बिहार के इस स्कूल की तस्वीर ने उठाए सवाल, कीचड़ भरे परिसर में बच्चों ने बेंच लगाकर शिक्षिका को दिलाया प्रवेश

बिहार के अररिया जिले से सामने आई एक घटना ने सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जोगबनी नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 11 में स्थित प्राथमिक विद्यालय खजूरबाड़ी का एक वीडियो इन दिनों तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि स्कूल परिसर और प्रवेश मार्ग पूरी तरह पानी और कीचड़ से भरा हुआ है, जिसके कारण बच्चों को अपनी शिक्षिका के स्कूल पहुंचने के लिए बेंच लगाकर रास्ता बनाना पड़ा।

इस दृश्य ने केवल स्थानीय लोगों को ही नहीं बल्कि इंटरनेट पर वीडियो देखने वाले हजारों लोगों को भी हैरान कर दिया। लोगों का कहना है कि यदि एक प्राथमिक विद्यालय तक पहुंचने के लिए बच्चों और शिक्षकों को इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

बताया जा रहा है कि विद्यालय तक पहुंचने के लिए कोई व्यवस्थित सड़क मौजूद नहीं है। बरसात शुरू होते ही स्कूल के आसपास का इलाका पानी से भर जाता है और रास्ता दलदल में बदल जाता है। ऐसे में बच्चों को रोजाना कीचड़ और गंदे पानी के बीच से होकर स्कूल पहुंचना पड़ता है। कई बार छोटे बच्चों के गिरने और कपड़े खराब होने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

स्थानीय लोगों के अनुसार यह समस्या कोई नई नहीं है। वर्षों से विद्यालय के आसपास सड़क और जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण हर मानसून में यही हालात बन जाते हैं। कई बार संबंधित विभागों और स्थानीय प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित कराने की कोशिश भी की गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ छात्र पानी और कीचड़ के बीच खड़े होकर बेंच को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा रहे हैं ताकि उस पर चलकर शिक्षिका विद्यालय परिसर में प्रवेश कर सकें। यह दृश्य देखने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं दो हिस्सों में बंट गई हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह बच्चों और शिक्षकों के बीच सम्मान और सहयोग की भावना का उदाहरण है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने इसे सरकारी व्यवस्था की असफलता और बच्चों पर अतिरिक्त बोझ डालने वाली स्थिति बताया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विद्यालय का वातावरण बच्चों के लिए सुरक्षित और अनुकूल होना चाहिए। यदि बच्चों को पढ़ाई से पहले ऐसे हालात का सामना करना पड़े, तो इसका सीधा असर उनकी शिक्षा और मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है। छोटे बच्चों के लिए कीचड़ और गंदे पानी से होकर रोजाना स्कूल पहुंचना स्वास्थ्य के लिहाज से भी जोखिम भरा है।

बरसात के मौसम में जलभराव वाले क्षेत्रों में त्वचा संक्रमण, बुखार, फंगल इंफेक्शन और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना बेहद जरूरी माना जाता है। लेकिन खजूरबाड़ी विद्यालय की स्थिति यह संकेत देती है कि अभी भी कई ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो सकी हैं।

शिक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि शिक्षक और छात्र दोनों ही शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। यदि विद्यालय तक पहुंचने का रास्ता ही सुरक्षित नहीं होगा, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना करना मुश्किल हो जाएगा। शिक्षकों को भी रोजाना ऐसे हालात में विद्यालय पहुंचना पड़ता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता और मनोबल पर प्रभाव पड़ सकता है।

इधर, स्थानीय नागरिकों ने इस घटना के बाद प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि विद्यालय परिसर और मुख्य मार्ग की मरम्मत के साथ-साथ जल निकासी की उचित व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। लोगों का मानना है कि बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए संघर्ष नहीं बल्कि बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए।

क्षेत्र के कई अभिभावकों ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, लेकिन हर दिन उन्हें इस बात की चिंता बनी रहती है कि कहीं रास्ते में कोई दुर्घटना न हो जाए। विशेष रूप से छोटे बच्चों के लिए फिसलन भरे रास्ते और गहरे पानी से गुजरना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी विद्यालयों की वास्तविक स्थिति को सामने ला दिया है। शहरों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल बोर्ड और आधुनिक सुविधाओं की चर्चा होती है, लेकिन दूसरी ओर ऐसे विद्यालय भी मौजूद हैं जहां तक पहुंचने के लिए आज भी पक्की सड़क उपलब्ध नहीं है। शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए इस अंतर को कम करना जरूरी है।

स्थानीय स्तर पर यह भी मांग उठ रही है कि केवल अस्थायी समाधान की बजाय स्थायी व्यवस्था की जाए। सड़क निर्माण, जल निकासी प्रणाली और विद्यालय परिसर के विकास के लिए विशेष योजना बनाई जाए ताकि आने वाले वर्षों में बच्चों और शिक्षकों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। लोगों का कहना है कि यदि यह वीडियो सामने नहीं आता, तो शायद समस्या पहले की तरह ही अनदेखी रह जाती। अब उम्मीद की जा रही है कि संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाई करेगा।

खजूरबाड़ी प्राथमिक विद्यालय की यह तस्वीर केवल एक स्कूल की कहानी नहीं है, बल्कि उन अनेक शिक्षण संस्थानों की हकीकत को भी सामने लाती है जो आज भी बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में हैं। शिक्षा के अधिकार को प्रभावी बनाने के लिए केवल किताबें और शिक्षक ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सुरक्षित भवन, बेहतर सड़क, स्वच्छ परिसर और सुगम आवागमन जैसी सुविधाएं भी उतनी ही आवश्यक हैं।

अब सभी की निगाहें प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में कितनी तेजी से कदम उठाते हैं और बच्चों के लिए पढ़ाई का माहौल कितना बेहतर बना पाते हैं। क्योंकि किसी भी समाज का भविष्य उसके विद्यालयों से तय होता है और उन विद्यालयों तक पहुंचने का रास्ता सम्मानजनक और सुरक्षित होना ही चाहिए।

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