
भागलपुर। सिल्क सिटी के नाम से मशहूर भागलपुर की गलियां अब केवल रेशम की बुनावट के लिए नहीं, बल्कि रूहानी अदाकारी और सिनेमाई सरोकारों के लिए भी जानी जाएंगी। शहर के होटल स्टोन पार्क में पिछले दो दिनों से चल रही एक विशेष हलचल ने यह साबित कर दिया है कि बिहार की मिट्टी में छिपी प्रतिभाएं अब बड़े पर्दे और ओटीटी (OTT) की दुनिया को अपनी शर्तों पर जीतने के लिए तैयार हैं। ‘जीवन जागृति सोसायटी’ के तत्वावधान में ‘एस-सीरीज फिल्म्स प्रोडक्शन हाउस’ के बैनर तले बन रही वेब सीरीज “संजीदगी एक पहेली” की दो-दिवसीय गहन अभिनय कार्यशाला शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। 2 और 3 अप्रैल 2026 की यह तारीख भागलपुर के सांस्कृतिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाली है, क्योंकि यहाँ से ‘अंग क्षेत्र’ के कलाकारों का एक नया कारवां शूटिंग के मोर्चे पर निकलने को तैयार है।
होटल स्टोन पार्क बना अभिनय की प्रयोगशाला: रूह में उतरते किरदार
कार्यशाला के दोनों दिन सुबह से ही होटल स्टोन पार्क का माहौल किसी फिल्म सेट की तरह जीवंत नजर आया। यहाँ केवल संवाद अदायगी की ट्रेनिंग नहीं दी जा रही थी, बल्कि कलाकारों को उनके पात्रों की मनोवैज्ञानिक परतों से रूबरू कराया जा रहा था। कार्यशाला का नेतृत्व कर रहे लेखक और निर्माता डॉ. अजय सिंह एवं निर्देशक संजीव सुमन ने चयनित कलाकारों को यह समझाने में पूरी ताकत झोंक दी कि अभिनय केवल चेहरे के हाव-भाव नहीं, बल्कि आत्मा का प्रदर्शन है।
निर्देशक संजीव सुमन की देखरेख में कलाकारों ने विभिन्न दृश्यों का अभ्यास किया। कार्यशाला के दौरान एक ऐसा क्षण भी आया जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखों को नम कर दिया। एक भावुक दृश्य के पूर्वाभ्यास (रिहर्सल) के दौरान कलाकारों ने रिश्तों की कड़वाहट और पारिवारिक जिम्मेदारी के बोझ को इतनी संजीदगी से पेश किया कि हॉल में सन्नाटा पसर गया। यह दृश्य इस बात का गवाह था कि “संजीदगी एक पहेली” केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने के लिए बनाई जा रही है।
“जिंदगी मजाक नहीं, जिम्मेदारी है”: वेब सीरीज का मूल मंत्र
इस वेब सीरीज की सबसे बड़ी ताकत इसका संदेश है। “जिंदगी मजाक नहीं, जिम्मेदारी है”—इस टैगलाइन के इर्द-गिर्द पूरी पटकथा बुनी गई है। लेखक डॉ. अजय सिंह का मानना है कि आज के दौर में जब सोशल मीडिया और ओटीटी पर अक्सर सतही सामग्री की भरमार है, तब “संजीदगी एक पहेली” रिश्तों की गहराई और सामाजिक उत्तरदायित्वों पर चोट करेगी।
डॉ. अजय सिंह ने कार्यशाला के समापन पर कहा कि यह फिल्म केवल एक कलात्मक प्रयास नहीं है, बल्कि अंग क्षेत्र की प्रतिभाओं के माध्यम से एक बड़ा सामाजिक बदलाव लाने की कोशिश है। उनका मानना है कि भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही मार्गदर्शन और एक बड़े मंच की जरूरत है। कार्यशाला में कलाकारों के समर्पण को देखकर यह साफ हो गया कि हर कलाकार अपनी भूमिका के साथ पूरा न्याय करने के लिए जी-जान से जुटा हुआ है।
तकनीक और मनोविज्ञान का अनूठा संगम (विशेष विश्लेषण)
द वॉयस ऑफ बिहार के विशेष विश्लेषण के अनुसार, भागलपुर जैसे शहरों में वेब सीरीज का निर्माण और उसके लिए बाकायदा ‘एक्टिंग वर्कशॉप’ का आयोजन होना एक नई कार्यसंस्कृति की ओर इशारा करता है।
- पटकथा की गहराई: निर्देशक संजीव सुमन ने बताया कि ऑडिशन के बाद यह कार्यशाला अनिवार्य थी। अक्सर स्थानीय स्तर पर बनने वाली फिल्मों में तकनीक और भावों का तालमेल नहीं बैठ पाता, लेकिन यहाँ हर कलाकार के ‘साइकोलॉजिकल ग्राफ’ पर काम किया गया है।
- स्थानीय लोकेशंस का जादू: शूटिंग जल्द ही भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में शुरू होगी। इससे न केवल स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि अंगिका संस्कृति और यहाँ की भौगोलिक सुंदरता को भी वैश्विक पहचान मिलेगी।
- रोजगार और मंच: इस प्रोजेक्ट ने करीब दो दर्जन स्थानीय कलाकारों और तकनीकी सहायकों को सीधा मंच प्रदान किया है। प्री-प्रोडक्शन का काम पूरा होना और लोकेशंस का फाइनल होना यह बताता है कि टीम पूरी तरह से प्रोफेशनल अंदाज में काम कर रही है।
प्रतिभाओं का कारवां: कौन-कौन हैं इस सफर में शामिल?
”संजीदगी एक पहेली” की सफलता का दारोमदार उन कलाकारों पर है जिन्होंने दो दिनों तक पसीना बहाकर अपनी कला को तराशा है। कार्यशाला के समापन के अवसर पर पूरी टीम का उत्साह देखते ही बनता था। इस प्रोजेक्ट में रानी चौधरी, प्रतिज्ञा सिंह, अंजनी राज ठाकुर, किरण जायसवाल, शोभा रावत, राज सिंह, विश्वा सिंह, रवि पोद्दार, नित्यानंद नितुल, माना शुक्ला, मनीष यादव, उदय कुमार, बिहारी प्रसाद, सलाम सागर और प्रेम सिंह जैसे कलाकार अपनी अदाकारी का जौहर दिखाएंगे।
इन कलाकारों के साथ-साथ प्रोडक्शन टीम के अन्य सदस्य और स्थानीय गणमान्य व्यक्ति भी समापन अवसर पर मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में माना कि भागलपुर में इस स्तर की पेशेवर कार्यशाला का आयोजन होना यहाँ के उभरते कलाकारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब सबकी नजरें शूटिंग के पहले क्लैप (Clap) पर टिकी हैं।
अंग क्षेत्र की कलात्मक क्रांति: एक नई पहचान की तलाश
भागलपुर हमेशा से शिक्षा और साहित्य का केंद्र रहा है, लेकिन फिल्म निर्माण के क्षेत्र में इसे अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है। “संजीदगी एक पहेली” इसी कमी को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। डॉ. अजय सिंह और संजीव सुमन की जोड़ी ने जो बीज बोया है, वह आने वाले समय में एक वटवृक्ष बनेगा, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है।
कार्यशाला के दौरान पात्रों की भावनात्मक गहराई पर जो काम हुआ है, वह अक्सर बड़े शहरों के फिल्म संस्थानों में देखा जाता है। कलाकारों को सिखाया गया कि कैमरे के सामने ‘एक्टिंग’ नहीं करनी है, बल्कि उस पात्र को ‘जीना’ है। यही संजीदगी इस वेब सीरीज को अन्य पारंपरिक कंटेंट से अलग खड़ा करेगी।
चुनौतियां और संभावनाएं
भले ही कार्यशाला सफल रही है और उत्साह चरम पर है, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी। भागलपुर की सड़कों और गंगा के किनारों पर जब कैमरा रोल होगा, तब तकनीकी बाधाओं और स्थानीय स्तर पर संसाधनों के प्रबंधन की चुनौती सामने आएगी। हालांकि, प्रोडक्शन हाउस का दावा है कि उन्होंने लोकेशंस और तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप दे दिया है।
प्रशासनिक स्तर पर भी ऐसी कलात्मक गतिविधियों को संरक्षण मिलना चाहिए। अगर भागलपुर में फिल्म सिटी या बड़े स्टूडियो की परिकल्पना की जाए, तो यहाँ के युवाओं को मुंबई या दिल्ली का रुख नहीं करना पड़ेगा। “संजीदगी एक पहेली” के माध्यम से एस-सीरीज फिल्म्स ने एक लकीर खींच दी है, जिस पर चलकर भविष्य में और भी कई बड़े प्रोजेक्ट्स यहाँ आ सकते हैं।
चमकने को तैयार है भागलपुर का सितारा
दो दिनों की कार्यशाला ने कलाकारों के भीतर जो आत्मविश्वास भरा है, वह शूटिंग के दौरान उनके प्रदर्शन में निश्चित रूप से झलकेगा। रिश्तों की पहेली और संजीदगी का यह सफर अब अपने अगले पड़ाव यानी ‘लाइट्स, कैमरा और एक्शन’ की ओर बढ़ चुका है। डॉ. अजय सिंह का विजन और संजीव सुमन का निर्देशन अगर पटकथा के साथ न्याय कर पाया, तो भागलपुर का यह प्रोजेक्ट ओटीटी की दुनिया में एक बड़ा धमाका करेगा।
द वॉयस ऑफ बिहार की टीम “संजीदगी एक पहेली” की पूरी टीम को अपनी शुभकामनाएं देती है। हम उम्मीद करते हैं कि अंग क्षेत्र की यह दास्तां न केवल मनोरंजन करेगी, बल्कि समाज के भीतर उस जिम्मेदारी का बोध भी कराएगी जिसकी चर्चा डॉ. अजय सिंह ने की है। भागलपुर अब तैयार है—एक नई कहानी, नए चेहरों और एक नई संजीदगी के साथ।


