खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
- बड़ा बदलाव: नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद 20 साल पुराना ‘सत्ता का फॉर्मूला’ बदलना तय।
- पावर शिफ्ट: इस बार भाजपा का मुख्यमंत्री और जेडीयू का उपमुख्यमंत्री होने की प्रबल संभावना।
- अमित शाह का प्लान: दिल्ली में मंथन तेज; क्या ओबीसी चेहरे पर दांव लगाएगी भाजपा?
- रेस में सबसे आगे: नित्यानंद राय और सम्राट चौधरी के बीच ‘कांटे की टक्कर’।
पटना: बिहार की सियासत में ‘इंजीनियर’ नीतीश कुमार ने अपनी पारी का रुख दिल्ली की ओर कर दिया है। राज्यसभा के लिए उनके नामांकन के साथ ही अब बिहार में “पोस्ट-नीतीश एरा” (Post-Nitish Era) की शुरुआत हो चुकी है। सवाल सिर्फ एक है—मुख्यमंत्री की उस कुर्सी पर कौन बैठेगा जहाँ दो दशक से नीतीश कुमार का ‘एकछत्र राज’ रहा? भाजपा के रणनीतिकार इस बार किसी ऐसे चेहरे की तलाश में हैं जो न केवल संगठन को मजबूत रखे, बल्कि 2025 के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद बने नए जातीय समीकरणों में भी फिट बैठे।
CM की रेस में भाजपा के 5 ‘महाबली’ (The Top 5 Contenders)
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उम्मीदवार |
वर्तमान कद |
क्यों हैं रेस में सबसे आगे? |
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1. नित्यानंद राय |
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री |
अमित शाह के सबसे भरोसेमंद। यादव वोट बैंक में सेंधमारी के लिए भाजपा का सबसे बड़ा ट्रंप कार्ड। |
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2. सम्राट चौधरी |
उपमुख्यमंत्री, बिहार |
वर्तमान में भाजपा का सबसे प्रखर चेहरा। कुशवाहा समाज से आते हैं और ‘बड़ा आदमी’ बनाने का वादा खुद अमित शाह कर चुके हैं। |
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3. विजय कुमार सिन्हा |
उपमुख्यमंत्री, बिहार |
संगठन का लंबा अनुभव और सवर्ण मतदाताओं (विशेषकर भूमिहार) के बीच मजबूत पकड़। आक्रामक नेता माने जाते हैं। |
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4. दिलीप जायसवाल |
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री |
बिहार कैबिनेट में प्रभावी मंत्री और वैश्य समुदाय का प्रतिनिधित्व। स्वच्छ छवि और प्रशासनिक पकड़ उनकी ताकत है। |
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5. संजीव चौरसिया |
विधायक, दीघा (पटना) |
संघ (RSS) की पहली पसंद और संगठन के पुराने सिपाही। ‘सरप्राइज’ नाम के तौर पर इनका दावा मजबूत है। |
क्या बदलेगा 20 साल पुराना ‘पावर मॉडल’?
2005 से अब तक बिहार में भाजपा ‘जूनियर पार्टनर’ की भूमिका में रही है। लेकिन नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति (बिहार स्तर पर) से हटने के बाद भाजपा अब ‘फ्रंट फुट’ पर खेलना चाहती है।
- नया फॉर्मूला: भाजपा का मुख्यमंत्री + जेडीयू के कोटे से दो उपमुख्यमंत्री (जिसमें नीतीश के बेटे निशांत कुमार का नाम भी चर्चा में है)।
- जातीय कार्ड: भाजपा इस बार किसी अति-पिछड़ा (EBC) या ओबीसी (OBC) चेहरे को कमान सौंपकर राजद (RJD) के ‘MY’ समीकरण को ध्वस्त करने की योजना बना रही है।
शाह का ‘बड़ा आदमी’ वाला वादा और सस्पेंस
राजनीतिक पंडितों की नजरें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के उस वादे पर टिकी हैं जो उन्होंने सम्राट चौधरी के लिए किया था। हालांकि, मध्य प्रदेश और राजस्थान के उदाहरण बताते हैं कि भाजपा नेतृत्व अंतिम समय में किसी ‘ब्लैक हॉर्स’ (अचानक नया नाम) को लाकर सबको चौंका सकता है।
VOB का नजरिया: कांटों भरा है ‘ताज’
नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति में एक ऐसा मानक तय किया है, जिसकी जगह लेना किसी भी नए मुख्यमंत्री के लिए आसान नहीं होगा। अगले मुख्यमंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती जेडीयू के कार्यकर्ताओं को संतुष्ट रखना और विकास के ‘नितीश मॉडल’ को और आगे बढ़ाना होगा। भाजपा के लिए यह केवल चेहरा बदलने की बात नहीं है, बल्कि यह साबित करने की चुनौती है कि वे बिना नीतीश के भी बिहार को ‘सुशासन’ दे सकते हैं।


