
दरभंगा। बिहार के दरभंगा जिले में रविवार की रात एक ऐसी हृदयविदारक घटना घटी जिसने न केवल एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है। सुंदरपुर तेनू पोड़ मोहल्ले में रविवार की देर शाम एक रिहायशी मकान में रसोई गैस सिलिंडर के रिसाव के कारण लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। इससे पहले कि घर के सदस्य या पड़ोसी कुछ समझ पाते, रसोई में रखा गैस सिलिंडर एक जोरदार धमाके के साथ फट गया। इस भीषण विस्फोट और उसकी चपेट में आने से पति-पत्नी और उनके मात्र चार महीने के मासूम बेटे की दर्दनाक मौत हो गई। घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आग बुझाने पहुँचे दमकल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी सहित चार अन्य लोग भी झुलस गए हैं, जिनमें से एक पड़ोसी की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। 12 अप्रैल 2026 की यह मनहूस शाम सुंदरपुर मोहल्ले के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है।
भोजन की तैयारी के दौरान मौत का तांडव
घटना के संदर्भ में प्राप्त विवरण के अनुसार, यह भीषण हादसा बेचन दास के तीन मंजिला मकान में हुआ। बेचन दास का परिवार इस मकान के अलग-अलग हिस्सों में रहता है और सबसे ऊपरी मंजिल यानी तीसरी मंजिल पर रसोई घर स्थित है। रविवार की देर शाम करीब आठ बजे के आसपास, बेचन दास की बहू निशु कुमारी (22) रोज की तरह परिवार के लिए रात का भोजन बनाने के लिए तीसरी मंजिल पर स्थित किचन में गई थीं। जैसे ही उन्होंने चूल्हा जलाने के लिए माचिस या लाइटर का प्रयोग किया, वहां पहले से ही रिस रही गैस ने अचानक आग पकड़ ली। संभवतः सिलिंडर के रेगुलेटर या पाइप में रिसाव था, जिसकी गंध का अंदाजा निशु को नहीं हो पाया था।
आग की लपटें किचन में तेजी से फैलने लगीं। निशु के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर नीचे की मंजिल पर मौजूद उनका पति गोविंद कुमार (24) अपने चार महीने के मासूम बेटे को गोद में लिए हुए ऊपर की ओर भागा। शोर सुनकर गोविंद के पिता बेचन दास (49), भाई गौतम कुमार (28) और पड़ोस में रहने वाला आदित्य ठाकुर (22) भी आग बुझाने और परिवार को बचाने के उद्देश्य से तीसरी मंजिल की ओर दौड़े। अभी ये लोग आग पर काबू पाने की कोशिश ही कर रहे थे कि अत्यधिक तापमान के कारण रसोई में रखा सिलिंडर किसी शक्तिशाली बम की तरह ब्लास्ट कर गया।
विस्फोट का असर और तबाही का मंजर
सिलिंडर विस्फोट इतना जोरदार था कि उसकी गूँज पूरे मोहल्ले में सुनाई दी। धमाके के कारण तीसरी मंजिल की दीवारें और छत का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। आग की लपटों और विस्फोट की सीधी चपेट में आने के कारण गोविंद कुमार, उनकी पत्नी निशु कुमारी और उनके चार महीने के मासूम बेटे की मौके पर ही मौत हो गई। धमाका इतना प्रचंड था कि इन तीनों को संभलने या वहां से निकलने का कोई अवसर नहीं मिला। मासूम बच्चे की मौत ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों को नम कर दिया।
वहीं, आग बुझाने और बचाव कार्य में जुटे बेचन दास, गौतम कुमार और पड़ोसी आदित्य ठाकुर बुरी तरह झुलस गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि आदित्य ठाकुर उस समय गोविंद के सबसे करीब था, जिसके कारण वह सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। विस्फोट के बाद लगी आग ने विकराल रूप ले लिया और पूरे घर को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया। मोहल्ले के लोगों ने तत्काल इसकी सूचना विश्वविद्यालय थाना पुलिस और अग्निशमन विभाग को दी।
रेस्क्यू ऑपरेशन और दमकल अधिकारी का घायल होना
सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय थाना की पुलिस और दमकल विभाग की तीन गाड़ियां मौके पर पहुँचीं। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि दमकल कर्मियों को घर के भीतर प्रवेश करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। दमकल विभाग की टीम का नेतृत्व कर रहे सदर अनुमंडल के अग्निशमन पदाधिकारी चंद्रकिशोर पासवान स्वयं मोर्चा संभालते हुए आग बुझाने के लिए आगे बढ़े। लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दमकल की तीन गाड़ियों ने आग पर पूरी तरह काबू पाया, लेकिन तब तक बेचन दास का वह आशियाना जलकर राख हो चुका था।
दुर्भाग्यवश, आग बुझाने की इसी प्रक्रिया के दौरान अग्निशमन पदाधिकारी चंद्रकिशोर पासवान भी आग की लपटों की चपेट में आकर झुलस गए। उन्हें अन्य कर्मियों की मदद से तुरंत घटनास्थल से निकाला गया। सभी घायलों को तत्काल दरभंगा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की टीम उनका उपचार कर रही है। घायलों में आदित्य ठाकुर की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बताई जा रही है, क्योंकि उनका शरीर काफी हद तक झुलस चुका है।
मोहल्ले में पसरा सन्नाटा और जांच की प्रक्रिया
इस हृदयविदारक घटना के बाद सुंदरपुर तेनू पोड़ मोहल्ले में सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बेचन दास का परिवार बहुत ही मिलनसार था और गोविंद अभी अपने जीवन की नई शुरुआत ही कर रहा था। चार महीने पहले ही घर में किलकारियां गूँजी थीं, लेकिन किसे पता था कि एक छोटी सी गैस लीकेज पूरे परिवार को लील जाएगी। लोगों ने यह भी बताया कि विस्फोट के समय घर के भीतर से निकलने वाली चीखें अभी भी उनके कानों में गूँज रही हैं।
अग्निशमन विभाग और पुलिस ने अब इस मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। झुलसे हुए अधिकारी चंद्रकिशोर पासवान ने अस्पताल से दिए अपने बयान में कहा कि प्रथम दृष्टया यह गैस रिसाव का ही मामला लग रहा है, लेकिन विस्फोट की तीव्रता और आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच की जाएगी। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या सिलिंडर में कोई तकनीकी खराबी थी या यह मानवीय चूक का परिणाम है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मृत्यु का मुख्य कारण झुलसना था या विस्फोट का प्रभाव।
विश्वविद्यालय थाना पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर लिया है और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की सलाह ली जा रही है। बेचन दास और उनके बेटे गौतम, जो इस समय अस्पताल में उपचाराधीन हैं, अभी बयान देने की स्थिति में नहीं हैं। घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और लोग सरकार से इस पीड़ित परिवार के लिए उचित मुआवजे और घायलों के बेहतर इलाज की मांग कर रहे हैं। जिस तरह से पूरा घर जलकर खाक हुआ है, उससे बेचन दास के सामने अब रहने का भी संकट खड़ा हो गया है। दमकल विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि वे गर्मी के मौसम में रसोई गैस के इस्तेमाल के समय अतिरिक्त सावधानी बरतें और रेगुलेटर को नियमित रूप से बंद करने की आदत डालें।


