
भागलपुर, 2 अगस्त 2025:भागलपुर के समाहरणालय स्थित पेंशनर समाज हॉल में आज पारंपरिक मछुआ समुदाय से जुड़े जल श्रमिकों के अधिकारों, समस्याओं और सरकारी नीतियों की समीक्षा को लेकर ‘जल श्रमिक सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण आयोजन की अगुवाई जल श्रमिक संघ और गंगा मुक्ति आंदोलन ने संयुक्त रूप से की।
इस सम्मेलन को मछुआ समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और कानूनी संघर्ष से जोड़ते हुए आयोजकों ने इसे एक ‘आंदोलनात्मक संवाद मंच’ बताया, जहां सदियों से जल पर निर्भर जीवनशैली और आज की प्रशासनिक व कानूनी जटिलताओं के बीच पिसते समुदाय की आवाज बुलंद की गई।
सम्मेलन की पृष्ठभूमि
जल श्रमिक संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि पारंपरिक मछुआ समाज राज्य के अति पिछड़े वर्ग से आता है, जो वर्षों से अपने हक और आजीविका के लिए संघर्ष कर रहा है। आंदोलन के दबाव पर बिहार सरकार ने कुछ कल्याणकारी नीतियां ज़रूर बनाई हैं, लेकिन ‘सैंक्चुरी कानून’, प्रशासनिक लालफीताशाही और वन्यजीव संरक्षण कानूनों ने इन श्रमिकों की ज़िंदगी को और अधिक कठिन बना दिया है।
समस्याएं और समाधान की तलाश
सम्मेलन में यह चिंता जाहिर की गई कि कभी जल प्रदूषण, कभी वन्यजीव संरक्षण, तो कभी नदी घाटों पर प्रतिबंध—इन सबका सीधा असर मछुआ समुदाय पर पड़ता है, जो न तो कृषि करता है और न ही व्यापार—उसकी एकमात्र आजीविका गंगा व अन्य नदियों पर आधारित है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि नीतियों और कानूनों की समीक्षा अब ज़रूरी हो गई है, ताकि यह परखा जा सके कि जो योजनाएं कागजों पर बनी हैं, वे ज़मीन पर कितनी कारगर साबित हो रही हैं।
सम्मेलन से निकली आवाज़
इस सम्मेलन को लेकर गंगा मुक्ति आंदोलन और जल श्रमिक संघ के कार्यकर्ता कई दिनों से घाटों और गांवों में जनसंपर्क कर रहे थे। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में जल श्रमिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और युवा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि पारंपरिक मछुआरों को ‘जल अधिकार’ मिले और नीतियों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
नीति-निर्माताओं तक पहुंचे आवाज़
आयोजकों ने उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन सिर्फ चर्चा तक सीमित न रहकर, नीति निर्धारकों को एक स्पष्ट संदेश देगा कि मछुआ समुदाय की उपेक्षा अब और बर्दाश्त नहीं की जा सकती। सम्मेलन के अंत में एक प्रस्ताव पारित कर सरकार से मछुआ समुदाय के लिए अलग से ‘जल श्रमिक आयोग’ गठित करने की मांग भी की गई।


