बंगाल में बड़ा राजनीतिक धमाका: नगरपालिका भर्ती घोटाले में पूर्व मंत्री सुजीत बोस गिरफ्तार, 10 घंटे की पूछताछ के बाद ईडी का एक्शन

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार की रात एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक घटनाक्रम की गवाह बनी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य के पूर्व दमकल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता सुजीत बोस को आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है। साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में करीब 10 घंटे तक चली मैराथन पूछताछ के बाद जांच एजेंसी ने यह कड़ा कदम उठाया। सुजीत बोस पर नगरपालिका भर्ती घोटाले में मुख्य भूमिका निभाने और अवैध तरीके से नियुक्तियों की सिफारिश करने का गंभीर आरोप है। सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे शुरू हुई पूछताछ की प्रक्रिया रात करीब 9:00 बजे गिरफ्तारी के साथ समाप्त हुई। ईडी के अधिकारियों का दावा है कि सुजीत बोस जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और लगातार विरोधाभासी जवाब देकर अधिकारियों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे थे। इस गिरफ्तारी ने ममता बनर्जी की कैबिनेट के एक और पूर्व सदस्य को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है, जिससे बंगाल में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

सीजीओ कॉम्प्लेक्स में सुबह से रात तक का घटनाक्रम

​सुजीत बोस सोमवार की सुबह लगभग 10:30 बजे साल्ट लेक के सॉल्ट लेक इलाके स्थित ईडी के सीजीओ कॉम्प्लेक्स कार्यालय पहुंचे थे। उनके साथ उनके बेटे समुद्र बोस और वकीलों की एक टीम भी मौजूद थी। समुद्र बोस को भी इसी मामले में पूछताछ के लिए तलब किया गया था। जैसे ही सुजीत बोस कार्यालय के भीतर गए, अधिकारियों ने सवालों की झड़ी लगा दी। जांच के पहले कुछ घंटों में अधिकारियों ने उनके वित्तीय लेनदेन और दक्षिण दमदम नगरपालिका में उनके कार्यकाल के दौरान हुई नियुक्तियों पर ध्यान केंद्रित किया।

​शाम होते-होते पूछताछ का स्तर और अधिक गहरा होता गया। ईडी सूत्रों के अनुसार, सुजीत बोस कई महत्वपूर्ण सवालों पर चुप्पी साधे रहे या फिर ऐसे जवाब दिए जो उनके पहले के बयानों से मेल नहीं खा रहे थे। अधिकारियों ने उन्हें कई दस्तावेज़ और बैंक स्टेटमेंट भी दिखाए, लेकिन उन्होंने उन पर स्पष्टता देने से इनकार कर दिया। करीब साढ़े 10 घंटे की लगातार पूछताछ के बाद, जब यह स्पष्ट हो गया कि वह जांच में बाधा डाल रहे हैं, तो रात करीब 9:00 बजे उन्हें गिरफ्तार करने का फैसला लिया गया।

क्या है नगरपालिका भर्ती घोटाला और सुजीत बोस की भूमिका?

​नगरपालिका भर्ती भ्रष्टाचार मामले की जांच पिछले कई महीनों से बंगाल में चल रही है। ईडी के अधिकारियों के अनुसार, यह घोटाला तब का है जब सुजीत बोस दक्षिण दमदम नगरपालिका में वाइस चेयरमैन के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए अलग-अलग पदों के लिए करीब 150 उम्मीदवारों की अवैध तरीके से सिफारिश की थी। यह सिफारिशें केवल कागजी नहीं थीं, बल्कि इनके बदले भारी मात्रा में धन और संपत्तियों का लेन-देन किया गया था।

जांच में सामने आए मुख्य तथ्य:

  • अवैध सिफारिशें: सुजीत बोस पर आरोप है कि उन्होंने उन उम्मीदवारों को नौकरी दिलवाई जो योग्यता के मानकों को पूरा नहीं करते थे।
  • फ्लैट्स और कैश डिपॉजिट: जांच के दौरान ईडी को सुजीत बोस और उनके करीबियों से जुड़े कई बेनामी फ्लैट्स और बैंक खातों में जमा भारी नकदी का पता चला है। जांच एजेंसी का मानना है कि यह संपत्ति नौकरियों की ‘बिक्री’ से हासिल की गई काली कमाई है।
  • 150 उम्मीदवारों का कनेक्शन: ईडी के पास उन 150 लोगों की सूची है जिन्हें सुजीत बोस की सिफारिश पर नियुक्त किया गया था। इनमें से कई लोगों से पहले ही पूछताछ की जा चुकी है, जिसके बाद सुजीत बोस पर शिकंजा कसा गया।

डस्टबिन से मिले ‘चिरकुट’ ने खोला राज

​सुजीत बोस का नाम इस घोटाले में तब प्रमुखता से आया जब ईडी ने साल्ट लेक में ही रहने वाले अयन शील के आवास पर छापेमारी की थी। अयन शील को इस घोटाले का एक और मुख्य आरोपी माना जाता है। छापेमारी के दौरान अधिकारियों को अयन शील के घर के बाहर रखे डस्टबिन से फटे हुए कागजों के कुछ टुकड़े मिले थे। जब इन टुकड़ों को जोड़ा गया, तो उनमें सुजीत बोस और नियुक्तियों से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां और नाम सामने आए। इस ‘चिरकुट’ ने ईडी को एक ऐसा सुराग दिया जिसने इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ कर दिया। इसके बाद से ही सुजीत बोस ईडी की रडार पर थे और उनसे कई बार पूछताछ की जा चुकी थी।

कैश मैनेजमेंट और ‘गौतम’ का रहस्य

​ईडी की जांच में ‘गौतम’ नाम का एक व्यक्ति भी काफी चर्चा में है। सूत्रों का कहना है कि सुजीत बोस के लिए सारा ‘कैश मैनेजमेंट’ यानी अवैध वसूली और धन के रखरखाव का काम यही व्यक्ति देखता था। गौतम के ठिकानों पर हुई पहले की छापेमारी में ईडी को करीब 3 करोड़ रुपये की नकदी मिली थी। गौतम से हुई पूछताछ में भी सुजीत बोस के साथ उसके वित्तीय संबंधों का खुलासा हुआ था। ईडी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नौकरियों के बदले लिया गया पैसा क्या केवल सुजीत बोस तक ही सीमित था या इसके तार और भी ऊंचे पदों पर बैठे लोगों से जुड़े हैं।

कानूनी लुका-छिपी और हाईकोर्ट का हस्तक्षेप

​सुजीत बोस ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कानूनी और प्रशासनिक दोनों रास्तों का सहारा लिया था। 6 अप्रैल और उसके बाद ईडी ने उन्हें कई बार समन जारी किया था, लेकिन उन्होंने हर बार किसी न किसी कारण से पेशी को टाल दिया। उन्होंने कभी चुनाव की व्यस्तता का हवाला दिया तो कभी अपनी स्वास्थ्य समस्याओं का। इसके बाद उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ईडी की पूछताछ और दंडात्मक कार्रवाई से छूट मांगी थी।

​हाईकोर्ट ने सुजीत बोस की दलीलों को सुनने के बाद उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया और उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। अदालत के इसी कड़े रुख के बाद सुजीत बोस को सोमवार को सीजीओ कॉम्प्लेक्स में पेश होना पड़ा। चुनाव का बहाना बनाकर पेशी से बचने की उनकी रणनीति आखिरकार विफल रही और अदालत के निर्देश ने ईडी के लिए गिरफ्तारी का रास्ता साफ कर दिया।

विधायक रतिन घोष पर भी गहराया संकट

​नगरपालिका भर्ती मामले की जांच अब सुजीत बोस से आगे बढ़कर अन्य नेताओं तक भी पहुँच रही है। इसी मामले में मौजूदा टीएमसी विधायक और पूर्व मंत्री रतिन घोष को भी सोमवार को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। हालांकि, रतिन घोष जांच में शामिल नहीं हुए। ईडी सूत्रों का कहना है कि रतिन घोष को इससे पहले भी कई बार समन भेजे जा चुके हैं, लेकिन वे जांच एजेंसी के सामने पेश होने से बच रहे हैं। सुजीत बोस की गिरफ्तारी के बाद अब रतिन घोष पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। जांच एजेंसी का मानना है कि रतिन घोष के पास भी इस घोटाले से जुड़ी कई अहम जानकारियां हैं।

भ्रामक जवाब और असहयोग बना गिरफ्तारी का आधार

​ईडी के अधिकारियों ने गिरफ्तारी के बाद बताया कि सुजीत बोस का रवैया पूछताछ के दौरान बेहद असहयोगपूर्ण था। उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी मासूमियत का दावा तो किया, लेकिन जब उन्हें साक्ष्य दिखाए गए, तो वे जवाब देने के बजाय जांच अधिकारियों को भ्रमित करने लगे। एक ही सवाल के बार-बार अलग जवाब देने और महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से बचने के कारण जांच प्रक्रिया बाधित हो रही थी। ईडी का कहना है कि सुजीत बोस को हिरासत में लेकर पूछताछ करना अनिवार्य हो गया था ताकि इस भ्रष्टाचार की पूरी कड़ियों को जोड़ा जा सके।

​गिरफ्तारी के बाद सुजीत बोस का मेडिकल चेकअप कराया गया है। नियमों के मुताबिक, मंगलवार सुबह उन्हें कोलकाता की एक विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत में पेश किया जाएगा। ईडी अदालत से उनकी अधिकतम दिनों की रिमांड की मांग करेगी ताकि उन्हें हिरासत में रखकर अन्य आरोपियों के साथ आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जा सके। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सुजीत बोस के वकील अदालत में क्या दलीलें पेश करते हैं, लेकिन वर्तमान में उनकी गिरफ्तारी ने पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी के लिए एक बड़ी असहज स्थिति पैदा कर दी है।

​पश्चिम बंगाल में नगरपालिका भर्ती घोटाला अब एक ऐसे मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ एक के बाद एक बड़े नाम जांच के घेरे में आ रहे हैं। सुजीत बोस की गिरफ्तारी इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाही मानी जा रही है। ईडी की नजर अब उन संपत्तियों और बैंक खातों पर है जिन्हें हाल ही में चिन्हित किया गया है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और चौंकाने वाले खुलासे होने की पूरी संभावना है। फिलहाल, साल्ट लेक का सीजीओ कॉम्प्लेक्स भारी सुरक्षा घेरे में है और सुजीत बोस से पूछताछ का अगला दौर शुरू होने की तैयारी है।

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