पशु तस्करी पर सरकार का शिकंजा: हजारों जानवरों को बचाया गया, दो दर्जन से अधिक तस्कर गिरफ्तार

विशेष अभियान में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, दुर्लभ प्रजातियों की तस्करी पर बड़ी सफलता

पटना | 25 जून | बिहार सरकार पशु तस्करी के खिलाफ अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ चुकी है। बीते एक वर्ष में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाइयों के तहत चार हजार से अधिक पक्षी, 164 दुर्लभ कछुए, कई अजगर, और अन्य वन्य प्राणी बचाए गए हैं, जबकि दो दर्जन से अधिक तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।

इनमें शेड्यूल-1 और शेड्यूल-2 श्रेणी के कई जानवर शामिल हैं, जिनकी तस्करी के मामले में वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत तीन से सात साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।


DFO का बयान: “जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा रहा है”

पटना वन प्रमंडल के डीएफओ गौरव ओझा ने जानकारी दी कि तस्करी से बचाए गए जानवरों को उनके प्राकृतिक निवास क्षेत्र में पुनर्स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अधिकांश मामले सीमावर्ती क्षेत्रों और पूर्वोत्तर से आने वाली ट्रेनों में सामने आते हैं।


हाल के बड़े मामले:

🟩 16 अप्रैल 2025: आरा जीआरपी द्वारा फरक्का एक्सप्रेस से 27 दुर्लभ कछुए जब्त किए गए। छह तस्कर, जिनमें एक पति-पत्नी शामिल थे, गिरफ्तार हुए।
🔸 अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन कछुओं की कीमत 15–20 लाख रुपये आँकी गई थी।

🟩 संयुक्त छापेमारी, पटना: वन प्रमंडल और स्थानीय पुलिस ने 862 प्रतिबंधित पक्षियों के साथ एक तस्कर को पकड़ा।

🟩 रेलवे जंक्शन से छापा: करीब 1700 पक्षियों को तस्करी से पहले ही जब्त कर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। ये पक्षी रोज रिंग्ड पैराकीट, ट्रायकलर मुनिया और स्केली ब्रेस्टेड मुनिया प्रजाति के थे।


सीमा क्षेत्र बना सबसे बड़ा खतरा

पशु तस्करी का सबसे बड़ा नेटवर्क भारत-नेपाल सीमा और सीमावर्ती जिलों में सक्रिय है। तस्कर इन जानवरों की हड्डी, खाल, मांस आदि को चीन जैसे देशों में दवाओं और पोषक उत्पादों के निर्माण के लिए भेजते हैं। यह एक अरबों रुपये का काला कारोबार है।


सरकारी सख्ती: मंत्री ने दिया सख्त संदेश

वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. संनील कुमार ने कहा:

“वन विभाग का दायित्व केवल संरक्षण नहीं, बल्कि पूरे तस्करी नेटवर्क का सफाया करना है। सीमा चेक पोस्ट, गांव और स्टेशनों पर तीन स्तरीय निगरानी प्रणाली बनाई गई है।”

उन्होंने बताया कि पुलिस, वन विभाग और खुफिया एजेंसियों की संयुक्त टीमें अब इस पर नज़र रख रही हैं और लगातार कार्रवाई हो रही है।


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