UGC नियमों को लेकर पटना में बवाल.. छात्रों का मार्च, पुलिस से भिड़ंत, वाटर कैनन तैनात… जेपी गोलंबर बना रणक्षेत्र

पटना | UGC के नए नियमों को लागू करने की मांग को लेकर राजधानी पटना में सोमवार को छात्र सड़कों पर उतर आए। बड़ी संख्या में छात्र पटना कॉलेज परिसर से गांधी मैदान की ओर मार्च करते हुए निकले। हाथों में बैनर, नारों की गूंज और आक्रोश भरे चेहरों के बीच पूरा इलाका कुछ ही देर में आंदोलन का केंद्र बन गया।


जेपी गोलंबर पर पुलिस ने रोका मार्च

जैसे ही छात्र जेपी गोलंबर पहुंचे, वहां पहले से तैनात पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। छात्रों ने जब आगे बढ़ने की कोशिश की तो पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।


बैरिकेडिंग पर चढ़े छात्र, हालात बेकाबू

पुलिस की रोक के बाद छात्र बैरिकेडिंग पर चढ़कर नारेबाजी करने लगे। कुछ ही देर में धक्का-मुक्की शुरू हो गई और प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग को तोड़ने की कोशिश की।
स्थिति बिगड़ते देख पुलिस ने अतिरिक्त बल बुला लिया।


वाटर कैनन की तैनाती, ट्रैफिक बंद

हालात काबू में करने के लिए मौके पर वाटर कैनन वाहन बुलाया गया। एहतियातन जेपी गोलंबर और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक रोक दिया गया। इससे शहर के कई हिस्सों में जाम की स्थिति बन गई।


“हम सिर पर कफन बांधकर निकले हैं”

प्रदर्शन के दौरान छात्र नेता मनीष यादव ने भावुक और आक्रामक अंदाज़ में कहा—

“हम सिर पर कफन बांधकर निकले हैं। सरकार को UGC के नए नियम लागू करने ही होंगे। चाहे जो हो जाए, हम पीछे नहीं हटेंगे।”
उनके बयान के बाद छात्रों का जोश और बढ़ गया।


विवाद की जड़: सुप्रीम कोर्ट की रोक

दरअसल, 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भेदभाव रोकने से जुड़े UGC के नए नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अदालत ने कहा था कि नियमों के कुछ प्रावधान अस्पष्ट हैं और उनके दुरुपयोग की आशंका है।

UGC ने 13 जनवरी 2026 को 2012 के नियमों में संशोधन कर नए नियम जारी किए थे। उद्देश्य था—शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव रोकना। लेकिन इन्हीं नियमों को लेकर अब देशभर में बहस और विरोध शुरू हो गया है।


छात्रों में बंटवारा, प्रशासन अलर्ट

UGC नियमों को लेकर छात्र समुदाय दो धड़ों में बंटा हुआ है—

  • एक वर्ग चाहता है कि नियम तुरंत लागू हों
  • दूसरा सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन कर रहा है

फिलहाल पटना में हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है।
सवाल अब यही है—क्या सरकार छात्रों की मांग मानेगी, या सुप्रीम कोर्ट की रोक ही आखिरी फैसला बनेगी?

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