरोपियों ने इस पूरी हैवानियत का ‘लाइव वीडियो’ भी रिकॉर्ड किया। यह घटना 15 अप्रैल 2026 की बताई जा रही है, जिसका खुलासा तब हुआ जब आरोपियों द्वारा सोशल मीडिया पर वायरल किए गए वीडियो ने पीड़ित परिवार तक अपनी पहुँच बनाई। इस घटना ने जमुई और लखीसराय के पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है, वहीं आम जनता के बीच सुरक्षा को लेकर एक गहरा खौफ पैदा हो गया है।

व्यस्त चौक से अपहरण: सुरक्षा दावों की उड़ती धज्जियां

​जमुई का महिसौड़ी चौक जिला मुख्यालय का सबसे व्यस्ततम इलाका माना जाता है, जहाँ हर वक्त पुलिस की गश्त और लोगों की भारी आवाजाही रहती है। 15 अप्रैल को इसी व्यस्त इलाके से तीन युवकों ने एक 15 वर्षीय छात्रा और उसकी छोटी बहन को उस समय अगवा कर लिया जब वे अपनी दैनिक दिनचर्या में व्यस्त थीं। दिनदहाड़े तीन युवकों द्वारा दो किशोरियों का अपहरण कर लेना यह दर्शाता है कि अपराधियों के मन से कानून का डर पूरी तरह समाप्त हो चुका है। वे जानते थे कि भीड़भाड़ वाले इलाके में भी वे इस वारदात को अंजाम देकर आसानी से निकल सकते हैं।

​अपहरण के बाद तीनों आरोपी दोनों बहनों को लेकर जमुई की सीमा पार कर पड़ोसी जिले लखीसराय चले गए। अपहरण से लेकर लखीसराय तक के सफर के दौरान किसी भी चेकपोस्ट या पुलिस बैरिकेडिंग पर इन्हें न रोका जाना पुलिसिया कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यह लापरवाही ही थी जिसने अपराधियों को अपने मंसूबों में कामयाब होने का मौका दिया।

लखीसराय में वहशीपन और डिजिटल दरिंदगी

​आरोपी दोनों बहनों को लखीसराय के किसी सुनसान इलाके में ले गए, जहाँ उन्होंने बड़ी बहन, जो कि कक्षा की छात्रा है, के साथ दुष्कर्म की घृणित वारदात को अंजाम दिया। दरिंदगी की हद तो तब हो गई जब इस पूरी घटना का आरोपियों ने मोबाइल से वीडियो बनाया। आज के दौर में अपराधी न केवल अपराध कर रहे हैं, बल्कि उसे डिजिटल सबूत के तौर पर रिकॉर्ड कर अपनी ‘मर्दानगी’ और ‘खौफ’ का प्रदर्शन करने से भी नहीं चूक रहे हैं।

​यह ‘लाइव वीडियो’ रिकॉर्डिंग न केवल पीड़ित छात्रा की गरिमा पर एक और प्रहार था, बल्कि यह समाज के उस डिजिटल कैंसर को भी उजागर करता है जहाँ जघन्य अपराधों को वायरल कर मनोरंजन या ब्लैकमेलिंग का जरिया बनाया जाता है। छोटी बहन के सामने ही उसकी बड़ी बहन के साथ हुए इस कृत्य ने दोनों बच्चियों के मन पर जो मनोवैज्ञानिक घाव छोड़े हैं, उसकी भरपाई शायद कभी न हो सके।

वीडियो वायरल होने के बाद परिजनों को लगी भनक

​हैरान करने वाली बात यह है कि 15 अप्रैल को हुई इस घटना के बाद पीड़ित छात्रा और उसकी बहन काफी समय तक खामोश रहीं, संभवतः लोक-लाज या आरोपियों की धमकी के डर से। इस बीच, आरोपियों ने अपनी हैवानियत का सबूत यानी वह वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर वायरल कर दिया। जब यह वीडियो जमुई और लखीसराय के स्थानीय ग्रुपों में प्रसारित होने लगा, तब जाकर पीड़ित परिवार के सदस्यों की नजर उस पर पड़ी।

​अपनी ही बेटियों के साथ हुई इस भयानक त्रासदी को मोबाइल स्क्रीन पर देखना किसी भी माता-पिता के लिए जीते-जी मरने जैसा अनुभव रहा होगा। वीडियो के माध्यम से सच्चाई सामने आने के बाद परिवार के पास पुलिस की शरण में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। 21 अप्रैल 2026, मंगलवार को पीड़ित छात्रा अपने परिजनों के साथ जमुई के महिला थाना पहुँची और आपबीती सुनाते हुए प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई।

पुलिस की कार्रवाई और एसपी के कड़े तेवर

​घटना की जानकारी मिलते ही जमुई पुलिस प्रशासन हरकत में आया। जमुई के पुलिस अधीक्षक (SP) विश्वजीत दयाल ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विशेष टीम का गठन किया है। उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया है कि आरोपियों की पहचान सुनिश्चित करने और उनकी गिरफ्तारी के लिए सघन छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है।

​एसपी विश्वजीत दयाल ने कड़े शब्दों में कहा कि इस घृणित कार्य में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि आरोपियों को उनके किए की कड़ी से कड़ी सजा मिले। पुलिस अब वायरल वीडियो के तकनीकी साक्ष्यों (IP Address और Upload Location) के माध्यम से आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा कर रही है। महिला थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पोक्सो (POCSO) एक्ट और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला आगे बढ़ाया जा रहा है।

सामाजिक और प्रशासनिक विफलता का विश्लेषण

​यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के सामूहिक पतन की कहानी है। एक तरफ हम ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नारे लगाते हैं, तो दूसरी तरफ हमारे व्यस्ततम चौक-चौराहों से किशोरियां सुरक्षित नहीं हैं। जमुई के महिसौड़ी चौक पर पुलिस की तैनाती और सीसीटीवी कैमरों की स्थिति पर अब जनता सवाल उठा रही है।

​आरोपियों का वीडियो बनाना और उसे वायरल करना यह दर्शाता है कि उनमें कानून की सजा का कोई डर नहीं है। वे जानते हैं कि डिजिटल साक्ष्य उनके खिलाफ जा सकते हैं, फिर भी वे इस कृत्य को गर्व के साथ साझा कर रहे हैं। यह एक विक्षिप्त मानसिकता का परिचायक है जो समाज के लिए ‘स्लीपर सेल’ से भी अधिक खतरनाक है। लखीसराय और जमुई के बीच का तालमेल और बॉर्डर चेकिंग की विफलता ने ही इन अपराधियों को सुरक्षित गलियारा प्रदान किया।

न्याय की पुकार और सुरक्षा की उम्मीद

​21 अप्रैल को दर्ज हुई इस प्राथमिकी ने जमुई की जनता को आक्रोशित कर दिया है। लोग सोशल मीडिया और सड़कों पर आरोपियों के लिए ‘फांसी’ की मांग कर रहे हैं। पीड़ित छात्रा और उसकी छोटी बहन को अब न केवल शारीरिक और मानसिक उपचार की जरूरत है, बल्कि उन्हें एक ऐसी न्याय व्यवस्था की भी आवश्यकता है जो त्वरित फैसला सुना सके।

​विश्वजीत दयाल (SP) के नेतृत्व में चल रही छापेमारी कितनी जल्दी रंग लाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। यदि आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा नहीं दिलाई गई, तो पुलिस प्रशासन पर से जनता का विश्वास पूरी तरह उठ जाएगा। जमुई की इन दो बेटियों के आंसू आज बिहार की न्याय प्रणाली से सवाल पूछ रहे हैं। क्या 2026 के इस आधुनिक युग में भी बेटियां दिनदहाड़े सुरक्षित नहीं रह सकेंगी? इस घटना का समाधान केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि एक ऐसा कड़ा दंड होना चाहिए जो भविष्य में किसी भी ‘वहशी’ की रूह कँपा सके।

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