किसानों को मारने वाले बाघ का सफल रेस्क्यू, दो हफ्ते की मेहनत रंग लाई

मंगुराहा/वल्मीकी टाइगर रिजर्व: दो हफ्ते तक लगातार ट्रैकिंग के बाद वन विभाग की टीम ने आखिरकार 12 वर्षीय नर बाघ को पकड़ने में सफलता हासिल की। यह बाघ पिछले कई दिनों से दर्जनों गांवों के लिए खतरा बना हुआ था और लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था।

बताया गया है कि बाघ वल्मीकी टाइगर रिजर्व (VTR) के जंगल से बाहर आकर मंगूराहा वन क्षेत्र के सिसई गांव के आस-पास मंडराने लगा था। स्थानीय किसानों और ग्रामीणों में आतंक फैल चुका था। बाघ ने इस दौरान कई लोगों को घायल किया और कुछ की जान लेने की भी कोशिश की।

वनकर्मियों की टीम ने विशेष ट्रैकिंग उपकरण और अनुभवी रेस्क्यू तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बाघ को सुरक्षित पकड़ने में सफलता पाई। वन संरक्षक सह निदेशक डॉ. नेशामणी ने बताया कि बाघ को पटना स्थित संजय गांधी जैविक उद्यान में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

डॉ. नेशामणी ने कहा, “हमारी प्राथमिकता बाघ की सुरक्षा और आसपास के लोगों की सुरक्षा दोनों रही। बाघ को सुरक्षित स्थान पर भेजा जाएगा ताकि वह अपने प्राकृतिक आवास में सुरक्षित जीवन जी सके और स्थानीय लोग भी सुरक्षित रहें।”

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगल में अकेले न जाएँ और वन्यजीवों से दूरी बनाए रखें।

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