
द वॉयस ऑफ बिहार | पटना/डेस्क
बिहार को पूर्वोत्तर भारत का इंडस्ट्रियल हब बनाने की दिशा में पथ निर्माण विभाग ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। मंगलवार को विभाग के सचिव श्री पंकज कुमार पाल की अध्यक्षता में एशियाई विकास बैंक (ADB) के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य केंद्र राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों को वर्ल्ड-क्लास सड़क कनेक्टिविटी से जोड़ना और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूत करना रहा।
5 मेगा प्रोजेक्ट्स से बदलेगी बिहार की तस्वीर
सचिव श्री पंकज कुमार पाल ने बैठक में जानकारी दी कि विभाग वर्तमान में रक्सौल-हल्दिया और पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे सहित पांच प्रमुख परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए युद्धस्तर पर कार्य कर रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य है:
- एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर (IMC): औद्योगिक केंद्रों को आधुनिक और सुगम परिवहन नेटवर्क से जोड़ना।
- लॉजिस्टिक्स मजबूती: ड्राई पोर्ट और आर्थिक केंद्रों के बीच माल ढुलाई को तेज और सस्ता बनाना।
- रिमोट एरिया कनेक्टिविटी: सुदूर क्षेत्रों को मुख्य औद्योगिक गलियारों से जोड़कर आर्थिक छलांग लगाना।
लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम पर विशेष जोर
बैठक के दौरान सचिव ने स्पष्ट किया कि सड़कों का निर्माण केवल ट्रैफिक कम करने के लिए नहीं, बल्कि राज्य के आर्थिक ढांचे (Industrial Ecosystem) को मजबूती देने के लिए किया जा रहा है।
पंकज कुमार पाल: “बिहार अपनी आर्थिक और ढांचागत व्यवस्था में एक बड़ी छलांग लगाने के लिए तैयार है। हम विभिन्न विभागों के साथ समन्वय बिठाकर परियोजनाओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कर रहे हैं।”
एडीबी (ADB) ने की बिहार की प्रगति की सराहना
एशियाई विकास बैंक के प्रतिनिधियों ने सड़क अवसंरचना (Road Infrastructure) के क्षेत्र में बिहार सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों में किए गए कार्यों और भविष्य के विजन की मुक्त कंठ से सराहना की। एडीबी इन परियोजनाओं में तकनीकी और वित्तीय सहयोग की संभावनाओं को लेकर काफी सकारात्मक नजर आया।
बैठक में ये रहे मौजूद
विभागीय सभागार में आयोजित इस बैठक में एडीबी के प्रतिनिधियों के अलावा पथ निर्माण विभाग के वरीय पदाधिकारी, मुख्य अभियंता और कई वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहे।
द वॉयस ऑफ बिहार का विश्लेषण: क्यों अहम है यह बैठक?
बिहार जैसे लैंडलॉक्ड राज्य के लिए बेहतर सड़क और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क ही विकास की असली चाबी है। रक्सौल-हल्दिया जैसे कॉरिडोर से बिहार के उत्पादों की पहुंच बंदरगाहों तक आसान होगी, जिससे निर्यात (Export) को बढ़ावा मिलेगा और राज्य में नए निवेश के द्वार खुलेंगे।


