
तकनीकी खराबी के बाद भागलपुर और आसपास के इलाकों में यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। पुल पर वाहनों की आवाजाही सीमित होने से खासकर चार पहिया और भारी वाहनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लंबा वैकल्पिक रास्ता तय करने की मजबूरी ने यात्रियों, व्यापारियों और ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसी संकट के बीच अब गंगा नदी में शुरू की गई कार्गो सेवा लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है।
भागलपुर के सबौर स्थित बाबूपुर गंगा घाट से शुरू हुई इस नई व्यवस्था के तहत अब चार पहिया वाहनों, छोटे मालवाहक वाहनों और भारी ट्रकों को मालवाहक जहाजों के जरिए गंगा पार कराया जा रहा है। इस सेवा के शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। घाट पर सुबह से ही वाहनों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो जाती हैं और देर शाम तक यह सिलसिला जारी रहता है।
विक्रमशिला सेतु क्षेत्र के लिए जीवनरेखा माना जाता है। यह पुल भागलपुर को नवगछिया और कोसी क्षेत्र से जोड़ने वाला सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। लेकिन पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद अचानक यातायात व्यवस्था प्रभावित हो गई। भारी वाहनों पर प्रतिबंध और सीमित आवाजाही के कारण ट्रांसपोर्ट कारोबार लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच गया था। ऐसे में गंगा के रास्ते शुरू हुई कार्गो सेवा ने लोगों को राहत की नई उम्मीद दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में हालात काफी कठिन हो गए थे। जिन वाहनों को पहले कुछ ही समय में गंतव्य तक पहुंचना होता था, उन्हें अब कई किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा था। इससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही थी। व्यापारियों को माल पहुंचाने में देरी हो रही थी और परिवहन लागत भी तेजी से बढ़ रही थी।
कार्गो सेवा शुरू होने के बाद अब वाहन सीधे जहाज पर चढ़ाए जा रहे हैं और गंगा नदी पार कर दूसरी ओर उतारे जा रहे हैं। इस व्यवस्था से समय की काफी बचत हो रही है। हालांकि घाट पर भारी भीड़ के कारण लोगों को घंटों इंतजार भी करना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद इसे फिलहाल सबसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है।
यात्री साकेत कुमार ने बताया कि विक्रमशिला सेतु की स्थिति के कारण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो गई थी। खासकर व्यापारिक गतिविधियों और लंबी दूरी की यात्रा करने वालों को भारी दिक्कत हो रही थी। उन्होंने कहा कि कार्गो सेवा शुरू होने के बाद अब कुछ राहत मिली है और लोग कम समय में गंगा पार कर पा रहे हैं।
दूसरी ओर कार्गो सेवा संचालक अनिल कुमार ने बताया कि वर्तमान में दो बड़े मालवाहक जहाज कोलकाता से मंगाए गए हैं। इन जहाजों की मदद से प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहनों को नदी के इस पार से उस पार पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यात्रियों और वाहन चालकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भविष्य में और जहाजों की व्यवस्था भी की जा सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। जहाजों पर वाहनों को संतुलित तरीके से चढ़ाया जा रहा है और हर ट्रिप में निर्धारित क्षमता के अनुसार ही वाहन भेजे जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से भी घाटों पर निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
गंगा घाट पर इन दिनों का दृश्य पूरी तरह बदल चुका है। जहां पहले सीमित गतिविधियां दिखाई देती थीं, वहीं अब यहां ट्रकों, कारों, पिकअप वाहनों और यात्रियों की भारी भीड़ नजर आ रही है। घाट के आसपास छोटे दुकानदारों और स्थानीय व्यवसायियों की गतिविधियां भी बढ़ गई हैं। चाय, नाश्ता और अन्य जरूरी सामान बेचने वाले दुकानदारों की आमदनी में भी इजाफा हुआ है।
हालांकि भीषण गर्मी और लंबा इंतजार लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। कई वाहन चालक घंटों तक अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। तेज धूप के बीच घाट पर पर्याप्त छाया और सुविधाओं की कमी भी महसूस की जा रही है। लोगों ने प्रशासन से पेयजल, शेड और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि यह कार्गो सेवा शुरू नहीं होती तो हालात और गंभीर हो सकते थे। भागलपुर, नवगछिया और आसपास के क्षेत्रों में रोजाना बड़ी मात्रा में सामान की ढुलाई होती है। पुल पर प्रतिबंध लगने के बाद व्यापार पूरी तरह प्रभावित हो रहा था। अब जहाजों के जरिए मालवाहक वाहनों की आवाजाही शुरू होने से बाजार व्यवस्था को राहत मिली है।
ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाने पर ईंधन खर्च काफी बढ़ रहा था। कई बार एक ट्रिप पूरा करने में दोगुना समय लग रहा था। कार्गो सेवा शुरू होने के बाद अब वाहन चालकों को समय और लागत दोनों में राहत मिल रही है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। विक्रमशिला सेतु की मरम्मत और तकनीकी जांच का कार्य जारी है। साथ ही यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि लोगों की आवाजाही पूरी तरह बाधित न हो। इसी उद्देश्य से वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह स्थिति क्षेत्र में एक स्थायी वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था की आवश्यकता को भी दर्शाती है। कई लोगों ने सुझाव दिया कि गंगा नदी में नियमित फेरी और कार्गो सेवा विकसित की जाए ताकि भविष्य में किसी आपात स्थिति में लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे राज्य में जहां बड़ी नदियां परिवहन का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती हैं, वहां जलमार्ग को और अधिक विकसित करने की जरूरत है। यदि आधुनिक कार्गो और फेरी सेवाओं को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जाए तो सड़क और पुलों पर दबाव भी कम किया जा सकता है।
फिलहाल विक्रमशिला सेतु की परेशानी के बीच बाबूपुर गंगा घाट से शुरू हुई कार्गो सेवा लोगों के लिए राहत का बड़ा साधन बन चुकी है। भारी वाहनों से लेकर निजी कारों तक, बड़ी संख्या में लोग अब गंगा के रास्ते यात्रा कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यदि वाहनों की संख्या और बढ़ती है तो प्रशासन और संचालकों के सामने व्यवस्था को और मजबूत बनाने की चुनौती भी खड़ी होगी।


