
पटना। बिहार की राजधानी में रचनात्मकता और सिनेमाई अभिव्यक्ति का एक नया अध्याय शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 को एमिटी यूनिवर्सिटी पटना के परिसर में संपन्न हुआ। एमिटी स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘एमिटी फिल्म महोत्सव 2026’ ने न केवल प्रदेश के बल्कि देश भर के युवा फिल्मकारों और कलाकारों के लिए एक ऐसा मंच प्रदान किया, जहाँ कल्पनाओं ने परदे पर जीवंत रूप लिया। समापन दिवस की शाम उस वक्त और भी यादगार हो गई जब लोकप्रिय वेब सीरीज “पंचायत” में अपनी सादगी और अभिनय से घर-घर में पहचान बनाने वाले अभिनेता चंदन रॉय मुख्य अतिथि के रूप में मंच पर पहुँचे। उनके आगमन ने छात्रों और उभरते हुए फिल्मकारों के बीच एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया। दो दिनों तक चले इस उत्सव में सिनेमा, संगीत, कला और संवाद का वह संगम दिखा, जिसने पटना के मीडिया और फिल्म जगत के परिदृश्य पर एक गहरी और अमिट छाप छोड़ी है।
अभिनेता चंदन रॉय: सादगी से सफलता तक का सफर
एमिटी फिल्म महोत्सव के समापन समारोह में आकर्षण का केंद्र रहे अभिनेता चंदन रॉय ने अपने संबोधन से छात्रों का दिल जीत लिया। “पंचायत” श्रृंखला में ‘विकास’ की भूमिका निभाने वाले चंदन रॉय ने अपनी सादगी भरी शैली में अपने अभिनय सफर की परतें खोलीं। उन्होंने किसी फिल्मी चकाचौंध के बजाय मनोरंजन जगत के उन संघर्षों और चुनौतियों के बारे में बात की, जिनका सामना एक उभरते हुए कलाकार को करना पड़ता है।
चंदन रॉय ने युवा रचनाकारों को प्रेरित करते हुए कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता; जुनून और दृढ़ता ही वे दो स्तंभ हैं जो किसी भी सपने को हकीकत में बदल सकते हैं। उन्होंने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वे अपनी कहानियों में बिहार की मिट्टी की सुगंध और वास्तविकता को जगह दें। उनके संबोधन ने सभागार में मौजूद हर छात्र और मीडिया पेशेवर को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि अगर नीयत साफ और कड़ी मेहनत का संकल्प हो, तो छोटे से गांव से निकलकर भी बड़े परदे पर अपनी जगह बनाई जा सकती है। उनकी उपस्थिति ने महोत्सव को एक पेशेवर गरिमा प्रदान की।
कुलपति का विजन: रचनात्मकता और सहयोग का संगम
एमिटी यूनिवर्सिटी पटना के कुलपति प्रोफेसर (डॉ) विवेकानंद पांडे ने इस दो दिवसीय आयोजन की अपार सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने महोत्सव के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए इसे केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि “रचनात्मकता, सहयोग और सिनेमाई अभिव्यक्ति का उत्सव” करार दिया। कुलपति ने कहा कि ऐसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य छात्रों को कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकालकर व्यावहारिक दुनिया की चुनौतियों से रूबरू कराना है।
उन्होंने एमिटी स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन की टीम की सराहना करते हुए कहा कि सिनेमा एक ऐसा सशक्त माध्यम है जो समाज को आईना दिखाने के साथ-साथ उसे बदलने की क्षमता भी रखता है। प्रोफेसर पांडे के अनुसार, इस महोत्सव ने यह साबित कर दिया है कि बिहार के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही दिशा और अवसर की तलाश है। उनके संबोधन ने शैक्षणिक उत्कृष्टता और रचनात्मक विकास के बीच एक मजबूत सेतु का काम किया।
बिहार में फिल्म निर्माण: असीमित संभावनाएं और सरकारी सहयोग
महोत्सव के दौरान बिहार में फिल्म निर्माण और डिजिटल मीडिया के भविष्य पर भी गंभीर चर्चा हुई। वरिष्ठ पत्रकार और सूचना एवं जन-संपर्क विभाग के पीआर एक्सपर्ट व मीडिया स्ट्रेटजिस्ट आनंद कौशल ने इस क्षेत्र में बिहार की बढ़ती संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार अब युवा क्रिएटर्स और फिल्मकारों के प्रति अत्यंत संवेदनशील है।
आनंद कौशल ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि बिहार सरकार फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कार्य करने वालों के लिए कई प्रकार की आधुनिक सुविधाएं और वित्तीय मदद उपलब्ध करा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य में लोकेशन से लेकर टैलेंट तक की कोई कमी नहीं है, और अब सरकार की नई नीतियों के कारण फिल्मकारों को पहले के मुकाबले कहीं अधिक सहयोग मिल रहा है। आनंद कौशल के अनुसार, बिहार अब केवल फिल्मों की कहानी का हिस्सा नहीं है, बल्कि वह फिल्म निर्माण का एक हब बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी रचनात्मकता का उपयोग बिहार की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए करें।
टैलेंट ट्रेजर: प्रतिभाओं का जीवंत प्रदर्शन
फिल्म महोत्सव के दौरान केवल परदे पर चलने वाली कहानियों पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि परिसर के हर कोने में कला की गूँज सुनाई दी। उप-कार्यक्रम “टैलेंट ट्रेजर” ने इस उत्सव में रंग और ऊर्जा का अद्भुत तड़का लगाया। इसमें छात्रों ने जीवंत नृत्य प्रस्तुतियों, कर्णप्रिय संगीत, मनमोहक चित्रकला और प्रभावशाली नाट्य प्रदर्शनों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
एमिटी का पूरा परिसर एक रचनात्मक प्रयोगशाला में तब्दील हो गया था, जहाँ कोई छात्र कैनवास पर अपनी कल्पनाएं उकेर रहा था, तो कोई नुक्कड़ नाटक के जरिए सामाजिक मुद्दों पर प्रहार कर रहा था। संगीत की धुनों और नृत्य के कदमों ने वातावरण में एक ऐसी जादुई ऊर्जा भर दी कि समापन समारोह तक उत्साह का स्तर कम नहीं हुआ। “टैलेंट ट्रेजर” ने यह संदेश दिया कि एक अच्छा फिल्मकार बनने के लिए कला के अन्य रूपों की समझ होना भी कितना अनिवार्य है।
आंकड़ों में महोत्सव: देश भर से जुटा युवाओं का हुजूम
एमिटी फिल्म महोत्सव 2026 की व्यापकता का अंदाजा इसमें शामिल होने वाले प्रतिभागियों की संख्या से लगाया जा सकता है। दो दिनों तक चले इस उत्सव में देश के विभिन्न हिस्सों के लगभग 50 स्कूलों और कॉलेजों के 300 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। यह केवल स्थानीय स्तर का आयोजन नहीं था, बल्कि इसने एक राष्ट्रीय स्वरूप ग्रहण किया।
फिल्म महोत्सव के लिए लगभग 150 लघु फिल्में, रील और वृत्तचित्र पंजीकृत किए गए थे। इन प्रविष्टियों की गुणवत्ता ने जूरी सदस्यों को भी प्रभावित किया। तकनीक का बेहतरीन इस्तेमाल और कहानियों की विविधता ने यह स्पष्ट कर दिया कि आज की युवा पीढ़ी सिनेमा की बारीकियों को कितनी गहराई से समझ रही है। मोबाइल फिल्म मेकिंग से लेकर प्रोफेशनल कैमरों पर शूट की गई फिल्मों तक, हर विधा ने यहाँ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
पुरस्कारों की बौछार: प्रतिभाओं को मिला सम्मान
महोत्सव का समापन एक भव्य पुरस्कार वितरण समारोह के साथ हुआ। यह वह क्षण था जब दो दिनों की कड़ी मेहनत और रचनात्मक संघर्ष को मान्यता मिली। विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेताओं को पुरस्कार, प्रमाण पत्र और ट्राफियां देकर सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान तालियों की गूँज और कैमरों की चमक के बीच विजेताओं के चेहरों पर एक अलग ही चमक थी।
सम्मानित श्रेणियों में प्रमुख रहीं:
- सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म: कहानी, पटकथा और प्रस्तुतीकरण के आधार पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का चुनाव किया गया।
- सर्वश्रेष्ठ संपादन: तकनीकी कौशल और फिल्म की लय को बनाए रखने के लिए यह पुरस्कार दिया गया।
- टैलेंट ट्रेजर चैंपियन: सांस्कृतिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दल को यह खिताब मिला।
- रॉकस्टार अवार्ड: संगीत और प्रदर्शन में ऊर्जा भरने वाले प्रतिभागी को इस विशेष सम्मान से नवाजा गया।
निष्कर्ष: बिहार के सिनेमाई भविष्य की नई दिशा
एमिटी फिल्म महोत्सव 2026 का समापन केवल एक कार्यक्रम का अंत नहीं है, बल्कि यह बिहार के उभरते हुए क्रिएटर्स के लिए एक नई शुरुआत है। एमिटी यूनिवर्सिटी ने इस महोत्सव के जरिए यह साबित किया है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्रियां देना नहीं, बल्कि प्रतिभाओं को निखारना और उन्हें सही मंच उपलब्ध कराना भी है। चंदन रॉय जैसे जमीनी कलाकारों की मौजूदगी और आनंद कौशल जैसे रणनीतिकारों के सुझावों ने छात्रों को एक स्पष्ट विजन दिया है।
बिहार की माटी अब अपनी कहानियों को खुद कहने के लिए तैयार है। इस फिल्म महोत्सव ने जो उत्साह पैदा किया है, वह निश्चित रूप से आने वाले समय में बिहार के फिल्म उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। जब 300 से अधिक छात्र अपनी-अपनी कहानियों और अनुभवों के साथ यहाँ से विदा हुए, तो उनके बैग में केवल प्रमाण पत्र नहीं थे, बल्कि एक नया आत्मविश्वास और अपनी कला के प्रति एक नया सम्मान भी था।


