भागलपुर: बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे कथित अत्याचारों के विरोध में भागलपुर में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को शहर की डिफेंस एकेडमी से जुड़े युवाओं द्वारा कैंडल मार्च निकालकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के माध्यम से युवाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मुद्दे पर संज्ञान लेने की मांग की।
कैंडल मार्च की शुरुआत घंटाघर चौक से हुई, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए आगे बढ़ा। इस दौरान युवाओं ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर बांग्लादेश में हो रहे अत्याचारों के खिलाफ नारे लगाए और पीड़ित हिंदुओं के समर्थन में आवाज बुलंद की। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने कहा कि वे मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हैं और जब तक वहां हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
इस विरोध प्रदर्शन में भागलपुर के नगर विधायक रोहित पांडेय भी शामिल हुए। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही घटनाओं को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि किसी भी देश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार मानवता के खिलाफ है। उन्होंने पीड़ित हिंदुओं के समर्थन में अपनी संवेदना व्यक्त की और इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।
वहीं, करणी सेवा के जिला अध्यक्ष रंजीत सोलंकी ने भी प्रदर्शन के दौरान अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश और समाज के खिलाफ काम करने वाली ताकतों के विरुद्ध सख्त रुख अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने भारत सरकार से मांग की कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर प्रभावी और ठोस कूटनीतिक कदम उठाए जाएं, ताकि वहां रह रहे अल्पसंख्यकों को सुरक्षा मिल सके।

हालांकि कैंडल मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, लेकिन प्रदर्शनकारियों में गहरा आक्रोश साफ तौर पर देखने को मिला। युवाओं का कहना था कि यह आंदोलन केवल विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत पड़ी तो आगे भी इसे और व्यापक रूप दिया जाएगा।
बयान
रोहित पांडेय, विधायक, भागलपुर:
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार बेहद चिंताजनक हैं। मानवता के नाते हमें पीड़ितों के साथ खड़ा होना चाहिए और उनकी आवाज दुनिया तक पहुंचानी चाहिए।
रंजीत सोलंकी, जिला अध्यक्ष, करणी सेवा:
हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। भारत सरकार को इस मामले में सख्त और प्रभावी कदम उठाने चाहिए।


