​पटना में ‘सफेदपोशों’ पर खौफ का साया: डॉक्टर से 10 लाख की रंगदारी मांगने वाला नवादा का ‘राजा’ गिरफ्तार, रामकृष्णानगर में छिपे अपराधी का मोबाइल ने खोला राज

पटना। बिहार की राजधानी पटना में इन दिनों अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसकी एक बानगी बीते दिनों मीठापुर इलाके में देखने को मिली। समाज के सबसे सम्मानित पेशे से जुड़े चिकित्सक अब अपराधियों के निशाने पर हैं, जो शहर की सुरक्षा व्यवस्था और सुशासन के दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। हालांकि, पटना पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की है। मीठापुर के चर्चित चिकित्सक डॉक्टर अभिषेक सिंह से 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगने वाले शातिर बदमाश को पुलिस ने तकनीकी जाल बिछाकर धर दबोचा है। शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026 को हुई इस गिरफ्तारी ने राजधानी के चिकित्सा जगत को थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन इस घटना के पीछे छिपे गहरे ‘सिंडिकेट’ की आशंका ने पुलिस की नींद उड़ा रखी है।

30 मार्च की वह खौफनाक कॉल: जब मसीहा को मिली मौत की धमकी

​घटनाक्रम की शुरुआत 30 मार्च 2026 को हुई, जब डॉक्टर अभिषेक सिंह अपने क्लीनिक में मरीजों की सेवा में व्यस्त थे। इसी दौरान उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। फोन उठाने पर दूसरी ओर से किसी पेशेवर अपराधी की तरह कड़क आवाज में 10 लाख रुपये की रंगदारी की मांग की गई। अपराधी ने स्पष्ट लफ्जों में कहा कि यदि समय रहते रकम का इंतजाम नहीं हुआ, तो इसका अंजाम बुरा होगा।

​एक चिकित्सक के लिए, जो दिन-रात लोगों की जान बचाने में जुटा रहता है, ऐसी धमकी किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं थी। अभिषेक सिंह ने बिना समय गंवाए स्थानीय थाने और वरीय पुलिस अधिकारियों को इस बारे में सूचित किया। राजधानी के एक प्रतिष्ठित डॉक्टर से रंगदारी मांगे जाने की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में विशेष टीम का गठन किया गया।

तकनीकी जाल और लोकेशन का खेल: सकरपुरा से रामकृष्णानगर तक पीछा

​इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान सिटी एसपी पूर्वी परिचय कुमार ने संभाली। पुलिस ने सबसे पहले उस मोबाइल नंबर का विवरण निकाला जिससे धमकी भरी कॉल की गई थी। सर्विलांस और तकनीकी जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिस सिमकार्ड का उपयोग रंगदारी मांगने के लिए किया गया था, वह नवादा जिले के सकरपुरा गांव के रहने वाले रामाकांत कुमार उर्फ राजा के नाम पर पंजीकृत था।

​पुलिस की एक टीम तुरंत नवादा के लिए रवाना हुई, लेकिन वहां पता चला कि रामाकांत उर्फ राजा पिछले काफी समय से गांव में नहीं है और वह पटना में ही कहीं छिपा हुआ है। इसके बाद पटना पुलिस की तकनीकी शाखा ने मोबाइल के वर्तमान लोकेशन को ट्रैक करना शुरू किया। डिजिटल पदचिह्नों का पीछा करते हुए पुलिस अंततः पटना के रामकृष्णानगर इलाके में एक किराए के मकान तक पहुँची। शुक्रवार को पुलिस ने उस मकान की घेराबंदी की और रामाकांत कुमार उर्फ राजा को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

बरामदगी और ‘मास्टरमाइंड’ की तलाश: क्या यह केवल एक मोहरा है?

​गिरफ्तारी के समय रामाकांत के पास से दो मोबाइल फोन और दो सिमकार्ड बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि इन्हीं मोबाइल सेटों का उपयोग डॉक्टर अभिषेक सिंह को धमकाने के लिए किया गया था। हालांकि, पुलिस को संदेह है कि रामाकांत केवल एक मोहरा हो सकता है।

द वॉयस ऑफ बिहार के विशेष विश्लेषण के अनुसार, रंगदारी के ऐसे मामलों में अक्सर पर्दे के पीछे कोई और होता है जो शूटर या धमकी देने वाले को केवल सिमकार्ड और टारगेट का विवरण उपलब्ध कराता है। सिटी एसपी पूर्वी परिचय कुमार ने भी इस बिंदु पर अपनी आशंका जाहिर की है। पुलिस अब रामाकांत के कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) को खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह पिछले कुछ दिनों में किन-किन लोगों के संपर्क में था। क्या जेल के भीतर से किसी बड़े अपराधी ने उसे यह निर्देश दिया था? या फिर स्थानीय स्तर पर किसी रसूखदार व्यक्ति ने डॉक्टर को डराने के लिए उसे सुपारी दी थी?

चिकित्सकों की सुरक्षा: बढ़ते अपराध और प्रशासनिक चुनौती (विशेष विश्लेषण)

​पटना में डॉक्टरों से रंगदारी और मारपीट की बढ़ती घटनाएं एक गंभीर चिंता का विषय हैं। 2026 के इस दौर में, जहाँ पुलिस हाई-टेक होने का दावा करती है, वहां अपराधियों का इस तरह बेखौफ होकर सीधे डॉक्टरों को कॉल करना प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है।

  1. सॉफ्ट टारगेट: अपराधी डॉक्टरों को ‘सॉफ्ट टारगेट’ मानते हैं क्योंकि उनके पास नकदी की उपलब्धता होती है और वे अक्सर पुलिसिया झमेलों से बचना चाहते हैं।
  2. नवादा कनेक्शन: हाल के दिनों में पटना में सक्रिय अपराधियों के तार नवादा और नालंदा जैसे जिलों से जुड़े पाए गए हैं। ‘राजा’ का नवादा से होना इसी कड़ी का हिस्सा है।
  3. किराए के मकानों का सत्यापन: रामकृष्णानगर जैसी जगहों पर बिना पुलिस वेरिफिकेशन के किराएदार रखना अपराधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन गया है।

परिचय कुमार की मुस्तैदी: खाकी पर बढ़ा जनता का भरोसा

​सिटी एसपी परिचय कुमार के नेतृत्व में हुई इस त्वरित कार्रवाई ने पटना पुलिस की साख को मजबूती दी है। 30 मार्च को मिली धमकी के बाद मात्र चार दिनों के भीतर आरोपी को सलाखों के पीछे पहुँचाना एक बड़ी उपलब्धि है। परिचय कुमार ने स्पष्ट किया है कि जब्त मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। पुलिस अब उस ‘स्क्रिप्ट’ की तलाश में है जो रामाकांत ने फोन पर बोली थी, क्योंकि अक्सर अपराधियों को पहले से लिखकर दिया जाता है कि उन्हें क्या बोलना है।

​पुलिस अब यह भी जांच रही है कि क्या रामाकांत ने शहर के अन्य व्यवसायियों या डॉक्टरों को भी इसी तरह के कॉल किए हैं। पटना के विभिन्न थानों में दर्ज रंगदारी के पुराने मामलों से उसके हुलिए और कार्यशैली का मिलान किया जा रहा है।

डर के साये में सेवा और न्याय की आस

​एक तरफ जहाँ पुलिस की सफलता सराहनीय है, वहीं दूसरी तरफ यह भी सच है कि समाज में बढ़ती आर्थिक असमानता और जल्दी पैसा कमाने की चाहत युवाओं को अपराध की दलदल में धकेल रही है। रामाकांत उर्फ राजा जैसे नौजवानों का इस तरह के गंभीर अपराधों में शामिल होना सामाजिक पतन का संकेत है।

​चिकित्सा जगत ने इस गिरफ्तारी का स्वागत किया है, लेकिन उनकी मांग है कि केवल ‘धमकी देने वाले’ को पकड़ना काफी नहीं है। जब तक रंगदारी की संस्कृति को जड़ से खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक कोई भी सुरक्षित महसूस नहीं करेगा। पुलिस को चाहिए कि वह डॉक्टरों के क्लीनिक और आवास के आसपास गश्त बढ़ाए और एक ऐसा सुरक्षित माहौल तैयार करे जहाँ कोई भी अपराधी फोन उठाने से पहले दस बार सोचे।

समाधान की दिशा में बढ़ते कदम

​पटना पुलिस ने रामाकांत उर्फ राजा को गिरफ्तार कर 10 लाख की रंगदारी के इस मामले का आंशिक उद्भेदन कर दिया है। 4 अप्रैल 2026 की यह सुबह डॉक्टर अभिषेक सिंह और उनके परिवार के लिए सुकून भरी है, लेकिन पुलिस के लिए असली चुनौती अब उस ‘बैकएंड’ नेटवर्क को ध्वस्त करने की है जो रामाकांत जैसे युवाओं को हथियार और मोबाइल थमाता है।

द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस पूरी जांच पर अपनी नजर बनाए हुए है। हम उम्मीद करते हैं कि सिटी एसपी परिचय कुमार के नेतृत्व में चल रही यह जांच जल्द ही किसी बड़े मास्टरमाइंड के चेहरे से नकाब हटाएगी। फिलहाल, रामाकांत पुलिस रिमांड पर है और रामकृष्णानगर की उस तंग गली में सन्नाटा पसरा है जहाँ बैठकर वह ‘राजा’ बनने का ख्वाब देख रहा था, लेकिन अब वह सलाखों के पीछे अपने गुनाहों की गिनती कर रहा है।

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