खलीफाबाग भागलपुर के आनंदमार्गी समेत दो की रांची में हत्या

रांची के चान्हो की चामा पंचायत स्थित आनंदशील आश्रम में बुधवार देर रात बदमाशों ने ताबड़ताड़ गोलीबारी कर दो लोगों की हत्या कर दी। मृतकों में साधु 50 वर्षीय मुकेश साह और उनका साथी 36 वर्षीय राजेंद्र यादव शामिल हैं।

साह भागलपुर के आरपी रोड खलीफाबाग के निवासी थे, जबकि राजेंद्र रांची के बुढ़मू स्थित साढ़म के निवासी थे। मामले में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि लूटपाट का विरोध करने पर दोनों की हत्या की गई।

पुलिस के अनुसार, बुधवार रात आधा दर्जन बदमाश कार और बाइक से आश्रम पहुंचे और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इसमें मुकेश साह को गोली लगी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गयी। बता दें कि मुकेश भागलपुर के भाजपा नेता निरंजन साह के भतीजे थे। मुकेश के बड़े भाग दिलीप ने बताया कि 20 साल पहले आनंदमार्गी प्रचार-प्रसार करने वे ब्राजील गए थे और वहीं शादी कर बस गए। चार साल पहले मुकेश की मां की तबीयत बिगड़ने पर भागलपुर आए और कुछ महीने तक मां की सेवा की। उनकी मां का देहांत हो गया। उसके बाद मुकेश ब्राजील नहीं गए। पिता लड्डू साह का देहांत 10 साल पहले ही हो चुका है।

ब्राजील में की थी शादी, मां बीमार हुईं तो भारत लौटे मुकेश

खलीफाबाग आरपी रोड ठाकुरबाड़ी के मूल निवासी आनंदमार्गी आश्रम रांची में रह रहे मुकेश साह की हत्या की सूचना मिलते ही परिजनों ने रांची पुलिस से संपर्क किया और शव को वहां से लाने की बात कही। मुकेश के बड़े भाई दिलीप ने बताया कि लगभग 20 साल पहले आनंदमार्गी प्रचार-प्रसार के सिलसिले में वे ब्राजील गए थे। ब्राजील की लड़की एदना से उन्होंने शादी कर ली। वहीं बस गए। उनकी एक बेटी भी हुई। चार साल पहले मुकेश की मां की तबीयत बिगड़ गई। सूचना मिलने पर मुकेश ब्राजील से भागलपुर आए और कुछ महीने तक मां की सेवा की। उनकी मां का देहांत हो गया। फिर मुकेश ब्राजील नहीं गए। पिता लड्डू साह का देहांत लगभग 10 साल पहले हो चुका है। बड़े भाई दिलीप साह ने बताया कि मंगलवार को पोते की छठी पर मुकेश से बात वीडियो कॉल पर हुई तो मुकेश ने आश्रम भी दिखाया था और बताया था कि आश्रम में नया किचन बनवा रहे हैं। मुकेश से छोटे भाई कालीचरण उर्फ रवि ने बताया कि बुधवार को उनकी भी बात हुई थी। उन्होंने रवि से रांची आ जाने को कहा, ताकि वहीं पर कुछ काम कर सके।

1987 में ही घर छोड़ा, पांच भाइयों में तीसरे नंबर पर थे परिजनों ने बताया कि 1987 में ही उन्होंने घर छोड़ दिया था और आनंदमार्गी बन गए थे। वे कई बार विदेश भी गए। किसी तरह मैट्रिक पास करने वाले मुकेश अंग्रेजी भी बोल लेते थे। मुकेश पांच भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। मुकेश के चाचा और भाजपा नेता निरंजन साह ने रांची के एसएसपी से बात की और उन्हें बताया कि परिजन शव लाने के लिए रांची जा रहे हैं।

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