
द वॉयस ऑफ बिहार | भोजपुर/डेस्क
बिहार के भोजपुर जिले से महिला सशक्तिकरण की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने न केवल रूढ़ियों को तोड़ा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक नया मॉडल भी पेश किया है। जगदीशपुर प्रखंड की दांवा पंचायत की मुखिया सुशुमलता कुशवाहा, जिन्हें अब लोग सम्मान से ‘पैड वाली मुखिया’ कहने लगे हैं, उन्होंने अपनी पंचायत में सेनेटरी पैड का उत्पादन शुरू कर सैकड़ों महिलाओं के जीवन में रोशनी भर दी है।
लॉकडाउन की चुनौती को बनाया अवसर
एमएसडब्ल्यू (MSW) पास सुशुमलता कुशवाहा 2016 में पहली बार मुखिया बनीं। कोरोना काल की चुनौतियों के बीच उन्होंने महसूस किया कि ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के लिए मासिक धर्म स्वास्थ्य (Menstrual Hygiene) आज भी एक बड़ी समस्या है। तत्कालीन जिलाधिकारी के सहयोग और ₹10 लाख के सरकारी फंड से उन्होंने पंचायत में ही सेनेटरी पैड बनाने की सेमी-ऑटोमेटिक मशीन लगवाई। आज ‘संगिनी’ ब्रांड के नाम से यहाँ उच्च गुणवत्ता वाले पैड तैयार किए जा रहे हैं।
बाजार से सस्ता और बेहतर: ‘संगिनी’ के खास फीचर्स
मुखिया की इस पहल से तैयार ‘संगिनी’ पैड न केवल गुणवत्ता में बाजार के बड़े ब्रांड्स को टक्कर दे रहे हैं, बल्कि कीमत में भी बेहद किफायती हैं:
- कीमत: मात्र ₹23 में 6 पैड का एक पैकेट (बाजार की तुलना में आधा दाम)।
- क्वालिटी: अल्ट्रा-थिन, एक्स्ट्रा लार्ज और 100 मिलीलीटर सोखने की क्षमता।
- उत्पादन: 8 घंटे की शिफ्ट में जीविका दीदियां करीब 4,500 पैड तैयार करती हैं।
हिचकिचाहट को जागरूकता से जीता
शुरुआत में ग्रामीण परिवेश में इस विषय पर बात करना भी मुश्किल था। पुरानी परंपराओं के कारण महिलाएं कपड़े का इस्तेमाल करती थीं। सुशुमलता और जीविका दीदियों ने हार नहीं मानी और घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाया।
सुशुमलता कुशवाहा: “शुरुआत में लड़कियों और महिलाओं के बीच हिचक थी, लेकिन अब युवा पीढ़ी इसे अपना रही है। हमारा लक्ष्य न केवल रोजगार देना है, बल्कि हर गांव तक स्वच्छता का संदेश पहुंचाना है।”
भविष्य का रोडमैप: हॉस्टलों तक पहुंचेगा ‘संगिनी’
इस पहल से वर्तमान में 10 से अधिक महिलाओं को सीधे तौर पर रोजगार मिला है। मुखिया की योजना अब इसे अन्य जिलों तक विस्तार देने और सरकारी बालिका छात्रावासों में सप्लाई करने की है, ताकि गरीब छात्राओं को भी सस्ता और सुरक्षित पैड मिल सके।


