
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से सामने आए एक वायरल वीडियो ने प्रशासनिक व्यवस्था और किसान संगठनों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के एक जिला पदाधिकारी कथित तौर पर वन विभाग के कर्मचारियों को झूठे दुष्कर्म के मुकदमे में फंसाने की बात कहते नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद पुलिस ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
घटना अफजलगढ़ क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां वन विभाग की टीम ने अवैध लकड़ी से लदी एक पिकअप गाड़ी को रोकने की कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान तस्करों ने मौके से लकड़ी खाली कर दी, लेकिन वनकर्मियों ने दो आरोपियों को पकड़ लिया। जब टीम उन्हें अपने साथ ले जा रही थी, तभी भाकियू के जिला उपाध्यक्ष मदन सिंह राणा अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंच गए।
वीडियो में क्या दिखा?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में मदन सिंह राणा अपने समर्थकों के साथ वन विभाग की टीम को घेरते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में उन्हें कथित तौर पर यह कहते सुना जा सकता है कि किसी महिला को लाकर वनकर्मियों पर दुष्कर्म का मामला दर्ज करा दिया जाए, ताकि उन पर दबाव बनाया जा सके। इस बयान ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
सरकारी काम में बाधा और आरोपी को छुड़ाने का आरोप
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, मौके पर न केवल हंगामा किया गया बल्कि सरकारी कार्य में बाधा डालते हुए एक आरोपी को जबरन छुड़ा भी लिया गया। इस घटना को अधिकारियों ने “कानून को चुनौती देने वाला कृत्य” बताया है।
पुलिस ने दर्ज किया केस
वायरल वीडियो और वन विभाग की शिकायत के आधार पर पुलिस ने तस्करी, सरकारी कार्य में बाधा डालने और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। अफजलगढ़ क्षेत्र के पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आरोपी की सफाई
मामले में घिरे भाकियू नेता मदन सिंह राणा ने अपनी सफाई में कहा है कि वह किसानों के हितों के लिए वहां पहुंचे थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि वीडियो में कही गई बात केवल दबाव बनाने के लिए थी, न कि किसी वास्तविक साजिश का हिस्सा। हालांकि, पुलिस का कहना है कि ऐसे बयान भी कानून के दायरे में आते हैं और उनकी गंभीरता से जांच की जाएगी।
प्रशासन की सख्ती के संकेत
घटना के बाद जिला प्रशासन और वन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों ने कहा है कि वायरल वीडियो को अहम साक्ष्य के तौर पर लिया गया है और इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कानून के दायरे से बाहर जाकर दबाव बनाने की कोशिशें लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बन रही हैं।


