
कोलकाता से जारी एक महत्वपूर्ण पहल के तहत ने रेलवे परिसरों में स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक अभियान चलाया। इस अभियान के तहत 16 अप्रैल 2026 को एक ही दिन में 1447 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जो रेलवे परिसर में कूड़ा फैलाते हुए पकड़े गए। इस दौरान कुल 2,89,400 रुपये का जुर्माना भी वसूला गया, जो इस बात का संकेत है कि रेलवे प्रशासन अब स्वच्छता को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
यह अभियान भारतीय रेल के 173वें वर्ष के उपलक्ष्य में शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य यात्रियों और आम नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना और रेलवे परिसरों को साफ-सुथरा बनाए रखना है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि स्वच्छता केवल एक आदत नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है, जिसे हर नागरिक को निभाना चाहिए।
इस अभियान का नेतृत्व पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक के आह्वान पर किया गया। उन्होंने सभी रेल उपयोगकर्ताओं से अपील की कि वे रेलवे पटरियों और स्टेशन परिसरों में कचरा न फैलाएं और केवल निर्धारित स्थानों पर ही कूड़ा डालें। उनके निर्देश के बाद पूरे पूर्व रेलवे क्षेत्र में यह विशेष अभियान चलाया गया।
अभियान के दौरान महाप्रबंधक, अपर महाप्रबंधक, विभिन्न विभागों के प्रधान अधिकारी और मंडल रेल प्रबंधक खुद मैदान में उतरे। उन्होंने रेलवे स्टेशनों पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए और ट्रेनों में सफर कर यात्रियों से सीधे संवाद किया। इस दौरान यात्रियों को यह बताया गया कि रेलवे ट्रैक पर कचरा फेंकना केवल गंदगी फैलाना नहीं है, बल्कि इससे सिग्नलिंग सिस्टम पर भी असर पड़ता है, ट्रैक की गुणवत्ता खराब होती है और ट्रेन संचालन में बाधा उत्पन्न होती है।
रेलवे प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वच्छता केवल पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि यह यात्रियों की सुरक्षा से भी सीधे तौर पर संबंधित है। यदि ट्रैक और स्टेशन परिसर साफ-सुथरे रहेंगे, तो दुर्घटनाओं की संभावना भी कम होगी और यात्रा का अनुभव बेहतर होगा।
इस अभियान में स्काउट्स एंड गाइड्स और नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों की भी सक्रिय भागीदारी रही। उन्होंने लोगों को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी का संदेश फैलाया। इसके साथ ही रेलवे प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था को भी सख्त किया, ताकि कोई भी व्यक्ति नियमों का उल्लंघन न कर सके।
यदि विभिन्न मंडलों की बात करें, तो सबसे ज्यादा मामले सियालदह मंडल में दर्ज किए गए, जहां 615 लोगों पर कार्रवाई की गई और 1,23,000 रुपये का जुर्माना वसूला गया। इसके बाद हावड़ा मंडल में 457 मामले सामने आए, जिनसे 91,400 रुपये का जुर्माना वसूला गया। आसनसोल मंडल में 217 मामलों में 43,400 रुपये और मालदा मंडल में 158 मामलों में 31,600 रुपये का जुर्माना वसूला गया।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह जुर्माना केवल दंडात्मक कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है। जब लोग नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना भरते हैं, तो वे भविष्य में ऐसी गलती करने से बचते हैं और दूसरों को भी ऐसा न करने की सलाह देते हैं।
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां हर व्यक्ति रेलवे परिसरों को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी महसूस करे। उन्होंने यह भी कहा कि स्वच्छता अभियान को आगे भी लगातार जारी रखा जाएगा और जरूरत पड़ने पर और सख्त कदम उठाए जाएंगे।
इस पहल को आम लोगों से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। कई यात्रियों ने इसे एक जरूरी कदम बताते हुए कहा कि इससे रेलवे स्टेशनों की स्थिति में सुधार होगा और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। वहीं कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि जागरूकता के साथ-साथ कूड़ेदानों की संख्या और सफाई व्यवस्था को भी और बेहतर बनाया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभियान तभी सफल हो सकते हैं, जब प्रशासन और जनता दोनों मिलकर प्रयास करें। केवल जुर्माना लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए लोगों की सोच में बदलाव लाना जरूरी है।
कुल मिलाकर, पूर्व रेलवे का यह अभियान स्वच्छता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल रेलवे परिसरों को साफ रखने में मदद करेगा, बल्कि यात्रियों में जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करेगा। आने वाले समय में यदि इस तरह के प्रयास लगातार जारी रहे, तो निश्चित रूप से रेलवे की छवि और सेवाओं में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।


