धनबाद में बांका के मां-बेटे गिरफ्तार, 17 लाख के गांजे के साथ एलेप्पी एक्सप्रेस में दबोचे गए तस्कर

धनबाद/बांका। अपराध की दुनिया में जब रिश्तों की पवित्रता का उपयोग ढाल के रूप में किया जाने लगे, तो वह समाज के नैतिक पतन की सबसे डरावनी तस्वीर पेश करता है। झारखंड के कोयलांचल की हृदयस्थली धनबाद रेलवे स्टेशन पर शनिवार, 18 अप्रैल 2026 की सुबह एक ऐसी ही सनसनीखेज कार्रवाई हुई, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ आम जनता को भी हैरत में डाल दिया। रेलवे सुरक्षा बल (RPF), सीआईबी और रेल पुलिस की संयुक्त टीम ने एक सटीक गुप्त सूचना के आधार पर बिहार के बांका जिले के रहने वाले एक मां और बेटे को गिरफ्तार किया है। ये दोनों कोई साधारण मुसाफिर नहीं थे, बल्कि ‘ट्रॉली बैग’ में बिहार की अगली पीढ़ी के भविष्य को बर्बाद करने वाला नशे का सामान—करीब 34 किलोग्राम गांजा—लेकर सफर कर रहे थे। पकड़े गए गांजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 17 लाख रुपये आंकी गई है। यह गिरफ्तारी इस बात का प्रमाण है कि नशा माफिया अब कानून की नजरों से बचने के लिए महिलाओं और युवाओं को एक ‘पारिवारिक कवर’ के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि सुरक्षाकर्मियों को उन पर शक न हो।

एलेप्पी एक्सप्रेस और मुखबिर का सटीक इनपुट

​इस पूरे ऑपरेशन की पटकथा शनिवार की सुबह उस समय लिखी गई जब एलेप्पी एक्सप्रेस धनबाद स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर प्रवेश कर रही थी। आरपीएफ इंस्पेक्टर अजय प्रकाश को पहले ही एक विश्वसनीय मुखबिर से यह इनपुट मिल चुका था कि ओडिशा की ओर से एक महिला और एक पुरुष गांजे की एक बड़ी खेप लेकर धनबाद पहुँच रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती यह थी कि रोजाना हजारों यात्रियों के बीच इन दो संदिग्धों की पहचान कैसे की जाए।

​मुखबिर ने न केवल उनके पहनावे बल्कि महिला के चेहरे का भी हुलिया साझा किया था। जैसे ही ट्रेन रुकी, आरपीएफ और सीआईबी की टीम सादे लिबास में प्लेटफॉर्म पर तैनात हो गई। टीम की नजरें हर उस जोड़े को तलाश रही थीं जो मां-बेटे जैसे दिखें और जिनके पास भारी सामान हो। कुछ ही देर में टीम ने एक महिला और एक युवक को देखा जो संदेहास्पद तरीके से भारी-भरकम ट्रॉली बैग खींच रहे थे। मुखबिर द्वारा बताए गए चेहरे से मिलान होते ही टीम ने घेराबंदी कर दी। अचानक हुई इस कार्रवाई से दोनों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

तस्करों की पहचान: बांका के अमरपुर से जुड़ा है तार

​पकड़े गए आरोपियों की पहचान बिहार के बांका जिले के अमरपुर थाना क्षेत्र के निवासी के रूप में हुई है। आरोपी महिला का नाम कंचन देवी उर्फ राखी है, जबकि उसके साथ पकड़ा गया युवक उसका सगा बेटा रामचंद्र हरिजन उर्फ छोटू दास है। बांका जिले का अमरपुर इलाका पहले भी कई बार ऐसी संदिग्ध गतिविधियों के कारण चर्चा में रहा है, लेकिन मां-बेटे की इस जोड़ी ने जिस तरह से तस्करी के इस नेटवर्क में खुद को शामिल किया, उसने पुलिस को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।

​शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से इस काम में संलिप्त नहीं थे, बल्कि उन्हें मोटी रकम का लालच देकर इस धंधे में उतारा गया था। हालांकि, पुलिस को शक है कि यह किसी बड़े सिंडिकेट का हिस्सा हैं जो बांका और भागलपुर के रास्ते बिहार के अन्य जिलों में नशे की सप्लाई करता है। मां और बेटे का एक साथ होना उनके लिए सबसे बड़ा ‘सुरक्षा कवच’ था, क्योंकि अक्सर सुरक्षा एजेंसियां ऐसे जोड़ों को तीर्थयात्री या सामान्य पारिवारिक मुसाफिर समझकर छोड़ देती हैं।

ट्रॉली बैग का ‘डार्क’ राज: 33 किलो से ज्यादा गांजा बरामद

​जब पुलिस ने कंचन देवी और उसके बेटे रामचंद्र को हिरासत में लिया, तो सबसे पहले उनके पास मौजूद दो बड़े ट्रॉली बैग्स की तलाशी ली गई। ये बैग ऊपर से बिल्कुल सामान्य दिख रहे थे, जैसे किसी शादी या लंबे सफर की तैयारी हो। लेकिन जब उन्हें खोला गया, तो भीतर का नजारा देखकर पुलिसकर्मी भी दंग रह गए। दोनों बैगों के भीतर 16-16 पैकेट गांजा बड़े ही पेशेवर तरीके से पैक करके रखा गया था।

​कुल 33 किलोग्राम 880 ग्राम गांजा बरामद किया गया। गांजे की गुणवत्ता को देखते हुए बाजार में इसकी कीमत 16 लाख 94 हजार रुपये (लगभग 17 लाख) आंकी गई है। गांजे को इतनी सफाई से पैक किया गया था कि बाहर से उसकी गंध तक नहीं आ रही थी। यह दर्शाता है कि इस तस्करी के पीछे कोई अनुभवी हाथ काम कर रहा है, जिसने इन दोनों को पैकिंग और ट्रांसपोर्टेशन के गुर सिखाए थे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह गांजा ओडिशा के किस विशेष इलाके से खरीदा गया था और इसके मुख्य खरीदार कौन थे।

ओडिशा से डेहरी-ऑन-सोन का ‘स्मगलिंग रूट’

​पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपने पूरे रूट का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वे ओडिशा से गांजे की यह खेप लेकर चले थे और उनका अंतिम पड़ाव बिहार का डेहरी-ऑन-सोन था। ओडिशा के नक्सल प्रभावित या दुर्गम इलाकों से गांजा खरीदकर उसे बिहार और उत्तर प्रदेश के बाजारों में खपाना तस्करों का पुराना तरीका रहा है।

​तस्करों ने धनबाद को एक ‘ट्रांजिट पॉइंट’ (Transit Point) के रूप में इस्तेमाल किया था। उनका प्लान था कि धनबाद स्टेशन पर उतरकर वे किसी अन्य बस या छोटी गाड़ी के जरिए डेहरी-ऑन-सोन निकल जाएंगे, ताकि सीधे ट्रेन से बिहार में घुसने पर होने वाली चेकिंग से बचा जा सके। डेहरी-ऑन-सोन बिहार का एक ऐसा व्यापारिक केंद्र है जहाँ से अन्य जिलों में माल पहुँचाना आसान होता है। आरोपियों ने बताया कि इस खेप को पहुँचाने के बदले उन्हें एक निश्चित कमीशन का वादा किया गया था। पुलिस अब उस ‘मास्टरमाइंड’ की तलाश में है जिसने अमरपुर के इस परिवार को अपने जाल में फँसाया।

आरपीएफ और रेल पुलिस की मुस्तैदी: इंस्पेक्टर अजय प्रकाश का बयान

​आरपीएफ इंस्पेक्टर अजय प्रकाश ने इस सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि नशा मुक्त रेल और समाज के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि “मुखबिर का इनपुट अत्यंत सटीक था। हमें बताया गया था कि चेहरे की बनावट के आधार पर आरोपियों को पहचानना है। टीम ने धैर्य से काम लिया और जैसे ही मां-बेटे संदिग्ध अवस्था में दिखे, उन्हें हिरासत में ले लिया गया।”

​अजय प्रकाश ने यह भी स्पष्ट किया कि पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। रेल पुलिस अब इस बात की कड़ियों को जोड़ रही है कि क्या बांका के अमरपुर में इस तरह के और भी ‘कूरियर’ सक्रिय हैं। धनबाद स्टेशन पर हाल के दिनों में नशीले पदार्थों की बरामदगी के मामले बढ़े हैं, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को और भी कड़ा कर दिया गया है। डिजिटल निगरानी और मानवीय खुफिया तंत्र के तालमेल से ही इस बड़े गैंग का पर्दाफाश हो सका है।

सामाजिक चिंता: जब परिवार ही बन जाए अपराध का अड्डा

​बांका के इस मां-बेटे की गिरफ्तारी ने एक गंभीर सामाजिक सवाल खड़ा कर दिया है। एक मां, जिसका उत्तरदायित्व अपने बेटे को सही राह दिखाना होता है, वह खुद उसे अपराध के दलदल में धकेल रही है। आर्थिक तंगी या ‘शॉर्टकट’ से अमीर बनने की चाहत ने पारिवारिक मूल्यों को किस कदर खोखला कर दिया है, यह घटना उसका जीवंत उदाहरण है।

​नशा तस्करी के इस कारोबार में अब महिलाएं और युवा इसलिए भर्ती किए जा रहे हैं क्योंकि उन पर संदेह की गुंजाइश कम होती है। बांका और भागलपुर जैसे इलाकों में गरीबी का फायदा उठाकर तस्करों के सिंडिकेट ऐसे ही परिवारों को निशाना बनाते हैं। यह न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज के लिए भी एक अलार्म है। अगर परिवार ही अपराध की इकाई बन जाएगा, तो समाज की सुरक्षा की उम्मीद किससे की जाएगी?

आगे की कार्रवाई और तफ्तीश की दिशा

​फिलहाल कंचन देवी और रामचंद्र हरिजन पुलिस की गिरफ्त में हैं और उन्हें जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। धनबाद रेल पुलिस ने उनके पास से मिले मोबाइल फोनों को जब्त कर लिया है और कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) खंगाला जा रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि इन फोनों के जरिए ओडिशा के सप्लायरों और बिहार के रिसीवरों के बीच के पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ हो सकेगा।

​18 अप्रैल 2026 की यह दोपहर धनबाद स्टेशन के इतिहास में सुरक्षा बलों की सतर्कता के लिए याद रखी जाएगी। बांका निवासी इस मां-बेटे की गिरफ्तारी ने नशा माफियाओं के मनोबल को जरूर तोड़ा है, लेकिन यह लड़ाई अभी लंबी है। ‘वॉइस ऑफ बिहार’ (VOB) इस मामले की हर अपडेट पर नजर बनाए हुए है ताकि समाज के दुश्मनों का असली चेहरा उजागर होता रहे।

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