
न्यूज डायरी: एनएच पर रात का सन्नाटा और ‘सत्ता’ के पहियों का खौफ
- बड़ी वारदात: मोहनियां-चौसा एनएच 319A पर शनिवार की रात एक तेज रफ्तार सरकारी वाहन ने बाइक सवार तीन युवकों को जोरदार टक्कर मार दी।
- दुखद परिणाम: हादसे में गंभीर रूप से घायल आशीष पटेल ने रविवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वह मोहनियां के बरैथा गांव का रहने वाला था।
- घायलों की स्थिति: बाइक पर सवार दो अन्य युवक, शिवम पटेल और मिथिलेश पटेल, गंभीर रूप से घायल हैं। उन्हें वाराणसी के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है।
- आरोपी वाहन: स्थानीय सूत्रों और प्राथमिक जानकारी के अनुसार, टक्कर मारने वाला वाहन बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) का बताया जा रहा है।
- प्रशासनिक हलचल: हादसे की खबर मिलते ही एसडीएम रत्ना प्रियदर्शिनी और डीएसपी प्रदीप कुमार शनिवार देर रात रामगढ़ थाना पहुँचे और मामले की छानबीन शुरू की।
- VOB इनसाइट: यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह सरकारी तंत्र की जवाबदेही पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। जब रक्षक ही भक्षक की तरह सड़कों पर ‘रफ्तार’ का खेल खेलें, तो आम आदमी की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। एसडीएम की यह दलील कि ‘जांच की जा रही है कि गाड़ी किसकी है’, जनता के बीच संदेह पैदा करती है, क्योंकि चश्मदीदों ने मौके पर सरकारी बोर्ड और पदनाम वाली गाड़ी को ही देखा है। एक तरफ तीन लड़कों का एक ही बाइक पर सवार होना (Triple Riding) सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है, लेकिन दूसरी तरफ एक भारी सरकारी वाहन का उन्हें कुचल देना प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है। बरैथा गांव के एक ही परिवार और परिवेश के तीन युवाओं का इस तरह शिकार होना पूरे इलाके को गमजदा कर गया है।
रामगढ़ (कैमूर) | 30 मार्च, 2026
कैमूर जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मोहनियां-चौसा नेशनल हाईवे 319A पर शनिवार की रात जो चीख गूँजी, उसने न केवल सड़क के सन्नाटे को तोड़ा, बल्कि एक हंसते-खेलते परिवार के चिराग को हमेशा के लिए बुझा दिया। शनिवार की रात करीब पौने आठ बजे हुए इस हादसे ने रविवार को तब और भी गमगीन रूप ले लिया, जब अस्पताल से आशीष पटेल की मौत की खबर आई। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, यह हादसा उस समय हुआ जब सरकारी तंत्र के पहिये नियमों को ताक पर रखकर हाईवे पर दौड़ रहे थे।
शनिवार की रात: वो 7:45 बजे का मनहूस पल
मोहनियां थाना क्षेत्र के बरैथा गांव निवासी आशीष पटेल, शिवम पटेल और मिथिलेश पटेल शनिवार की शाम रामगढ़ बाजार आए थे। काम निपटाने के बाद तीनों एक ही बाइक पर सवार होकर वापस अपने गांव बरैथा की ओर लौट रहे थे। जैसे ही उनकी बाइक एनएच 319A पर पहुँची, सामने से आ रही एक सफेद रंग की सरकारी गाड़ी ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार तीनों युवक हवा में कई फीट उछलकर सड़क के किनारे जा गिरे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर मारने वाली गाड़ी पर ‘सीडीपीओ’ (CDPO) लिखा हुआ था और वह काफी तेज गति में थी। हादसे के तुरंत बाद चालक वाहन समेत मौके से फरार होने की कोशिश करने लगा, लेकिन आसपास के लोगों ने शोर मचाया। हालांकि, अंधेरे का फायदा उठाकर गाड़ी वहां से निकल गई। सूचना मिलते ही रामगढ़ थानाध्यक्ष हरिप्रसाद शर्मा दलबल के साथ मौके पर पहुँचे और स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को तुरंत रेफरल अस्पताल पहुँचाया।
बरैथा गांव में मातम: आशीष का जाना और दो दोस्तों की जंग
रेफरल अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद तीनों की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें वाराणसी के लिए रेफर कर दिया। रविवार की सुबह वाराणसी के अस्पताल में इलाज के दौरान आशीष पटेल (पुत्र गौरी पटेल) ने अपनी अंतिम सांसें लीं। आशीष की मौत की खबर जैसे ही बरैथा गांव पहुँची, वहां कोहराम मच गया। आशीष अपने परिवार का होनहार बेटा था और उसकी मौत ने परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है।
वहीं, शिवम पटेल और मिथिलेश पटेल की स्थिति भी नाजुक बनी हुई है। दोनों को वाराणसी के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहाँ वे वेंटिलेटर और लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं। उनके परिवार वाले भी अस्पताल के बाहर अपनों की सलामती की दुआएं मांग रहे हैं। गांव में चारों ओर सन्नाटा पसरा है और लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि सरकारी वाहन होने के बावजूद मानवता का परिचय नहीं दिया गया।
प्रशासनिक सतर्कता या ‘कवर-अप’ की कोशिश?
हादसे की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम रत्ना प्रियदर्शिनी और डीएसपी प्रदीप कुमार शनिवार की देर रात ही रामगढ़ थाना पहुँच गए थे। अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना किया और थानाध्यक्ष से पूरी जानकारी ली।
एसडीएम रत्ना प्रियदर्शिनी ने मीडिया से बातचीत में संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “घटना अत्यंत दुखद है। हम इस बात की विस्तृत जांच कर रहे हैं कि टक्कर किस गाड़ी से हुई है। सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है। अगर यह सिद्ध होता है कि वाहन किसी सरकारी विभाग का है, तो कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि गाड़ी सीडीपीओ की ही थी और प्रशासन अब उसे बचाने की कोशिश कर रहा है। डीएसपी प्रदीप कुमार ने आश्वासन दिया है कि जांच में पारदर्शिता बरती जाएगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।


