​पटना में भागलपुर की छात्रा की संदिग्ध मौत: 20 दिन बाद पिता ने खोला मोर्चा, लिव-इन पार्टनर पर हत्या का संगीन आरोप

पटना। बिहार की राजधानी पटना के पॉश इलाके श्रीकृष्णापुरी थाना क्षेत्र में हुई एक 26 वर्षीय छात्रा की मौत का मामला अब एक नया और पेचीदा मोड़ लेता नजर आ रहा है। करीब 20 दिन पहले जिस घटना को प्रथम दृष्टया आत्महत्या मानकर पुलिस और समाज ने देखा था, उसमें अब ‘हत्या’ की कड़वी गंध आने लगी है। मूल रूप से भागलपुर की रहने वाली और पटना में रहकर भविष्य संवारने का सपना देख रही इस मेधावी छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद उसके परिजनों ने अब खामोशी तोड़ी है। मृतका के पिता ने अपनी बेटी की मौत को ‘आत्महत्या’ मानने से साफ इनकार करते हुए उसके लिव-इन पार्टनर पर हत्या का सीधा आरोप लगाया है। यह मामला केवल एक छात्रा की मौत का नहीं है, बल्कि यह उन तमाम युवाओं की सुरक्षा और भावनात्मक स्थिरता पर भी सवाल खड़ा करता है जो घर से दूर बड़े शहरों में अपने सपनों का पीछा करने आते हैं। रविवार, 12 अप्रैल 2026 को मिली जानकारी के अनुसार, पटना पुलिस अब इस मामले की नए सिरे से पड़ताल करने की तैयारी में है, क्योंकि पिता का डाक से भेजा गया आवेदन कई अनसुलझे सवालों के साथ वरीय पुलिस अधिकारियों की मेज पर पहुँच चुका है।

20 मार्च की वो काली रात: क्या हुआ था श्रीकृष्णापुरी में?

​घटना की शुरुआत बीते 20 मार्च 2026 को हुई थी। पटना के श्रीकृष्णापुरी थाना क्षेत्र स्थित एक अपार्टमेंट में भागलपुर की 26 वर्षीय छात्रा का शव संदिग्ध अवस्था में पाया गया था। वह पिछले एक वर्ष से अपने प्रेमी पीयूष के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी। पीयूष भी पटना में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। घटना की रात कमरे के भीतर से छात्रा का शव फांसी के फंदे से लटका हुआ मिला था।

​शुरुआती पूछताछ में पीयूष ने पुलिस को बताया था कि उस रात दोनों के बीच किसी बात को लेकर तीखी कहासुनी हुई थी। झगड़ा इतना बढ़ा कि आवेश में आकर छात्रा ने खुद को कमरे में बंद कर लिया और फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। उस समय पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण ‘दम घुटना’ (फांसी के कारण) बताया गया था, जिसके चलते मामला आत्महत्या की दिशा में बढ़ गया था। छात्रा के परिजन भी उस समय गहरे सदमे में थे और उन्होंने पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं दी थी, लेकिन 20 दिनों के भीतर परिस्थितियों के आकलन और कुछ संदिग्ध जानकारियों ने परिजनों के मन में संदेह का बीज बो दिया।

पिता का डाक से भेजा गया ‘सस्पेंस’ भरा आवेदन

​इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मृतका के पिता ने पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसपी) को डाक के माध्यम से एक विस्तृत आवेदन भेजा। आमतौर पर ऐसी घटनाओं में लोग तुरंत प्राथमिकी दर्ज कराते हैं, लेकिन इस मामले में पिता ने 20 दिनों के गहन चिंतन और संभवतः कुछ आंतरिक जानकारियों के बाद यह कदम उठाया है।

​पिता का आरोप है कि उनकी बेटी कभी भी खुदकुशी जैसा आत्मघाती कदम नहीं उठा सकती थी। उसने भागलपुर से पटना तक का सफर एक बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए तय किया था। आवेदन में पीयूष पर गंभीर आरोप लगाते हुए पिता ने कहा है कि लिव-इन पार्टनर ने ही किसी विवाद के चलते उनकी बेटी की हत्या की है और साक्ष्यों को मिटाने या मामले को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को फंदे से लटका दिया। पिता ने पुलिस से मांग की है कि घटना की रात के कॉल रिकॉर्ड्स, सीसीटीवी फुटेज और पीयूष के बयानों की दोबारा सूक्ष्मता से जांच की जाए। उन्होंने यह भी अंदेशा जताया है कि उनकी बेटी को लंबे समय से मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।

लिव-इन रिलेशनशिप की उलझती कड़ियाँ और ‘कहासुनी’ का रहस्य

​छात्रा और पीयूष के बीच पिछले एक साल से चल रहे लिव-इन रिलेशनशिप की कहानी अब जांच के घेरे में है। पटना में रहकर बीपीएससी या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले हजारों युवाओं की तरह यह जोड़ा भी अपनी एक अलग दुनिया बसाए हुए था। लेकिन, 20 मार्च की रात हुई वह ‘कहासुनी’ आखिर किस विषय पर थी? क्या वह केवल एक सामान्य झगड़ा था या उसके पीछे कोई गहरा राज छिपा था?

​पुलिस सूत्रों के अनुसार, पीयूष ने स्वीकार किया है कि दोनों के बीच अनबन रहती थी। लिव-इन रिलेशनशिप में अक्सर आने वाले उतार-चढ़ाव क्या इस स्तर तक पहुँच गए थे कि एक जान चली गई? परिजनों का तर्क है कि यदि दोनों के बीच विवाद था, तो पीयूष ने छात्रा को रोकने की कोशिश क्यों नहीं की? शव के फंदे से लटकने और पुलिस के पहुँचने के बीच के समय का अंतराल (Time Gap) भी संदेह पैदा कर रहा है। क्या पीयूष ने घटना के बाद तुरंत पुलिस या परिजनों को सूचित किया था, या फिर उसने कुछ समय साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ में बिताया? इन सवालों के जवाब अब पीयूष से दोबारा होने वाली पूछताछ में ही मिल पाएंगे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाम परिजनों का संदेह: पुलिस की चुनौती

​पटना पुलिस के सामने इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के आरोपों के बीच संतुलन बनाना है। मेडिकल रिपोर्ट स्पष्ट रूप से कहती है कि मौत फांसी लगाने के कारण हुई है, जो कि आत्महत्या की ओर इशारा करता है। हालांकि, फोरेंसिक विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार ‘एंटी-मॉर्टम’ (मौत से पहले) चोटों या गला घोंटने के बाद शव को लटकाने की घटनाओं में भी रिपोर्ट इसी तरह की आती है, जब तक कि बारीकी से विसरा जांच न की जाए।

​श्रीकृष्णापुरी पुलिस अब उन तमाम ‘बिंदुओं’ पर काम कर रही है जो पिता के आवेदन में उठाए गए हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या मृतका के शरीर पर फांसी के फंदे के अलावा भी कोई चोट के निशान थे? क्या कमरे में किसी हाथापाई के सबूत मिले थे? पुलिस अब छात्रा के उन सहेलियों और दोस्तों से भी संपर्क कर रही है जिनसे उसने मौत से कुछ दिन पहले बात की थी। यदि पिता के आरोपों में थोड़ी भी सच्चाई निकलती है, तो यह आत्महत्या का मामला ‘हत्या के लिए उकसाने’ (Abetment to suicide) या सीधे तौर पर ‘हत्या’ में तब्दील हो सकता है।

भागलपुर से पटना तक गम और गुस्से का माहौल

​छात्रा मूल रूप से भागलपुर की रहने वाली थी, जहाँ के ‘अंग जनपद’ के लोग अपनी सादगी और शिक्षा के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं। भागलपुर में रहने वाले उसके परिजनों और जान-पहचान वालों के बीच इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि मेधावी बेटियों का इस तरह खामोश हो जाना पूरे समाज के लिए एक बड़ी क्षति है।

​पटना के प्रतियोगी परीक्षा हब (जैसे मुसल्लहपुर हाट या बोरिंग रोड) में रहने वाले अन्य छात्रों के बीच भी इस घटना ने सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी है। लिव-इन रिलेशनशिप की कानूनी जटिलताओं और उसमें होने वाले भावनात्मक शोषण के मामलों में अक्सर लड़कियों को ही नुकसान उठाना पड़ता है। भागलपुर के छात्र संगठनों ने भी मांग की है कि इस मामले की जांच किसी उच्चाधिकारी की देखरेख में पारदर्शी तरीके से की जाए ताकि सच सामने आ सके।

जांच का अगला चरण: मोबाइल और डिजिटल साक्ष्यों की तलाश

​पुलिस की जांच अब पूरी तरह से ‘डिजिटल साक्ष्यों’ पर केंद्रित होने वाली है। छात्रा और पीयूष के मोबाइल फोन को लैब में भेजा जा सकता है ताकि उनके डिलीट किए गए संदेशों और कॉल हिस्ट्री को दोबारा प्राप्त किया जा सके। 20 मार्च की रात के उन आखिरी घंटों का ब्यौरा मोबाइल टावर लोकेशन और व्हाट्सएप चैट्स से ही मिल सकता है।

​मृतका के पिता द्वारा डाक से भेजे गए आवेदन को स्वीकार करते हुए वरीय पुलिस अधिकारियों ने श्रीकृष्णापुरी थाने को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। पुलिस अब पीयूष के उन दावों की सत्यता की जांच करेगी कि वह घटना के वक्त कहाँ था और उसने दरवाजा तोड़कर शव को उतारने का प्रयास किया या नहीं। यदि पीयूष के बयानों में विरोधाभास मिलता है, तो उसकी गिरफ्तारी भी संभव है।

न्याय की आस और अधूरे सपने

​26 साल की उम्र, जिसमें एक युवा अपने करियर की ऊंचाइयों को छूने का सपना देखता है, उस उम्र में एक छात्रा का शव फंदे पर लटकना व्यवस्था और समाज दोनों की विफलता है। क्या वह भागलपुर की बेटी वाकई जिंदगी से हार गई थी, या उसे किसी ने हारने पर मजबूर कर दिया? पिता का 20 दिन बाद उठा यह कदम भले ही देरी से लिया गया हो, लेकिन यह न्याय की उस तड़प को दर्शाता है जो एक बाप अपनी बेटी के लिए महसूस कर रहा है।

The Voice of Bihar (VOB) की टीम इस संवेदनशील मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी। न्याय केवल सजा देने में नहीं, बल्कि सच्चाई को बाहर लाने में है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की तकनीकी बारीकियां अपनी जगह हैं, लेकिन एक पिता की गुहार को अनसुना नहीं किया जा सकता। पटना पुलिस के लिए यह साख का सवाल है कि वह इस ‘लिव-इन’ मिस्ट्री को सुलझाए और भागलपुर की उस बेटी को इंसाफ दिलाए जिसका सपना पटना की गलियों में दम तोड़ गया।

  • ये भी पढ़े..

    भाजपा प्रदेश कार्यालय में नवनियुक्त पदाधिकारियों की बैठक, संगठन विस्तार और बूथ सशक्तिकरण पर जोर

    Share Add as a preferred…

    शिवहर में DRI की बड़ी कार्रवाई, बसपा के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी भोला झा के पैतृक आवास पर छापेमारी

    Share Add as a preferred…