बिहार में स्वास्थ्य क्रांति: दो दशकों में ऐतिहासिक बदलाव, आशा कार्यकर्ताओं की नई नियुक्तियों का ऐलान

पटना, 3 मई:बिहार ने बीते 20 वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति दर्ज की है। कभी सीमित पहुंच और उच्च मातृ-शिशु मृत्यु दर की चुनौती से जूझ रहा यह राज्य आज संस्थागत प्रसव, टीकाकरण और प्रसवपूर्व देखभाल जैसे मानकों पर राष्ट्रीय औसत के करीब या उससे आगे खड़ा है। इस बदलाव के केंद्र में हैं — आशा कार्यकर्ता, जिन्होंने ग्रामीण व शहरी समुदायों में स्वास्थ्य सेवाओं की नींव को मजबूत किया।


27,375 नई नियुक्तियाँ: स्वास्थ्य सेवाओं को नई रफ्तार

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने हाल ही में घोषणा की कि अगले तीन महीनों में राज्य में 27,375 नये आशा कार्यकर्ता एवं फैसिलिटेटर नियुक्त किए जाएंगे:

  • ग्रामीण क्षेत्रों में: 21,009 आशा कार्यकर्ता
  • शहरी क्षेत्रों में: 5,316 आशा कार्यकर्ता
  • राज्य भर में: 1,050 आशा फैसिलिटेटर

इस कदम का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को और अधिक जनसुलभ, प्रभावी और सहभागी बनाना है।


आशा नेटवर्क की ताकत

वर्तमान में बिहार में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों की स्थिति:

  • 91,281 आशा कार्यकर्ता
  • 4,361 आशा फैसिलिटेटर
  • 5,111 ममता कार्यकर्ता

ये सभी मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और प्राथमिक चिकित्सा सेवाओं की दिशा में मजबूत जमीनी तंत्र तैयार कर रहे हैं।


आंकड़े जो बदलाव की गवाही देते हैं

वर्ष 2005-06 (NFHS-3) बनाम 2019-20 (NFHS-5 व HMIS):

  • पहली तिमाही में एएनसी सेवाएं लेने वाली महिलाएं:
    • 2005-06: 18.7%
    • 2019-20: 52.9% (HMIS अनुसार 77%)
  • चार बार एएनसी जांच कराने वाली महिलाएं: 85%
  • गर्भावस्था का पंजीकरण कराने वाली महिलाएं: 97%
  • संस्थागत प्रसव का प्रतिशत:
    • 2005-06: 19.9%
    • 2019-20: 76.2%

यह केवल सरकारी योजनाओं का परिणाम नहीं, बल्कि आशा कार्यकर्ताओं की सतत मेहनत और सरकार की रणनीतिक प्रतिबद्धता का सम्मिलित असर है।


आगे की दिशा: स्थानीय जरूरतों के अनुसार चयन

नई नियुक्तियों की प्रक्रिया ग्राम सभाओं और नगर निकायों के माध्यम से होगी, जिससे चयन स्थानीय ज़रूरतों के मुताबिक हो सके। बिहार सरकार का लक्ष्य वर्ष 2025 तक एक ऐसी स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करना है जो हर नागरिक तक समय पर, गुणवत्तापूर्ण और समर्पित सेवाएं पहुंचा सके।


बिहार की यह स्वास्थ्य यात्रा, सिर्फ सरकारी रिपोर्टों का विषय नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की जीवनशैली में आए वास्तविक बदलाव की कहानी है।


 

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