पटना के ज्ञान भवन में ‘हरियाली क्रांति’ का शंखनाद! नर्सरी और ग्रीन-टेक से लखपति बनेंगे बिहार के किसान; डॉ. प्रेम कुमार बोले— “खेत ही होंगे अब नोट छापने की मशीन”

HIGHLIGHTS: तीन दिवसीय नेशनल कॉन्क्लेव का भव्य आगाज; ‘परंपरा’ को ‘प्रगति’ का साथ

  • ऐतिहासिक शुरुआत: बिहार के इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय स्तर का ‘नर्सरी एवं ग्रीन-टेक कॉनक्लेव 2026’ पटना के ज्ञान भवन में शुरू।
  • विजन: “परंपरा से प्रगति तक”—पुरानी खेती के अनुभव और आधुनिक मशीनों का बेजोड़ मेल।
  • लखपति किसान: विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार और कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया कैसे बागवानी से बदलेगी तकदीर।
  • युवाओं को मौका: पलायन रोकने के लिए ‘एग्री-बिजनेस’ और ‘हॉर्टिप्रेन्योरशिप’ को बढ़ावा देने का बड़ा एलान।
  • एक्सपर्ट टॉक: देशभर के वैज्ञानिक, नर्सरी संचालक और सफल व्यवसायी एक ही छत के नीचे साझा कर रहे हैं अपने अनुभव।

पटना | 21 मार्च, 2026

​बिहार की मेधा और मिट्टी, जब दोनों साथ मिलते हैं, तो सोना उगता है। आज राजधानी पटना का ज्ञान भवन इसी हकीकत का गवाह बना। शनिवार को यहाँ तीन दिवसीय ‘बिहार नर्सरी एवं ग्रीन-टेक कॉनक्लेव 2026’ का विधिवत उद्घाटन हुआ। कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक सरकारी आयोजन नहीं है, बल्कि बिहार को ‘अनाज उत्पादक’ से ‘एग्रो-बिजनेस हब’ बनाने की दिशा में एक बड़ा और साहसी कदम है। 23 मार्च तक चलने वाले इस कॉन्क्लेव में हवाओं में केवल फूलों की खुशबू नहीं, बल्कि बिहार के विकास की महक भी महसूस की जा रही है।

“खेतों में ही मिलेगा अब सम्मानजनक रोजगार”: डॉ. प्रेम कुमार

​उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने एक बड़ी लकीर खींच दी। उन्होंने साफ कहा कि बिहार का किसान अब ‘बिचारा’ नहीं रहा, वह ‘खुशहाल’ और ‘सशक्त’ हो चुका है। उनकी आय बढ़ रही है, लेकिन असली छलांग तब लगेगी जब खेती के साथ-साथ बागवानी और पशुपालन का ‘सटीक त्रिकोण’ बनेगा।

​डॉ. कुमार ने जोर देते हुए कहा, “बिहार के कृषि उत्पाद आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेर रहे हैं। जब हमारे गांव के उत्पाद वैश्विक बाजारों में पहुँचेंगे, तो युवाओं को रोजगार के लिए दिल्ली-मुंबई की ओर नहीं भागना पड़ेगा। बागवानी में असीम संभावनाएं हैं, और यह कॉन्क्लेव उस सुनहरे भविष्य की पहली सीढ़ी है।” उन्होंने कृषि-बागवानी को एक सम्मानजनक करियर के रूप में अपनाने का आह्वान किया।

राम कृपाल यादव का ‘ग्रीन-टेक’ मंत्र: “बिहार अब पीछे नहीं”

​कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने बिहार की बदलती तस्वीर का खाका पेश किया। उन्होंने माना कि नर्सरी और ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बिहार अब अन्य राज्यों को कड़ी चुनौती दे रहा है। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने खेती को अब ‘कड़ी मेहनत’ से निकालकर ‘स्मार्ट वर्क’ में बदल दिया है।

​मंत्री ने कहा, “मशीनीकरण ने खेती की लागत कम की है और मुनाफा बढ़ाया है। अब गांव का युवा केवल हल नहीं चलाता, वह ड्रोन उड़ाता है और ‘स्मार्ट सिंचाई’ का उपयोग करता है। यह नवाचार (Innovation) ही बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का असली गेम-चेंजर है।” उन्होंने युवाओं और किसानों से अपील की कि वे इस कॉन्क्लेव में आए विशेषज्ञों से सीधे जुड़ें और अपनी खेती को ‘बिजनेस मॉडल’ में बदलें।

नर्सरी और तकनीक का ‘पावर कॉम्बो’

​बिहार राज्य किसान आयोग के अध्यक्ष रूपनारायण मेहता और कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने भी इस आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधान सचिव ने पहली बार बिहार की धरती पर इस तरह के राष्ट्रीय आयोजन को ऐतिहासिक बताया। उनका मानना है कि जब तकनीक और किसान के बीच का ‘गैप’ खत्म होगा, तभी असली क्रांति आएगी।

​पूर्व मुख्य सचिव और बिहार म्यूजियम के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने भी अपने अनुभव साझा किए। नर्सरी क्षेत्र से निजी जुड़ाव रखने वाले सिंह ने कहा कि आज बागवानी में जो तरक्की हो चुकी है, वह बिहार के किसानों के लिए एक ‘अलादीन का चिराग’ साबित हो सकती है। उद्यान निदेशक अभिषेक कुमार ने बताया कि इस कॉन्क्लेव में देशभर से आए 50 से ज्यादा दिग्गज नर्सरी संचालक और कृषि वैज्ञानिक किसानों को ट्रेनिंग दे रहे हैं।

VOB का नजरिया: क्या ‘ग्रीन-टेक’ केवल ज्ञान भवन तक सीमित रहेगा?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि पटना के ज्ञान भवन में सजी यह हरियाली सुकून देने वाली है, लेकिन इसकी असली परीक्षा तब होगी जब यहाँ प्रदर्शित ड्रोन, टिश्यू कल्चर और स्मार्ट इरिगेशन तकनीकें पूर्णिया के किसी छोटे खेत या मुजफ्फरपुर की किसी लीची की नर्सरी तक पहुँचेंगी।

​डॉ. प्रेम कुमार और राम कृपाल यादव की बातों में दम है—बिहार में बागवानी की संभावनाएँ ‘असीम’ हैं, पर इन संभावनाओं को ‘हकीकत’ में बदलने के लिए बिजली, पानी और सबसे जरूरी ‘मार्केट लिंकेज’ (Market Linkage) की जरूरत है। अक्सर किसान उगा तो लेते हैं, पर बेचने में बिचौलियों के चक्कर में फंस जाते हैं। अगर यह कॉन्क्लेव किसानों को सीधे ‘बाजार’ से जोड़ देता है, तो यह 2026 की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। ‘परंपरा’ हमारे पास है, ‘प्रगति’ का हाथ थामने का समय अब आ गया है।

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