
तमिलनाडु की राजनीति में शुक्रवार को उस समय बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला जब तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) प्रमुख थलापति विजय को राज्यपाल की ओर से सरकार बनाने का न्योता मिलने की खबर सामने आई। इसके साथ ही अब लगभग तय माना जा रहा है कि लोकप्रिय अभिनेता से राजनेता बने विजय शनिवार को तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। इस खबर के सामने आते ही पूरे राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई और चेन्नई से लेकर कई जिलों तक विजय समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया।
राजनीतिक गलियारों में पूरे दिन इस बात की चर्चा रही कि विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा हासिल करने के लिए टीवीके को कई दलों का समर्थन मिल गया है। खास बात यह रही कि वामपंथी दलों ने भी सरकार गठन के लिए विजय को समर्थन देने का एलान कर दिया। इसके बाद यह लगभग स्पष्ट हो गया कि तमिलनाडु की सत्ता में एक नया राजनीतिक अध्याय शुरू होने जा रहा है।
शुक्रवार को चेन्नई स्थित लोक भवन में हुई बैठकों के बाद विजय वहां से बाहर निकले। उनके बाहर आते ही पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच उत्साह का माहौल बन गया। टीवीके कार्यालय और विजय के आवास के बाहर हजारों की संख्या में समर्थक जमा हो गए। ढोल-नगाड़ों, पटाखों और नारों के बीच समर्थकों ने विजय को भविष्य का मुख्यमंत्री बताते हुए जश्न मनाया। सोशल मीडिया पर भी विजय के समर्थन में पोस्ट और वीडियो तेजी से वायरल होने लगे।
राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो टीवीके को कांग्रेस पहले ही समर्थन देने की घोषणा कर चुकी है। इसके अलावा CPI और CPI(M) ने भी शुक्रवार को संयुक्त रूप से यह साफ कर दिया कि वे सरकार गठन के मुद्दे पर विजय की पार्टी का समर्थन करेंगे। हालांकि इन दलों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे सरकार में शामिल नहीं होंगे और केवल बाहर से समर्थन देंगे।
CPI(M) नेता यू. वासुकी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी और CPI ने राज्य समिति की बैठक के बाद यह निर्णय लिया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए टीवीके को समर्थन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब विधानसभा में विश्वास मत लाया जाएगा, तब दोनों दल टीवीके के पक्ष में मतदान करेंगे। उनके अनुसार यह समर्थन बिना किसी शर्त के केवल सरकार गठन और लोकतांत्रिक स्थिरता के लिए दिया जा रहा है।
यू. वासुकी ने आगे कहा कि धर्मनिरपेक्षता, राज्यों के अधिकार और सामाजिक एकता जैसे मुद्दों पर वामपंथी दल हमेशा अपने सिद्धांतों के साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में यदि ऐसे मुद्दे सामने आते हैं तो वे उसी राजनीतिक ताकत का समर्थन करेंगे जो इन मूल्यों के साथ खड़ी दिखाई देगी। इस बयान को तमिलनाडु की बदलती राजनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वहीं CPI के प्रदेश सचिव वीरपांडियन ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि टीवीके की ओर से सरकार गठन को लेकर संपर्क किया गया था। इसके बाद पार्टी स्तर पर चर्चा हुई और लोकतांत्रिक तरीके से निर्णय लिया गया कि जनता के जनादेश का सम्मान करते हुए विजय की पार्टी को समर्थन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजनीति में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है और जनता ने टीवीके को एक मजबूत विकल्प के रूप में चुना है।
इधर VCK ने भी संकेत दिए हैं कि वह वामपंथी दलों के फैसले के साथ खड़ी रहेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ये सभी दल एकजुट होकर समर्थन देते हैं तो विधानसभा में टीवीके बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार कर सकती है। इसी वजह से विजय के मुख्यमंत्री बनने की संभावना अब बेहद मजबूत मानी जा रही है।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और खबर ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि टीवीके ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर राज्यपाल को विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का निर्देश देने की मांग की थी। लेकिन पार्टी के करीबी सूत्रों ने इन खबरों का खंडन कर दिया। सूत्रों के अनुसार पार्टी की ओर से ऐसी कोई याचिका दायर नहीं की गई और सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक तरीके से आगे बढ़ रही है।
तमिलनाडु की राजनीति में विजय का यह उभार बेहद तेजी से हुआ है। फिल्म जगत में लंबे समय तक सुपरस्टार रहने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और कम समय में बड़ी लोकप्रियता हासिल कर ली। उनकी सभाओं में भारी भीड़ उमड़ने लगी और युवाओं के बीच उनकी पकड़ लगातार मजबूत होती गई। कई राजनीतिक विशेषज्ञ पहले से ही मान रहे थे कि विजय आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन इतनी जल्दी सत्ता तक पहुंचने की संभावना को लेकर बहुत कम लोगों ने अनुमान लगाया था।
विजय ने अपने राजनीतिक अभियान के दौरान भ्रष्टाचार, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने खुद को पारंपरिक राजनीति से अलग बताते हुए युवाओं और आम लोगों की आवाज के रूप में पेश किया। यही कारण रहा कि पहली बार चुनावी मैदान में उतरने के बावजूद उनकी पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और सत्ता के समीकरण बदल दिए।
अब सभी की नजर शनिवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हुई है। चेन्नई में इस कार्यक्रम की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और बड़ी संख्या में समर्थकों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक दलों के कई बड़े नेताओं को भी समारोह में आमंत्रित किए जाने की चर्चा है।
तमिलनाडु में यह राजनीतिक बदलाव आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है। विजय के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती चुनावी वादों को जमीन पर उतारने और गठबंधन सहयोगियों के साथ संतुलन बनाए रखने की होगी। वहीं समर्थकों को उम्मीद है कि नई सरकार राज्य में विकास, पारदर्शिता और नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत करेगी।
फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति का पूरा केंद्र विजय बन चुके हैं। अभिनेता से मुख्यमंत्री बनने की उनकी यात्रा ने न सिर्फ उनके समर्थकों को उत्साहित किया है, बल्कि देशभर के राजनीतिक विश्लेषकों का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। शनिवार का दिन तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हो सकता है।


