
समाचार के मुख्य बिंदु: बिजली के ‘शॉर्ट सर्किट’ से झुलस रहा है राजस्व
- चौंकाने वाले आंकड़े: देश में सबसे ज्यादा स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का दावा करने वाले बिहार में बिजली चोरी का ‘अंधेरा’ अब भी बरकरार है। राज्य के 10 विद्युत प्रमंडलों में चोरी की दर राज्य के औसत से दोगुनी से भी अधिक पाई गई है।
- नंबर-1 कौन? दक्षिण बिहार का लखीसराय पूरे सूबे में बिजली चोरी के मामले में अव्वल है, जहाँ 38.17 प्रतिशत बिजली सिस्टम से गायब हो रही है।
- उत्तर बिहार का हाल: उत्तर बिहार में मधेपुरा सबसे ऊपर है, जहाँ 32.78 प्रतिशत बिजली की आपूर्ति बिलिंग के दायरे से बाहर है।
- आयोग का हंटर: बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली कंपनियों (NBPDCL और SBPDCL) की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए उन्हें जून 2026 तक की विशेष समय सीमा दी है। कंपनियों को बताना होगा कि वे इन 10 ‘ब्लैक-होल’ प्रमंडलों में चोरी कैसे रोकेंगी।
- VOB इनसाइट: स्मार्ट मीटरिंग का उद्देश्य पारदर्शिता लाना था, लेकिन लखीसराय, मधेपुरा और मसौढ़ी जैसे इलाकों के आंकड़े बताते हैं कि तकनीक के साथ-साथ जमीनी स्तर पर प्रशासनिक सख्ती की भारी कमी है। दक्षिण बिहार में बिजली चोरी की दर (18.61%) उत्तर बिहार (17.73%) से अधिक होना यह दर्शाता है कि गंगा के इस पार ‘कुंडी’ संस्कृति का प्रभाव ज्यादा है। जब आपूर्ति की गई एक-तिहाई से अधिक बिजली चोरी हो जाती है, तो इसका सीधा आर्थिक बोझ उन ईमानदार उपभोक्ताओं पर पड़ता है जो समय पर बिल भर रहे हैं। विनियामक आयोग का यह निर्देश दरअसल बिजली कंपनियों के लिए ‘अंतिम चेतावनी’ है कि वे तकनीक का सहारा लें या फिर कार्रवाई झेलने को तैयार रहें।
पटना | 30 मार्च, 2026
बिहार की ऊर्जा व्यवस्था आज एक ऐसे विरोधाभास के दौर से गुजर रही है जहाँ एक तरफ डिजिटल इंडिया का दम भरते हुए लाखों घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं, तो दूसरी तरफ ‘कुंडी’ (बिजली चोरी) का देशी जुगाड़ इस तकनीक को मात दे रहा है। सोमवार को सामने आई बिहार विद्युत विनियामक आयोग की रिपोर्ट ने बिजली कंपनियों के उन दावों की हवा निकाल दी है जिनमें कहा जा रहा था कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद एटीएंडसी (तकनीकी व व्यावसायिक नुकसान) खत्म हो जाएगा। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 10 प्रमंडलों में बिजली की स्थिति ऐसी है कि वहां सरकारी तार बिछाना अब मुनाफे का नहीं बल्कि घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
दक्षिण बिहार: जहाँ लखीसराय और डिहरी ने तोड़े रिकॉर्ड
आयोग के निर्देश पर बिजली कंपनियों द्वारा किए गए ऑडिट में दक्षिण बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) के दायरे में आने वाले शहरों की स्थिति सबसे खराब मिली है। दक्षिण बिहार में समग्र रूप से बिजली चोरी की दर 18.61 प्रतिशत है, लेकिन जब हम प्रमंडलवार गहराई में जाते हैं, तो आंकड़े डराने वाले हैं।
लखीसराय इस सूची में सबसे ऊपर है, जहाँ 38.17 प्रतिशत बिजली की चोरी हो रही है। इसका मतलब है कि विभाग जितनी बिजली भेजता है, उसका लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा बिलिंग सिस्टम तक पहुँचता ही नहीं है। इसके ठीक बाद मसौढ़ी (37.41%) और डिहरी (37.17%) का स्थान है। भभुआ और बिहारशरीफ भी इस दौड़ में पीछे नहीं हैं, जहाँ क्रमशः 35.25 और 34.96 प्रतिशत की बिजली चोरी दर्ज की गई है। इन शहरों में बिजली विभाग की टीमें केवल कागजों पर ‘लाइन लॉस’ कम करने में जुटी हैं, जबकि धरातल पर बिजली के खंभों से खुलेआम बाईपास कनेक्शन चालू हैं।
उत्तर बिहार: मधेपुरा और सिमरी बख्तियारपुर का ‘डार्क’ जोन
उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) के तहत आने वाले क्षेत्रों में हालांकि औसत चोरी (17.73%) दक्षिण बिहार से कम है, लेकिन यहाँ के भी कुछ पॉकेट्स चिंता का विषय बने हुए हैं। मधेपुरा उत्तर बिहार का लखीसराय बनकर उभरा है। यहाँ 32.78 प्रतिशत बिजली चोरी हो रही है।
सिमरी बख्तियारपुर (30.22%) और शिवहर (28.87%) जैसे प्रमंडलों में भी स्थिति बेकाबू है। मोतिहारी और अररिया जैसे सीमावर्ती जिलों में भी चोरी का औसत 27 प्रतिशत से अधिक बना हुआ है। विनियामक आयोग ने इस बात पर हैरानी जताई है कि स्मार्ट मीटरिंग के बावजूद ये आंकड़े कम होने के बजाय स्थिर क्यों हैं। आयोग ने कंपनियों से पूछा है कि क्या इन प्रमंडलों के मीटरिंग सिस्टम में कोई तकनीकी खामी है या फिर विभागीय मिलीभगत से बिजली की बंदरबांट हो रही है।
तुलनात्मक चार्ट: बिहार के 10 ‘सर्वाधिक’ बिजली चोरी वाले प्रमंडल
प्रमंडल का नाम | कंपनी का क्षेत्र | बिजली चोरी दर (%) |
|---|---|---|
लखीसराय | दक्षिण बिहार (SBPDCL) | 38.17% |
मसौढ़ी | दक्षिण बिहार (SBPDCL) | 37.41% |
डिहरी | दक्षिण बिहार (SBPDCL) | 37.17% |
भभुआ | दक्षिण बिहार (SBPDCL) | 35.25% |
बिहारशरीफ | दक्षिण बिहार (SBPDCL) | 34.96% |
मधेपुरा | उत्तर बिहार (NBPDCL) | 32.78% |
सिमरी बख्तियारपुर | उत्तर बिहार (NBPDCL) | 30.22% |
शिवहर | उत्तर बिहार (NBPDCL) | 28.87% |
मोतिहारी | उत्तर बिहार (NBPDCL) | 27.67% |
अररिया | उत्तर बिहार (NBPDCL) | 27.65% |
विनियामक आयोग का कड़ा रुख: जून 2026 तक देना होगा समाधान
विद्युत विनियामक आयोग ने पिछले साल की बिजली दर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ही इन 10 प्रमंडलों को चिन्हित करने का आदेश दिया था। अब आयोग ने साफ कर दिया है कि वह केवल आंकड़ों से संतुष्ट नहीं होगा। कंपनियों को जून 2026 तक एक विस्तृत कार्ययोजना (Action Plan) सौंपनी होगी। इस कार्ययोजना में निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्टीकरण माँगा गया है:
- वसूली का रोडमैप: बकाया बिलों की वसूली और डिफॉल्टरों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी?
- चोरी पर लगाम: बाईपास और हुकिंग को रोकने के लिए क्या विशेष गश्ती दल (Vigilance Teams) तैनात किए जाएंगे?
- स्मार्ट मीटर ऑडिट: क्या स्मार्ट मीटर लगने के बाद भी रीडिंग के साथ छेड़छाड़ संभव है? यदि हाँ, तो इसका तकनीकी समाधान क्या है?
- विभागीय जवाबदेही: जिन प्रमंडलों में चोरी औसत से दोगुनी है, वहां के कार्यपालक अभियंताओं और सहायक अभियंताओं की जवाबदेही तय की जाएगी या नहीं?


