वेतन जारी कराने के नाम पर स्वास्थ्य केंद्र के लिपिक की घूसखोरी उजागर, निगरानी टीम ने रंगे हाथ किया गिरफ्तार

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार चल रही कार्रवाई के बीच जमुई जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत एक लिपिक को वेतन भुगतान के बदले रिश्वत लेते हुए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई उस समय की गई जब आरोपी कर्मचारी एक महिला स्वास्थ्यकर्मी से लंबित वेतन जारी कराने के बदले मोटी रकम वसूल रहा था। इस गिरफ्तारी के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और पूरे मामले को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

जानकारी के अनुसार यह मामला जमुई जिले के सोनो प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा हुआ है। यहां तैनात लिपिक रूपेश कुमार पर आरोप है कि उसने एक महिला कर्मी का कई महीनों से लंबित वेतन जारी कराने के बदले रिश्वत की मांग की थी। महिला कर्मचारी ने जब लगातार दबाव और पैसे की मांग से परेशान होकर निगरानी विभाग से संपर्क किया, तब पूरे मामले की जांच शुरू की गई।

बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता महिला कर्मी ने वर्ष 2025 में अपनी ड्यूटी जॉइन की थी, लेकिन लंबे समय तक उनका वेतन जारी नहीं किया गया। इस दौरान वे लगातार कार्यालय के चक्कर लगाती रहीं। आरोप है कि संबंधित लिपिक ने वेतन भुगतान से जुड़े दस्तावेज आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत की मांग शुरू कर दी। पहले महिला कर्मी को टालमटोल किया गया और बाद में सीधे तौर पर एक महीने की सैलरी देने की शर्त रखी गई।

महिला कर्मी ने शुरुआत में मामले को शांतिपूर्वक सुलझाने की कोशिश की, लेकिन जब रिश्वत की मांग लगातार बढ़ती गई तो उन्होंने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने पूरे मामले का गोपनीय सत्यापन कराया। जांच के दौरान शिकायत सही पाई गई, जिसके बाद आरोपी को पकड़ने के लिए विशेष टीम का गठन किया गया।

निगरानी विभाग ने पूरी योजना बेहद गोपनीय तरीके से तैयार की। टीम ने शिकायतकर्ता को आवश्यक निर्देश दिए और तय समय पर आरोपी को रिश्वत की रकम देने के लिए भेजा गया। जैसे ही आरोपी लिपिक ने महिला कर्मी से 37 हजार रुपये लिए, पहले से घात लगाए बैठी निगरानी टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। यह कार्रवाई उसके कार्यालय कक्ष में की गई, जिससे वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई।

गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम ने आरोपी के कार्यालय और आसपास की तलाशी भी ली। इस दौरान कार्यालय की आलमारी से 35 हजार रुपये अतिरिक्त नकद बरामद किए गए। इस रकम के बारे में आरोपी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह राशि कहां से आई और क्या यह भी किसी अवैध वसूली का हिस्सा थी।

सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां इस एंगल पर भी काम कर रही हैं कि कहीं स्वास्थ्य केंद्र में रिश्वतखोरी का कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। कई बार ऐसे मामलों में अकेले कर्मचारी की भूमिका सामने आती है, लेकिन बाद में पता चलता है कि कार्यालय के अन्य लोग भी अप्रत्यक्ष रूप से इसमें शामिल रहते हैं। इसलिए निगरानी विभाग अब संबंधित दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और अन्य रिकॉर्ड की भी जांच कर रहा है।

इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों में आम कर्मचारियों और जरूरतमंद लोगों को आज भी अपने ही पैसे और अधिकार पाने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है। खासतौर पर स्वास्थ्य विभाग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह के भ्रष्टाचार से कर्मचारियों का मनोबल टूटता है और व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।

स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत कई कर्मियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि वेतन भुगतान, सेवा पुस्तिका अपडेट, ट्रांसफर फाइल और अन्य प्रशासनिक कार्यों में कई बार कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ मामलों में फाइलों को जानबूझकर लंबित रखा जाता है ताकि बाद में पैसों की मांग की जा सके। हालांकि विभागीय अधिकारी सार्वजनिक तौर पर इस तरह के आरोपों से इनकार करते रहे हैं।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की इस कार्रवाई को राज्य सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हाल के महीनों में बिहार के अलग-अलग जिलों में कई सरकारी कर्मचारी और अधिकारी रिश्वत लेते पकड़े गए हैं। बावजूद इसके रिश्वतखोरी के मामलों में कमी नहीं आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल गिरफ्तारी से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने की जरूरत है।

गिरफ्तार आरोपी को पूछताछ के लिए पटना ले जाया गया है। वहां उससे विस्तृत पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि उसने पहले भी इस तरह की वसूली की थी या नहीं। जांच के बाद उसे विशेष निगरानी अदालत में पेश किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में फैले भ्रष्टाचार की तस्वीर सामने ला दी है। सरकार लगातार पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई विभागों में अब भी पुराने तरीके से काम हो रहा है। ऐसे में आम लोगों और कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

फिलहाल निगरानी विभाग की कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों में दहशत का माहौल है। कई लोग अब यह मान रहे हैं कि भ्रष्टाचार के मामलों में शिकायत करने पर कार्रवाई संभव है। वहीं दूसरी ओर लोग यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि इस मामले के जरिए पूरे सिस्टम की गहराई से जांच होगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में कोई सरकारी कर्मचारी वेतन या जरूरी काम के बदले रिश्वत मांगने की हिम्मत न कर सके।

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