
नई दिल्ली, 18 मई:सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक मंचों पर भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट करने के लिए सांसदों की सात सर्वदलीय टीमें गठित की हैं। इन टीमों में कांग्रेस सांसद शशि थरूर का नाम शामिल किए जाने पर केंद्र सरकार और कांग्रेस पार्टी के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है।
थरूर को लेकर सरकार और कांग्रेस आमने-सामने
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पहल को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह देश की एकजुटता का संदेश देने वाला निर्णय है। वहीं, थरूर ने सरकार के आमंत्रण को सम्मान बताते हुए कहा कि वह भारत का पक्ष रखने के लिए तैयार हैं।
लेकिन कांग्रेस पार्टी इस फैसले से संतुष्ट नहीं दिखी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बिना थरूर का नाम लिए कटाक्ष किया कि “कांग्रेस में होने और कांग्रेस का होने” में अंतर है। उन्होंने इस पहल को सरकार की एक “ध्यान भटकाने की कोशिश” बताया।
पार्टी की पसंद और भाजपा के तंज
कांग्रेस ने अपनी ओर से आनंद शर्मा, गौरव गोगोई, सैयद नासिर और अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के नाम भेजे थे। इसके बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर कटाक्ष किया।
बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि थरूर की विदेश नीति पर पकड़ और वाकपटुता को नकारा नहीं जा सकता, फिर भी उन्हें नजरअंदाज करने की कोशिश हो रही है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए परोक्ष रूप से गौरव गोगोई का नाम हटाने की मांग की।
वामदलों की सहमति
विवाद के बीच माकपा ने साफ किया है कि वह हालिया पहलगाम आतंकी हमले और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए विदेश जाने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने को तैयार है।


