
तकनीकी खराबी ने भागलपुर और नवगछिया के बीच रोजाना आने-जाने वाले हजारों लोगों की जिंदगी को अचानक बदल दिया है। पुल के क्षतिग्रस्त होने और आवाजाही प्रभावित होने के बाद अब गंगा नदी पार करने के लिए नावें ही लोगों की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई हैं। जिस गंगा घाट पर कभी सन्नाटा पसरा रहता था, वहां आज सुबह से लेकर देर शाम तक यात्रियों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है।
भागलपुर और नवगछिया के बीच संपर्क का प्रमुख माध्यम माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु पर यातायात प्रभावित होने के बाद लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नौकरीपेशा लोग, छात्र, व्यापारी, मरीज और दैनिक कामकाज के लिए सफर करने वाले लोग अब नावों के जरिए गंगा पार करने को मजबूर हैं।
स्थिति यह हो गई है कि पिछले कई वर्षों से लगभग निष्क्रिय हो चुके गंगा घाट एक बार फिर पुराने दिनों की तरह जीवंत दिखाई देने लगे हैं। सुबह होते ही घाटों पर यात्रियों की लंबी कतारें लग जाती हैं। लोग अपने गंतव्य तक जल्दी पहुंचने के लिए नावों का इंतजार करते नजर आते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब दो दशक पहले तक गंगा नदी पार करने के लिए नावें ही मुख्य साधन हुआ करती थीं। लेकिन विक्रमशिला सेतु बनने के बाद धीरे-धीरे नावों का इस्तेमाल कम हो गया और कई नाविकों ने यह काम छोड़ दिया। अब पुल में आई खराबी के बाद वही पुराना दौर फिर लौटता दिखाई दे रहा है।
घाटों पर इस समय हर दिन करीब 50 नावें यात्रियों को नदी पार कराने में लगी हुई हैं। सुबह से शाम तक लगातार नावों का संचालन हो रहा है। नाविकों के अनुसार एक नाव में दर्जनों लोग सफर कर रहे हैं और यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
नाव सेवा के बढ़ते उपयोग ने घाटों की आर्थिक गतिविधियों को भी अचानक बढ़ा दिया है। घाटों के आसपास चाय दुकानों, छोटे होटल, ठेला व्यवसायियों और अन्य स्थानीय दुकानदारों की आमदनी में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। पहले जहां घाटों पर पूरे दिन मुश्किल से कुछ लोग दिखाई देते थे, वहीं अब यहां मेले जैसा माहौल नजर आने लगा है।
नाविक अर्जुन महलदार ने बताया कि पहले नाव चलाने से बहुत कम आमदनी होती थी। कई बार दिनभर मेहनत करने के बाद भी खर्च निकालना मुश्किल हो जाता था। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। उन्होंने कहा कि इन दिनों रोजाना 5 हजार से 10 हजार रुपये तक की कमाई हो रही है। हालांकि यात्रियों की भारी भीड़ और तेज गर्मी के कारण काम करना आसान नहीं है।
उन्होंने बताया कि सुबह से लगातार नाव चलानी पड़ती है। कई बार इतनी भीड़ हो जाती है कि यात्रियों को संभालना मुश्किल हो जाता है। बावजूद इसके नाविक लोगों को सुरक्षित तरीके से नदी पार कराने की कोशिश कर रहे हैं।
भीषण गर्मी ने यात्रियों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच नाव से सफर करना लोगों के लिए बेहद कठिन साबित हो रहा है। कई यात्रियों ने बताया कि पुल बंद होने के कारण उन्हें मजबूरी में नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
नौकरी के लिए रोजाना भागलपुर से नवगछिया जाने वाले लोगों ने कहा कि पहले पुल के जरिए कुछ ही समय में सफर पूरा हो जाता था, लेकिन अब नाव और फिर दूसरी ओर वाहन पकड़ने में अधिक समय लग रहा है। इससे दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
कुछ यात्रियों ने सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि अचानक बढ़ी भीड़ के कारण कई बार नावों में क्षमता से अधिक लोग बैठ जाते हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है। लोगों ने प्रशासन से घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और नावों की नियमित जांच कराने की मांग की है।
दूसरी ओर प्रशासन भी हालात पर नजर बनाए हुए है। स्थानीय अधिकारियों द्वारा घाटों पर निगरानी बढ़ाई गई है ताकि यात्रियों को सुरक्षित तरीके से गंगा पार कराया जा सके। प्रशासन ने नाविकों को सुरक्षा नियमों का पालन करने और ओवरलोडिंग से बचने का निर्देश दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विक्रमशिला सेतु में आई खराबी ने क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। यह पुल भागलपुर और कोसी क्षेत्र के बीच संपर्क का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। ऐसे में इसके प्रभावित होने से लाखों लोगों की आवाजाही पर सीधा असर पड़ा है।
व्यापारिक गतिविधियों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। कई छोटे कारोबारी और व्यापारियों ने बताया कि सामान लाने और भेजने में दिक्कतें बढ़ गई हैं। ट्रांसपोर्ट प्रभावित होने से लागत भी बढ़ रही है और समय भी अधिक लग रहा है।
घाटों पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए कुछ स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अतिरिक्त नावों की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
गंगा घाटों की यह बदली तस्वीर लोगों को पुराने दौर की याद भी दिला रही है। बुजुर्ग बताते हैं कि एक समय ऐसा था जब नावों के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। गांवों और कस्बों के लोग रोजाना नाव के जरिए सफर करते थे। पुल बनने के बाद धीरे-धीरे नावों की जरूरत कम हो गई थी, लेकिन अब हालात फिर उसी दिशा में लौटते दिख रहे हैं।
स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से अपील की है कि यात्रियों की सुविधा के लिए घाटों पर पीने के पानी, छाया और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाओं की व्यवस्था की जाए। तेज गर्मी के बीच घंटों इंतजार करने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
फिलहाल विक्रमशिला सेतु की मरम्मत और यातायात सामान्य होने का इंतजार किया जा रहा है। तब तक नावें ही हजारों लोगों की जीवनरेखा बनी रहेंगी। भागलपुर के गंगा घाटों पर लौटती भीड़ और नावों की चहल-पहल यह साबित कर रही है कि संकट की घड़ी में पुराने साधन भी किस तरह लोगों के लिए सबसे बड़ा सहारा बन जाते हैं।


