​सहरसा : पतरघट के मक्के खेत में मिला लापता महिला का शव, दिल्ली में मजदूरी कर रहे पति के पीछे उजड़ गया संसार

सहरसा। बिहार के सहरसा जिले में कानून-व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली एक हृदयविदारक वारदात सामने आई है। पतरघट थाना क्षेत्र के पस्तपार लहौना बहियार में शनिवार, 18 अप्रैल 2026 की सुबह उस समय चीख-पुकार मच गई, जब मक्के के घने खेतों के बीच से एक 30 वर्षीय महिला का शव बरामद किया गया। यह घटना केवल एक हत्या नहीं है, बल्कि उस भरोसे की भी मौत है जो एक ग्रामीण समाज अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर करता है। मृतका की पहचान पस्तपार वार्ड 12 निवासी लड्डू कामती की पत्नी उषा देवी के रूप में हुई है। उषा बीते गुरुवार से ही रहस्यमयी ढंग से लापता थी, और उसकी तलाश में जुटे परिजनों को अंततः वह खबर मिली जिसने उनके पैरों तले जमीन खिसक दी। अपराधियों ने न केवल एक महिला की जान ली, बल्कि साक्ष्य मिटाने की नियत से शव को घने मक्के के खेत में फेंक दिया। रविवार, 19 अप्रैल 2026 की यह रिपोर्ट उस खौफनाक वारदात और उसके पीछे छिपे अनसुलझे सवालों की विस्तृत पड़ताल करती है।

मक्के की ओट में दफन सच: शनिवार की वह मनहूस सुबह

​पस्तपार लहौना बहियार के इलाके में शनिवार की सुबह अन्य दिनों की तरह ही सामान्य गतिविधियों के साथ शुरू हुई थी। किसान और मजदूर अपने खेतों की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान एक मजदूर मक्के के खेत में खाद डालने के उद्देश्य से अंदर पहुँचा। जैसे ही वह खेत के बीचों-बीच पहुँचा, उसकी नजर जमीन पर पड़ी एक बेजान देह पर पड़ी। मक्के के ऊंचे और घने पौधों के बीच छिपी वह लाश किसी डरावनी फिल्म के दृश्य जैसी थी। मजदूर की चीख सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे अन्य ग्रामीण भी वहां दौड़े।

​देखते ही देखते पूरे इलाके में यह खबर आग की तरह फैल गई कि बहियार में किसी महिला की हत्या कर दी गई है। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पस्तपार थाना को दी। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष विजय कुमार पासवान पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। शव की स्थिति को देखकर यह स्पष्ट था कि हत्या काफी बेरहमी से की गई है। पुलिस ने घटनास्थल की घेराबंदी कर दी और शव की शिनाख्त की प्रक्रिया शुरू की गई। जल्द ही यह साफ हो गया कि यह शव वार्ड 12 की रहने वाली उषा देवी का है, जिसकी तलाश पिछले दो दिनों से की जा रही थी।

गुरुवार से लापता थी उषा: पिता के माथे पर थी चिंता की लकीरें

​उषा देवी की मौत के पीछे की कहानी गुरुवार, 16 अप्रैल से शुरू होती है। परिजनों के अनुसार, उषा गुरुवार दोपहर को घर से किसी काम के लिए निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। जब शाम ढलने तक वह घर नहीं पहुँची, तो परिवार के सदस्यों ने अपनी स्तर पर खोजबीन शुरू की। रिश्तेदारों और पड़ोसियों के यहाँ पूछताछ की गई, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला।

​बेबस पिता ने अपनी बेटी की सलामती की दुआ करते हुए पस्तपार थाने का रुख किया। वहां उन्होंने उषा की गुमशुदगी की लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया था, लेकिन शनिवार की सुबह तक किसी ठोस सुराग तक नहीं पहुँच सकी थी। पिता की वह आशंका सच साबित हुई जिसका उन्हें डर था। उनका कहना है कि उनकी बेटी की किसी से कोई व्यक्तिगत रंजिश नहीं थी, फिर आखिर किसने और क्यों इतनी बेरहमी से उसकी जान ले ली? यह सवाल अब पतरघट पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

परदेस में पति, घर में मातम: पलायन की कड़वी हकीकत

​इस त्रासदी का एक और मार्मिक पक्ष यह है कि मृतका का पति, लड्डू कामती, अपनी पत्नी और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए हजारों किलोमीटर दूर दिल्ली में रहकर मजदूरी करता है। बिहार के ग्रामीण अंचलों की यह एक आम कहानी है, जहाँ घर के पुरुष रोजी-रोटी की तलाश में महानगरों का रुख करते हैं और पीछे परिवार की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ देते हैं।

​जब लड्डू कामती को दिल्ली में अपनी पत्नी की मौत की खबर मिली, तो उस पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। शनिवार को वह आनन-फानन में सहरसा के लिए रवाना हुआ। घर पर बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिन बच्चों के लिए उषा माँ और पिता दोनों की भूमिका निभा रही थी, उनके सिर से अब हमेशा के लिए साया उठ चुका है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब घर का पुरुष बाहर रहकर मेहनत कर रहा है, तब घर की महिलाएं अपने ही गांव और खेतों में सुरक्षित नहीं हैं।

साक्ष्य मिटाने की साजिश और फोरेंसिक तफ्तीश

​थानाध्यक्ष विजय कुमार पासवान ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साक्ष्य संकलन के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। पुलिस का मानना है कि उषा की हत्या संभवतः कहीं और की गई और बाद में अंधेरे का फायदा उठाकर शव को मक्के के खेत में फेंक दिया गया। मक्के के खेतों का उपयोग अक्सर अपराधियों द्वारा इसलिए किया जाता है क्योंकि वहां दृश्यता कम होती है और शव को आसानी से छिपाया जा सकता है।

​जांच को वैज्ञानिक आधार देने के लिए विशेष फोरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल से मिट्टी के नमूने, पदचिह्न और अन्य संभावित साक्ष्य एकत्रित किए हैं। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या हत्या से पहले उषा के साथ किसी प्रकार की जोर-जबरदस्ती या अनहोनी हुई थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए सहरसा सदर अस्पताल भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही वह निर्णायक दस्तावेज होगा जो मौत के सही समय और तरीके का खुलासा करेगा।

सुलगते सवाल: क्या यह व्यक्तिगत रंजिश है या कोई गहरी साजिश?

​उषा देवी की हत्या ने कई अनुत्तरित प्रश्न खड़े कर दिए हैं। वह गुरुवार दोपहर को घर से किसके बुलावे पर या किस काम से निकली थी? क्या उसके मोबाइल फोन पर किसी का कॉल आया था? पुलिस अब मृतका के मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR) को खंगालने की तैयारी कर रही है। यदि वह किसी के साथ अपनी मर्जी से गई थी, तो वह व्यक्ति कौन था?

​ग्रामीणों और परिजनों के बीच कई तरह की आशंकाएं तैर रही हैं। कुछ लोग इसे आपसी रंजिश का मामला बता रहे हैं, तो कुछ इसे किसी सिरफिरे अपराधी की करतूत मान रहे हैं। पतरघट पुलिस ने वार्ड 12 और आसपास के कुछ संदिग्ध लोगों से पूछताछ भी शुरू कर दी है। थानाध्यक्ष विजय कुमार पासवान ने भरोसा दिलाया है कि पुलिस हर बिंदु पर जांच कर रही है और बहुत जल्द अपराधियों को सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।

इलाके में खौफ का माहौल: खेतों की ओर जाने से कतरा रहे लोग

​इस जघन्य हत्याकांड के बाद पस्तपार और आसपास की पंचायतों में खौफ का माहौल है। मक्के की फसल की कटाई और देखभाल का समय है, लेकिन महिलाएं अब खेतों की ओर जाने से कतरा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर दिनदहाड़े या शाम के वक्त भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, तो यह पुलिस की गश्त और खुफिया तंत्र की विफलता है।

​शनिवार की शाम जब उषा का शव पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जा रहा था, तब ग्रामीणों ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की। लोगों की मांग है कि अपराधियों की गिरफ्तारी 24 घंटे के भीतर हो और इस मामले में स्पीडी ट्रायल चलाकर दोषियों को सजा दिलाई जाए। सहरसा पुलिस प्रशासन के लिए यह मामला अब साख का सवाल बन चुका है, क्योंकि हाल के दिनों में सीमावर्ती जिलों में मक्के के खेतों से शव मिलने की घटनाएं बढ़ी हैं।

निष्कर्ष के बिना: न्याय की प्रतीक्षा में पस्तपार

​19 अप्रैल 2026 की यह सुबह सहरसा के पस्तपार वार्ड 12 के लिए केवल एक नई तारीख नहीं है, बल्कि यह उस इंसाफ की प्रतीक्षा की शुरुआत है जो उषा देवी के परिवार को चाहिए। वह 30 वर्षीय महिला, जो अपने घर-संसार को संवारने में जुटी थी, अब केवल एक पुलिस फाइल का हिस्सा बनकर रह गई है। लड्डू कामती के दिल्ली से वापस लौटने और पोस्टमार्टम की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस की जांच में और तेजी आने की उम्मीद है।

​पतरघट पुलिस को अब यह साबित करना होगा कि उनका कानून का हाथ अपराधियों के गिरेबान तक पहुँचने में सक्षम है। जब तक कातिल पकड़ा नहीं जाता, तब तक सहरसा के इन लहलहाते मक्के के खेतों के बीच खौफ की एक अदृश्य दीवार खड़ी रहेगी। वॉइस ऑफ बिहार (VOB) इस मामले की पल-पल की अपडेट पर नजर बनाए हुए है और यह सुनिश्चित करेगा कि उषा देवी के आंसुओं का हिसाब कानून के कटघरे में जरूर हो।

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