
समाचार के मुख्य बिंदु: राष्ट्रवाद की पाठशाला और समर्पण के दो वर्षों का सफर
- बैठक का निष्कर्ष: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), दक्षिण बिहार की तीन दिवसीय प्रदेश कार्यकारी परिषद की बैठक सोमवार को भागलपुर में संपन्न हुई।
- बड़ा बदलाव: परबत्ता निवासी और भागलपुर के जिला संगठन मंत्री मयंक झा ने अपनी दो साल की पूर्णकालिक (Full-time) सेवा के बाद दायित्वों से निवृत्ति ली है।
- सम्मान समारोह: क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ. याज्ञवल्क्य शुक्ल ने मयंक झा को अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न (मोमेंटो) और नारियल भेंट कर उनके भावी जीवन के लिए मंगलकामनाएं दीं।
- संगठनात्मक योगदान: मयंक झा पिछले कई वर्षों से भागलपुर में विद्यार्थी परिषद के एक मजबूत स्तंभ रहे हैं और जिला संगठन मंत्री के रूप में उन्होंने कई छात्र आंदोलनों का नेतृत्व किया।
- भविष्य की भूमिका: दायित्व मुक्त होने के बावजूद मयंक झा भागलपुर में एक सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में संगठन को अपना मार्गदर्शन और सहयोग देते रहेंगे।
- VOB इनसाइट: छात्र राजनीति में ‘पूर्णकालिक कार्यकर्ता’ (Purankalik) होना किसी तपस्या से कम नहीं है। अपना घर, परिवार और व्यक्तिगत करियर छोड़कर संगठन के विस्तार के लिए खुद को समर्पित कर देना एक बड़ी वैचारिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मयंक झा का इस दायित्व से मुक्त होना भागलपुर एबीवीपी के लिए एक भावनात्मक क्षण है, क्योंकि पिछले दो वर्षों में उन्होंने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की एक नई फौज तैयार की है। याज्ञवल्क्य शुक्ल और कुणाल पांडे जैसे वरिष्ठों की मौजूदगी में उनकी यह विदाई इस बात का प्रमाण है कि विद्यार्थी परिषद में दायित्व बदलते हैं, लेकिन कार्यकर्ता का रिश्ता कभी खत्म नहीं होता। भागलपुर जैसे शैक्षणिक केंद्र में छात्र हितों की लड़ाई को मयंक झा ने जो धार दी, उसे आगे बढ़ाना नए नेतृत्व के लिए एक चुनौती और प्रेरणा दोनों होगी।
भागलपुर | 30 मार्च, 2026
सिल्क सिटी भागलपुर के एक स्थानीय रिसोर्ट में पिछले तीन दिनों से चल रहा वैचारिक मंथन सोमवार को एक महत्वपूर्ण और भावुक निर्णय के साथ संपन्न हुआ। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), दक्षिण बिहार की प्रदेश कार्यकारी परिषद की बैठक के अंतिम दिन जहाँ भविष्य की कार्ययोजनाओं पर मुहर लगी, वहीं एक समर्पित सिपाही की विदाई ने माहौल को गंभीर बना दिया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, भागलपुर के जिला संगठन मंत्री मयंक झा ने अपने पूर्णकालिक दायित्वों से मुक्त होकर व्यक्तिगत जीवन की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।
तीन दिनों का मंथन: दक्षिण बिहार की छात्र राजनीति का नया रोडमैप
विद्यार्थी परिषद की इस त्रि-दिवसीय बैठक में दक्षिण बिहार के विभिन्न जिलों से आए छात्र प्रतिनिधियों और संगठन मंत्रियों ने हिस्सा लिया। बैठक के विभिन्न सत्रों में विश्वविद्यालय स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार, लंबित परीक्षाओं, छात्रसंघ चुनावों की आवश्यकता और परिसर में शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने जैसे ज्वलंत मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
समापन सत्र के दौरान संगठन की मजबूती और विस्तार के लिए कई संगठनात्मक फेरबदल और निर्णयों की घोषणा की गई। इसी कड़ी में मयंक झा के दायित्व मुक्त होने की सूचना साझा की गई। मयंक झा, जो मूल रूप से परबत्ता के रहने वाले हैं, उन्होंने अपना बहुमूल्य समय संगठन के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने में लगाया है।
मयंक झा: एक ‘पूर्णकालिक’ तपस्वी का विदाई क्षण
विद्यार्थी परिषद में पूर्णकालिक कार्यकर्ता वह होता है जो अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद कुछ वर्ष समाज और संगठन के लिए पूर्णतः समर्पित कर देता है। मयंक झा ने भागलपुर में पिछले दो वर्षों तक जिला संगठन मंत्री के रूप में जो कार्य किए, उन्हें संगठन के भीतर एक नजीर माना जाता है।
सम्मान समारोह के दौरान क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ. याज्ञवल्क्य शुक्ल ने मयंक झा के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एक कार्यकर्ता के रूप में मयंक झा ने भागलपुर की धरती पर छात्र शक्ति को एकजुट करने में जो ऊर्जा दिखाई, वह अतुलनीय है। याज्ञवल्क्य शुक्ल ने उन्हें अंगवस्त्र पहनाकर और नारियल भेंट कर प्राचीन परंपरा के अनुसार उनके नए जीवन की मंगलकामना की। इस दौरान मयंक झा की आँखों में उन यादों और आंदोलनों की चमक दिखी जो उन्होंने भागलपुर की सड़कों और तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के प्रांगण में लड़े थे।
कुणाल पांडे का बयान: “रिश्ता पद से नहीं, विचार से है”
प्रदेश सह मंत्री कुणाल पांडे ने इस अवसर पर मयंक झा के प्रति अपनी संवेदनाएं और आभार व्यक्त किया। कुणाल पांडे ने बताया कि मयंक झा लंबे समय तक भागलपुर के सक्रिय कार्यकर्ता रहे और उनकी संगठनात्मक सूझबूझ के कारण ही उन्हें जिला संगठन मंत्री जैसा अहम दायित्व सौंपा गया था।
कुणाल पांडे के अनुसार, “मयंक झा ने संगठन को अपना जो समय दिया है, वह कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। भले ही वे आज एक पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में अपने प्रशासनिक दायित्वों से मुक्त हुए हैं, लेकिन विद्यार्थी परिषद के साथ उनका जुड़ाव अटूट है। वे आगे भी भागलपुर में एक सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे और नए कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करेंगे।”


