
न्यूज डायरी: सातवीं मंजिल की छत और एक अधूरी जिंदगी का ‘फाइनल’ फैसला
- हृदयविदारक घटना: वाराणसी के शिवपुर थाना क्षेत्र स्थित सेंट्रल जेल रोड पर रविवार की सुबह एक प्रशासनिक अधिकारी के परिवार में मातम पसर गया। मूल रूप से पटना के मीठापुर निवासी और वर्तमान में सुल्तानपुर में बंदोबस्त अधिकारी (Settlement Officer) के पद पर तैनात पंकज कुमार की पत्नी सीमा सिन्हा ने अपार्टमेंट की छत से कूदकर जान दे दी।
- समय और स्थान: घटना रविवार सुबह करीब 5:00 बजे की है। अवध अपार्टमेंट की सातवीं मंजिल से कूदने के कारण 50 वर्षीय सीमा सिन्हा की मौके पर ही मौत हो गई।
- वजह: पिछले कई महीनों से सीमा सिन्हा गहरे मानसिक तनाव (Depression) और बीमारी से जूझ रही थीं। उनका इलाज चल रहा था।
- पारिवारिक पृष्ठभूमि: पंकज कुमार करीब 10 वर्षों से वाराणसी में रह रहे हैं। परिवार में उनकी वृद्ध मां और दो बेटियां—मंसा (21 वर्ष) और मानवी (12 वर्ष) शामिल हैं।
- पुलिसिया कार्रवाई: शिवपुर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है।
- VOB इनसाइट: यह घटना केवल एक आत्महत्या नहीं है, बल्कि शहरी जीवन की उस ‘एकाकी’ और ‘मानसिक असुरक्षा’ की ओर इशारा करती है जहाँ ऊंचे ओहदे और आलीशान अपार्टमेंट भी मन के अंधेरे को दूर नहीं कर पाते। एक जिम्मेदार अधिकारी, जो पूरे जिले के बंदोबस्त का जिम्मा संभालता है, वह खुद अपनी पत्नी की बीमारी के कारण छुट्टी लेकर घर पर सेवा कर रहा था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) इस त्रासदी को एक सामाजिक चेतावनी के रूप में देखता है—अवसाद (Depression) एक ऐसा साइलेंट किलर है जो बंद दरवाजों के पीछे चुपके से वार करता है।
वाराणसी/पटना | 30 मार्च, 2026
उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी वाराणसी और बिहार की राजधानी पटना के बीच के रिश्तों की डोर आज एक दुखद समाचार से जुड़ गई है। वाराणसी के सेंट्रल जेल रोड स्थित अवध अपार्टमेंट में रविवार की सुबह वह खौफनाक मंजर देखने को मिला, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। एक प्रशासनिक अधिकारी की पत्नी, जिसने पिछले दो दशकों से परिवार को सहेज कर रखा था, उसने सातवीं मंजिल की ऊंचाई से मौत को गले लगा लिया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब पूरा परिवार गहरी नींद में था और सुबह की पहली किरण अभी खिड़कियों तक पहुँची भी नहीं थी।
रविवार की वो शांत सुबह: जब 5:00 बजे ‘सीमा’ ने तोड़ी मर्यादा
वाराणसी का शिवपुर इलाका रविवार की सुबह शांत था। अवध अपार्टमेंट की दूसरी मंजिल पर रहने वाले बंदोबस्त अधिकारी पंकज कुमार का परिवार रोजमर्रा की तरह सो रहा था। पंकज कुमार, जो वर्तमान में सुल्तानपुर में तैनात हैं, अपनी पत्नी की खराब मानसिक स्थिति के कारण पिछले चार दिनों से विशेष छुट्टी लेकर वाराणसी आए हुए थे। वे चाहते थे कि उनकी मौजूदगी से सीमा को मानसिक बल मिले।
लेकिन करीब 5:00 बजे सुबह, सीमा सिन्हा खामोशी से अपने फ्लैट से निकलीं। वे दूसरी मंजिल से लिफ्ट या सीढ़ियों के जरिए सीधे सातवीं मंजिल की छत पर पहुँच गईं। वहां रहने वाले लोग अक्सर सुबह टहलने के लिए छत का उपयोग करते थे, इसलिए किसी ने टोका नहीं। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के अनुमान के अनुसार, सीमा ने कुछ देर वहां टहलने के बाद अचानक रेलिंग पर चढ़कर नीचे छलांग लगा दी। नीचे गिरते ही एक तेज आवाज हुई और अपार्टमेंट के सुरक्षा गार्ड व कुछ लोग भागकर मौके पर पहुँचे। सीमा सिन्हा का शरीर खून से लथपथ था और उनकी सांसें थम चुकी थीं।
सोते रह गए अपने: शोर होने पर खुली पंकज और बेटियों की नींद
हादसे के वक्त फ्लैट नंबर 204 (दूसरी मंजिल) में पंकज कुमार, उनकी 21 वर्षीय बेटी मंसा, 12 वर्षीय बेटी मानवी और उनकी बुजुर्ग मां गहरी नींद में थे। उन्हें इस बात का जरा भी आभास नहीं था कि घर की लक्ष्मी छत पर मौत से साक्षात्कार कर रही है। जब नीचे शोर हुआ और अपार्टमेंट के पड़ोसियों ने पंकज के दरवाजे की घंटी बजाई, तब जाकर उन्हें अनहोनी का पता चला।
जैसे ही पंकज कुमार भागकर नीचे पहुँचे, वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उनकी पत्नी निष्प्राण पड़ी थीं। 21 साल की मंसा और 12 साल की मानवी अपनी मां को इस हालत में देखकर बेसुध हो गईं। 10 साल से जिस अपार्टमेंट में वे एक सुखी परिवार की तरह रह रहे थे, वहां आज मातम का सन्नाटा पसरा था।
बीमारी का लंबा इतिहास: इलाज के बीच टूटा ‘उम्मीद’ का धागा
पंकज कुमार ने पुलिस और अपने करीबियों को बताया कि सीमा पिछले काफी समय से मानसिक रूप से अस्वस्थ थीं। वे एक अज्ञात तनाव और अवसाद के दौर से गुजर रही थीं। वाराणसी में तैनाती के दौरान भी पंकज ने देश के बेहतरीन डॉक्टरों से उनका इलाज कराया था। बीच-बीच में उनकी स्थिति में सुधार भी आता था, लेकिन अचानक फिर से अवसाद के बादल उन्हें घेर लेते थे।
पंकज कुमार की कर्तव्यनिष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अपनी पत्नी की देखभाल के लिए सुल्तानपुर से बार-बार छुट्टी लेकर वाराणसी आते रहते थे। इस बार भी वे चार दिनों से केवल इसीलिए घर पर थे ताकि सीमा को अकेलापन महसूस न हो। लेकिन अवसाद की उस काली सुरंग ने सीमा को इस कदर घेर लिया था कि उन्हें अपनी बेटियों का भविष्य और पति का समर्पण भी नजर नहीं आया।
पोस्टमार्टम हाउस पर पसरा सन्नाटा: खामोश थे पंकज कुमार
रविवार दोपहर शिवपुर पोस्टमार्टम हाउस पर जो दृश्य था, वह पत्थर दिल इंसान को भी रुला देने वाला था। पंकज कुमार वहां एक कोने में खामोश बैठे थे। वे लोगों से बहुत कम बात कर रहे थे। उनके दोस्त और रिश्तेदार उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी आँखों के सामने अपनी पत्नी के साथ बिताए 25-30 सालों का सफर फिल्म की तरह चल रहा था।
पंकज के एक करीबी मित्र ने बताया कि पंकज ने अपनी पत्नी को ठीक करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। वे एक समर्पित पति की तरह हर संभव प्रयास कर रहे थे। बेटियों के लिए मां का इस तरह जाना एक असहनीय आघात है। 21 साल की बड़ी बेटी मंसा, जो शायद अपनी मां की सबसे अच्छी सहेली भी थी, वह अब इस सदमे से कैसे उबर पाएगी, यह चिंता हर रिश्तेदार के चेहरे पर थी।


