
पटना। बिहार की सत्ता के गलियारों में इस वक्त हर बीतता मिनट एक नई कहानी लिख रहा है। राजधानी पटना के 1 अणे मार्ग (मुख्यमंत्री आवास) पर रविवार, 12 अप्रैल 2026 की दोपहर जिस तरह की हलचल देखी गई, उसने उन तमाम अटकलों को अब हकीकत के बेहद करीब पहुँचा दिया है जो पिछले तीन दिनों से हवा में तैर रही थीं। रविवार को एक बार फिर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। यह मुलाकात इसलिए भी विशेष है क्योंकि शनिवार को ही दोनों नेताओं के बीच लंबी बातचीत हुई थी और 24 घंटे के भीतर दूसरी बार इस तरह की बैठक का होना यह संकेत देता है कि नई सरकार के गठन की पटकथा पूरी तरह लिखी जा चुकी है। करीब 25 मिनट तक चली इस ‘मैराथन’ बैठक के बाद जब सम्राट चौधरी बाहर निकले, तो उनके चेहरे के हाव-भाव ने बहुत कुछ बयां किया, हालांकि उन्होंने मीडिया से दूरी बनाए रखी। लेकिन उनके साथ मौजूद जेडीयू के कद्दावर नेता और मंत्री विजय चौधरी ने जो संकेत दिए, वे बिहार की भविष्य की राजनीति के लिए किसी भूकंप से कम नहीं हैं।
25 मिनट का ‘पावर गेम’: बंद कमरे में क्या हुई बात?
रविवार की इस मुलाकात में सम्राट चौधरी अकेले नहीं थे। उनके साथ बिहार सरकार के मंत्री विजय चौधरी और जेडीयू के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर भी मौजूद रहे। राजनीति के जानकारों का मानना है कि इन 25 मिनटों में केवल ‘औपचारिक मुलाकात’ नहीं हुई होगी, बल्कि सत्ता हस्तांतरण के उन तकनीकी पहलुओं पर अंतिम मुहर लगी होगी जो अब तक अटके हुए थे। नीतीश कुमार द्वारा 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद से ही यह स्पष्ट हो गया था कि वे अब मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के लिए पूरी तरह मानसिक रूप से तैयार हैं।
इस बैठक के दौरान संभवतः उन नामों पर चर्चा हुई होगी जो आगामी 15 अप्रैल को शपथ ले सकते हैं। चूंकि नीतीश कुमार स्वयं राज्यसभा जा रहे हैं, इसलिए बिहार में एक ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो एनडीए के तमाम घटक दलों (भाजपा, जदयू, लोजपा-आर, हम और रालोमो) को एक सूत्र में पिरोकर रख सके। सम्राट चौधरी इस वक्त भाजपा के सबसे मजबूत स्तंभ माने जा रहे हैं और नीतीश कुमार के साथ उनका बढ़ता समन्वय यह बताता है कि आने वाले दिनों में बिहार की कमान किसके हाथों में रहने वाली है।
विजय चौधरी का बयान: “भाजपा की अनुशंसा, एनडीए की मुहर”
मुलाकात के बाद जब मीडिया ने मंत्री विजय चौधरी को घेरा, तो उन्होंने बहुत ही नपे-तुले लेकिन स्पष्ट शब्दों में आने वाली सरकार की तस्वीर साफ कर दी। विजय चौधरी ने कहा कि “सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री आवास आना कोई नई बात नहीं है, वे पहले भी आते रहे हैं।” लेकिन जब उनसे नई सरकार के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्वीकारा कि नई सरकार के गठन की प्रक्रिया अब शुरू होने वाली है और ऐसे में आपस में बातचीत होना स्वाभाविक है।
विजय चौधरी ने एक बहुत बड़ी बात कही, जिसने भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह भर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “नया मुख्यमंत्री कौन होगा, यह पूरी तरह भाजपा को तय करना है।” उन्होंने आगे जोड़ा कि भाजपा की अनुशंसा पर ही एनडीए के विधायक दल की बैठक में नेता का चुनाव किया जाएगा। यह बयान इस बात की सीधी पुष्टि है कि नीतीश कुमार के हटने के बाद जो खालीपन आएगा, उसे भाजपा का ही कोई चेहरा भरेगा। विजय चौधरी ने मंत्रिमंडल के विस्तार पर फिलहाल ‘मौन’ साध लिया और केवल इतना कहा कि “चंद दिनों का इंतजार है, रुक जाइए।” यह ‘चंद दिन’ संभवतः 14 अप्रैल की वह तारीख है जब नीतीश कुमार अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंप सकते हैं।
भाजपा की किलेबंदी: विनोद तावड़े की एंट्री और मुख्यमंत्री का चेहरा
एक तरफ मुख्यमंत्री आवास पर मुलाकातों का दौर चल रहा है, तो दूसरी तरफ भाजपा के भीतर भी बैठकों का बाजार गर्म है। बिहार भाजपा के प्रभारी विनोद तावड़े पटना पहुँच रहे हैं, जहाँ वे पार्टी के विधायकों और कोर कमेटी के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक का एकमात्र एजेंडा ‘नया मुख्यमंत्री’ और ‘सरकार का स्वरूप’ तय करना है। भाजपा के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर है, क्योंकि पार्टी पहली बार बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अपना दावा ठोक रही है।
दावेदारों की सूची में सम्राट चौधरी का नाम सबसे ऊपर जरूर है, लेकिन भाजपा आलाकमान अक्सर ‘सरप्राइज’ देने के लिए जाना जाता है। विजय चौधरी के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि भाजपा जिस नाम की अनुशंसा करेगी, जेडीयू उस पर बिना किसी हिचकिचाहट के मुहर लगा देगी। यह नीतीश कुमार और भाजपा के बीच हुए उस ‘बड़े समझौते’ का हिस्सा है जिसके तहत नीतीश कुमार अब मार्गदर्शक की भूमिका में रहेंगे और भाजपा शासन की बागडोर संभालेगी।
1 अणे मार्ग से विदाई: 7 सर्कुलर रोड की ओर बढ़ते कदम
मुख्यमंत्री आवास पर शनिवार को हुई जेडीयू नेताओं की बैठक और उसके बाद सामानों की शिफ्टिंग की खबरों ने यह तय कर दिया है कि नीतीश कुमार अब 1 अणे मार्ग के मोह से बाहर निकल चुके हैं। शनिवार को हुई दो घंटे की बैठक में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और विजय चौधरी ने नीतीश कुमार के साथ भविष्य की रणनीति साझा की थी। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार अब अपनी विरासत को सुरक्षित रखने के लिए अपने करीबियों और युवा चेहरों को नई सरकार में उचित स्थान दिलाना चाहते हैं।
निशांत कुमार की उपमुख्यमंत्री पद पर संभावित नियुक्ति को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। नीतीश कुमार चाहते हैं कि जब वे दिल्ली की राजनीति में सक्रिय हों, तो बिहार में उनकी पार्टी का चेहरा ऐसा हो जो विश्वसनीय हो। हालांकि, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विजय चौधरी का यह कहना कि “अभी मंत्रिमंडल को लेकर चर्चा नहीं हुई”, यह संकेत देता है कि विभागों के बंटवारे का गणित अब भी सुलझाया जा रहा है।
बिहार का भविष्य: क्या होगा नया समीकरण?
बिहार में सत्ता परिवर्तन की यह प्रक्रिया केवल एक व्यक्ति के हटने और दूसरे के बैठने की नहीं है, बल्कि यह बिहार की राजनीति के बुनियादी ढांचे में बदलाव है। 14 अप्रैल को अम्बेडकर जयंती के दिन इस्तीफे का प्रस्ताव और 15 अप्रैल को नई सरकार का शपथ ग्रहण—यह समय सारणी बिहार को एक नई दिशा में ले जाने वाली है।
आने वाली सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती:
- गठबंधन में तालमेल: भाजपा के मुख्यमंत्री के तहत जेडीयू और लोजपा (आर) के मंत्रियों के बीच संतुलन बनाना।
- विकास की निरंतरता: नीतीश कुमार के ‘सात निश्चय’ और अन्य विकास योजनाओं को बिना किसी अड़चन के जारी रखना।
- 2029 की तैयारी: पहली बार भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को जनता की कसौटी पर खरा उतारना ताकि अगले लोकसभा चुनावों में इसका लाभ मिल सके।
सस्पेंस के खात्मे की आखिरी घड़ी
12 अप्रैल की यह 25 मिनट की मुलाकात बिहार की राजनीति के ‘क्लाइमेक्स’ का हिस्सा है। सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार के बीच की यह नजदीकी यह सुनिश्चित कर रही है कि सत्ता का हस्तांतरण बिना किसी शोर-शराबे और विवाद के संपन्न हो जाए। विजय चौधरी के शब्दों ने सस्पेंस की परतों को काफी हद तक हटा दिया है—अब गेंद पूरी तरह भाजपा के पाले में है और ‘लॉटरी’ किसके नाम की निकलेगी, इसका खुलासा अगले 48 घंटों में हो जाएगा।
The Voice of Bihar की टीम मुख्यमंत्री आवास से लेकर भाजपा मुख्यालय तक की हर हलचल पर अपनी नजर बनाए हुए है। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना और सम्राट चौधरी की बढ़ती सक्रियता यह बताती है कि बिहार अब उस दौर में प्रवेश कर चुका है जहाँ से पीछे मुड़कर देखना मुमकिन नहीं है। 14 अप्रैल की शाम बिहार के लिए एक नए युग की शुरुआत होगी।


