
बिहार पुलिस अकादमी में मंगलवार को आयोजित पासिंग आउट परेड समारोह में बिहार को 19 नए प्रशिक्षु डीएसपी मिले। दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए विनय कुमार ने युवा पुलिस अधिकारियों को सेवा, समर्पण और कर्तव्य का संदेश देते हुए कहा कि यदि कोई केवल वेतन और भत्ते के लिए पुलिस सेवा में आया है, तो उसके लिए पान की दुकान खोलना ज्यादा बेहतर होगा।
समारोह में डीजीपी ने अपने प्रशिक्षण के दिनों को याद करते हुए पूर्व आईपीएस अधिकारी केपीएस गिल का एक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह हैदराबाद की नेशनल पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे थे, तब एक प्रशिक्षु आईपीएस ने वेतन-भत्ते को लेकर सवाल पूछा था। इस पर केपीएस गिल ने जवाब दिया था, “अगर वेतन-भत्ते के लिए आए हैं तो पान की दुकान खोल लें, क्योंकि अच्छी जगह पर चलने वाली पान दुकान आईपीएस से ज्यादा कमाई करा सकती है।”
विनय कुमार ने कहा, “आप लोग नौकरी और सैलरी के लिए इस सेवा में नहीं आए हैं। यह लोक सेवा है। पुलिस कोई नौकरी नहीं, बल्कि समाज के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी है।”
डीजीपी ने बताया कि जब उन्होंने 1991 बैच में पुलिस सेवा जॉइन की थी, तब उनकी शुरुआती सैलरी मात्र 3 हजार रुपये थी। बावजूद इसके उन्होंने इसे सेवा का माध्यम माना, न कि केवल नौकरी।
राजगीर पुलिस अकादमी से इस बार कुल 19 प्रशिक्षु डीएसपी पास आउट हुए हैं, जिनमें 14 पुरुष और 5 महिला अधिकारी शामिल हैं। एक साल के कठिन प्रशिक्षण के बाद सभी अधिकारियों ने देश सेवा की शपथ ली।
पूजा कुमारी ने कहा कि एक वर्ष का प्रशिक्षण बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। उन्होंने बताया कि फिजिकल ट्रेनिंग शुरू में डरावनी लगती थी, लेकिन अब आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है। अकादमिक ट्रेनिंग के बाद अब फील्ड ट्रेनिंग और भी चुनौतीपूर्ण होगी।
वहीं 69वीं बैच के टॉपर उज्ज्वल कुमार उपकार ने कहा कि इस प्रशिक्षण ने उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाया है और अब वे समाज में बेहतर योगदान देने के लिए तैयार हैं।
इन प्रशिक्षु अधिकारियों को आधुनिक पुलिसिंग, साइबर फ्रॉड जांच, डिजिटल साक्ष्य जुटाने, कानून-व्यवस्था प्रबंधन, दंगा नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और आपदा प्रतिक्रिया जैसी अत्याधुनिक ट्रेनिंग दी गई है। साथ ही राइफल शूटिंग, घुड़सवारी, ड्रिल और आधुनिक हथियार संचालन का भी कठोर अभ्यास कराया गया।


