
मालदा/भागलपुर। भारतीय रेल की धमनियों में बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों के खिलाफ मालदा रेल मंडल ने अपनी कमर कस ली है। रेल राजस्व की सुरक्षा और ट्रेनों में वैध यात्रियों को सुलभ यात्रा का अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से मंडल प्रशासन ने एक बार फिर ‘किलेबंदी’ कर सघन टिकट जांच अभियान चलाया। शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को मंडल के विभिन्न महत्वपूर्ण रेल खंडों और लंबी दूरी की ट्रेनों में चले इस अभियान ने बिना टिकट सफर करने वालों के बीच हड़कंप मचा दिया। मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन और वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक कार्तिक सिंह के नेतृत्व में चलाई गई इस विशेष मुहिम में केवल एक दिन के भीतर 305 ऐसे मामले पकड़े गए, जो बिना टिकट या अनियमित तरीके से यात्रा कर रहे थे। इन यात्रियों से जुर्माने के तौर पर 2,01,930 रुपये की राशि वसूल कर सरकारी खजाने में जमा कराई गई है। मालदा मंडल की इस कार्रवाई ने यह साफ संदेश दे दिया है कि ट्रेनों को ‘मुफ्त की सवारी’ समझने वालों के दिन अब लद चुके हैं।
सूरत और जयनगर एक्सप्रेस में चली विशेष ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
मालदा मंडल के वाणिज्य विभाग की टीम ने इस बार अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए उन ट्रेनों को निशाने पर लिया, जिनमें यात्रियों की भारी भीड़ रहती है। शनिवार को मुख्य रूप से ट्रेन संख्या 13425 मालदा टाउन–सूरत एक्सप्रेस और ट्रेन संख्या 13031 हावड़ा–जयनगर एक्सप्रेस में सघन जांच की गई। यह अभियान मालदा टाउन–रामपुरहाट–बरहरवा–मालदा टाउन रेल खंड पर चलाया गया। यह खंड सामरिक और व्यावसायिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ से लंबी दूरी के यात्रियों के साथ-साथ स्थानीय कामगारों और छोटे व्यापारियों की भी बड़ी आवाजाही होती है।
जैसे ही टिकट जांच दल (Ticket Checking Squad) ने ट्रेनों में प्रवेश किया, बिना टिकट यात्रा कर रहे यात्रियों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई यात्री टीटीई (TTE) को देखकर शौचालय की ओर भागे तो कई ने चलती ट्रेन में कोच बदलने की कोशिश की, लेकिन रेल अधिकारियों की पूर्व नियोजित घेराबंदी के कारण वे बच नहीं सके। कार्तिक सिंह के नेतृत्व में टीम ने न केवल सामान्य कोचों बल्कि स्लीपर और आरक्षित कोचों में भी घुसकर यात्रियों के टिकटों का मिलान किया। इस दौरान कई ऐसे यात्री भी मिले जो कम दूरी का टिकट लेकर लंबी दूरी का सफर तय कर रहे थे, या जिनके पास वैध श्रेणी का टिकट नहीं था।
राजस्व की सुरक्षा और वैध यात्रियों का हक
रेलवे के लिए बिना टिकट यात्रा करना केवल एक आर्थिक नुकसान नहीं है, बल्कि यह उन ईमानदार यात्रियों के अधिकारों का भी हनन है जो अपनी मेहनत की कमाई से टिकट खरीदकर यात्रा करते हैं। मनीष कुमार गुप्ता ने इस अभियान की सफलता पर जोर देते हुए कहा कि रेलवे राजस्व की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जब कोई यात्री बिना टिकट के आरक्षित कोच में घुस जाता है, तो वह न केवल रेलवे के नियमों का उल्लंघन करता है बल्कि आरक्षित सीट वाले यात्री की सुविधाओं और सुरक्षा में भी खलल डालता है।
शनिवार को वसूले गए 2.01 लाख रुपये का जुर्माना यह दर्शाता है कि ट्रेनों में बिना टिकट यात्रा करने की प्रवृत्ति अब भी व्यापक है। रेल प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के सघन और औचक निरीक्षणों (Surprise Inspections) से न केवल राजस्व में वृद्धि होती है, बल्कि यात्रियों के भीतर यह डर भी पैदा होता है कि पकड़े जाने पर उन्हें न केवल किराया देना होगा, बल्कि भारी जुर्माना भी भरना पड़ेगा।


