
वैशाली, 18 मई 2026: बिहार के वैशाली जिले से घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों की अवैध बिक्री और कालाबाजारी का बड़ा मामला सामने आया है। जिले के बेलसर थाना क्षेत्र स्थित मौना गांव में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर, संदिग्ध गैस कार्ड और अन्य सामान बरामद किए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और प्रशासन अब पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश में जुट गया है।
जानकारी के अनुसार, पिछले कई दिनों से प्रशासन को सूचना मिल रही थी कि मौना गांव में घरेलू उपयोग के लिए मिलने वाले एलपीजी सिलेंडरों को अवैध तरीके से ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। बताया जा रहा है कि गरीब परिवारों और सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले सिलेंडरों को इकट्ठा कर ब्लैक मार्केट में सप्लाई किया जा रहा था। आरोप है कि जरूरतमंद लोगों को मिलने वाली गैस को बाजार में कई गुना अधिक कीमत पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जा रहा था।
सूत्रों के मुताबिक, सिलेंडरों की कीमत 2100 रुपये से लेकर 5100 रुपये तक वसूली जा रही थी। सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं को भी मजबूरी में अधिक दाम देकर गैस खरीदनी पड़ रही थी। इससे आम लोगों में काफी नाराजगी थी। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने इसकी गोपनीय तरीके से जांच शुरू की और फिर पूरी योजना बनाकर छापेमारी की कार्रवाई की गई।
बताया जा रहा है कि एसपी के निर्देश पर विशेष टीम का गठन किया गया था। इस टीम का नेतृत्व गोपाल मंडल कर रहे थे। पुलिस ने पहले पूरे इलाके की गतिविधियों पर नजर रखी और फिर ग्राहक बनकर आरोपी के संपर्क में पहुंची। टीम जब मौना गांव में स्थित लुट्टू चौधरी के घर पहुंची और गैस सिलेंडर खरीदने की बात की, तब अलग-अलग कीमत बताई गई। पुलिस को यहीं से शक पक्का हो गया कि अवैध तरीके से सिलेंडरों की बिक्री की जा रही है।
जैसे ही पुलिस को पूरे मामले की पुष्टि हुई, तुरंत मौके पर छापेमारी शुरू कर दी गई। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 6 भरे हुए और 9 खाली गैस सिलेंडर बरामद किए। इसके अलावा बड़ी संख्या में गैस कार्ड और अन्य दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। बरामद कार्डों को लेकर आशंका जताई जा रही है कि इनका इस्तेमाल फर्जी तरीके से गैस उठाव और वितरण में किया जा रहा था।
छापेमारी के दौरान स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। ग्रामीणों के बीच इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। कई लोगों ने दावा किया कि इलाके में लंबे समय से गैस सिलेंडर की कालाबाजारी चल रही थी, लेकिन अब जाकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। लोगों का कहना है कि गरीब परिवारों को समय पर गैस नहीं मिलती थी, जबकि कुछ लोग बड़े पैमाने पर सिलेंडर जमा कर ऊंचे दामों पर बेच रहे थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत इसकी सूचना संबंधित विभागों को दी। बेलसर प्रखंड के अंचल अधिकारी और प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे। इसके बाद जिला प्रशासन की टीम ने पूरे परिसर की जांच की और बरामद सामान का सत्यापन शुरू किया। अधिकारियों ने दस्तावेजों और गैस कार्डों की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश शुरू कर दी है कि आखिर यह नेटवर्क कितने दिनों से सक्रिय था।
प्रशासन को आशंका है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का काम नहीं है, बल्कि इसके पीछे संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि गैस सिलेंडर किन एजेंसियों से लाए जा रहे थे और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के नाम पर फर्जी तरीके से गैस उठाव तो नहीं किया जा रहा था।
सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान कुछ ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं जिनसे यह संकेत मिल रहा है कि कई लोगों के नाम और पहचान का गलत इस्तेमाल किया गया हो सकता है। यदि ऐसा साबित होता है तो मामले में फर्जीवाड़ा, धोखाधड़ी और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है। पुलिस फिलहाल जब्त सामान की सूची तैयार कर रही है और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है।
गैस सिलेंडर की कालाबाजारी का यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि घरेलू एलपीजी सिलेंडर सरकार द्वारा सब्सिडी के साथ आम लोगों को उपलब्ध कराया जाता है। यदि इन सिलेंडरों को अवैध तरीके से बाजार में बेचा जाता है तो इससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। ग्रामीण इलाकों में पहले ही गैस वितरण को लेकर कई तरह की समस्याएं रहती हैं, ऐसे में कालाबाजारी से स्थिति और खराब हो जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू गैस सिलेंडरों की अवैध बिक्री से सुरक्षा संबंधी खतरे भी बढ़ जाते हैं। बिना किसी नियम और रिकॉर्ड के सिलेंडरों का भंडारण और सप्लाई बड़े हादसे का कारण बन सकता है। यही वजह है कि प्रशासन अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे नेटवर्क को खत्म करने की तैयारी में है।
पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है और जल्द ही कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि इस रैकेट में अन्य लोग भी शामिल पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही संबंधित गैस एजेंसियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल मौना गांव में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है और प्रशासन लगातार इलाके पर नजर बनाए हुए है। इस कार्रवाई के बाद आसपास के क्षेत्रों में भी अवैध गैस कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।


