
सहरसा: कहते हैं कि सफलता संसाधनों से नहीं, बल्कि मेहनत और मजबूत इरादों से मिलती है। बिहार के सहरसा जिले के तुलसियाही वार्ड-1 के एक साधारण परिवार ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। एक छोटे किराना दुकानदार के तीनों बेटे-बेटी ने NEET-2026 में सफलता हासिल कर पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है।
एक ही परिवार से तीन-तीन डॉक्टर बनने की ओर कदम

परिवार के बड़े बेटे रजनीश कुमार ने ऑल इंडिया रैंक 3122, बेटी साक्षी कुमारी ने 9672 और सबसे छोटे बेटे प्रहलाद कुमार ने 26751 रैंक हासिल की है। अब तीनों मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेकर डॉक्टर बनने का सपना पूरा करेंगे।
पहले ही प्रयास में मिली सफलता
सबसे छोटे भाई प्रहलाद कुमार ने अपने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की।

उन्होंने कहा,
“मैं रोज कम से कम 10 से 12 घंटे पढ़ाई करता था। मेरी सफलता का श्रेय माता-पिता, भाई-बहन और शिक्षकों को जाता है।”
तीसरे प्रयास में मिली बड़ी कामयाबी

बड़े भाई रजनीश कुमार और बहन साक्षी कुमारी ने लगातार मेहनत जारी रखी और तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की।
रजनीश ने कहा,
“तीन साल की मेहनत रंग लाई। सबसे बड़ी खुशी इस बात की है कि हम तीनों भाई-बहन एक साथ सफल हुए हैं।”
वहीं साक्षी ने बताया,
“रोज 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थी। परीक्षा नजदीक आने पर 13 घंटे तक तैयारी करती थी।”
छोटी किराना दुकान, लेकिन बड़े सपने
तीनों बच्चों के पिता रोहित कुमार एक छोटी किराना दुकान चलाकर परिवार का खर्च उठाते हैं, जबकि मां पूनम देवी गृहिणी हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने कभी बच्चों की पढ़ाई से समझौता नहीं किया।
भावुक मां पूनम देवी ने कहा,
“बच्चों ने हमारी मेहनत और संघर्ष को करीब से देखा है। उनकी सफलता हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान है।”
सेल्फ स्टडी बनी सफलता की कुंजी
तीनों भाई-बहनों ने 11वीं और 12वीं के दौरान सहरसा के एक कोचिंग संस्थान से मार्गदर्शन लिया, लेकिन सफलता का सबसे बड़ा आधार सेल्फ स्टडी रही।
उन्होंने सोशल मीडिया और अन्य व्यस्तताओं से दूरी बनाकर रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई की, पुराने प्रश्नपत्र हल किए और अनुशासित दिनचर्या अपनाई।
पूरा गांव मना रहा जश्न
एक ही परिवार के तीन बच्चों का एक साथ NEET जैसी कठिन परीक्षा में सफल होना पूरे इलाके के लिए गर्व का विषय बन गया है। घर पर लगातार रिश्तेदार, पड़ोसी और शुभचिंतक पहुंचकर तीनों भाई-बहनों को बधाई दे रहे हैं।
यह परिवार आज उन लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गया है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला रखते हैं।
मेहनत, अनुशासन और परिवार का साथ—यही इस सफलता की सबसे बड़ी कहानी है।


