प्राकृतिक सुंदरता, वन्यजीव और झील-झरनों की ओर बढ़ रहा पर्यटकों का रुझान

राजगीर, वाल्मीकि, ककोलत और कांवर झील बन रहे इको टूरिज्म के नए हॉटस्पॉट

पटना, 27 मार्च। बिहार अब पर्यटन के पारंपरिक नक्शे से आगे बढ़ते हुए इको टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। राज्य के विभिन्न जिलों में फैली प्राकृतिक धरोहर—घने जंगल, जलप्रपात, झीलें, पहाड़ और वन्यजीव अभ्यारण्य—पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। बदलती जीवनशैली के बीच लोग अब शांति, हरियाली और प्रकृति के करीब समय बिताने को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसका सीधा लाभ बिहार के इको टूरिज्म स्थलों को मिल रहा है।

राज्य सरकार भी इस बढ़ती संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इन स्थलों के विकास पर विशेष जोर दे रही है। सड़क संपर्क, पर्यटक आवास, सुरक्षा, गाइड और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।

पश्चिम चंपारण स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व राज्य का सबसे प्रमुख इको टूरिज्म केंद्र बनकर उभरा है। करीब 901 वर्ग किलोमीटर में फैले इस घने वन क्षेत्र में बंगाल टाइगर, तेंदुआ, भालू, हिरण और नीलगाय जैसे वन्यजीवों के साथ 250 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। भागलपुर का विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभ्यारण्य भी पर्यटकों के लिए खास आकर्षण है, जहां गंगा डॉल्फिन को उनके प्राकृतिक आवास में देखा जा सकता है। मुंगेर का भीमबांध वन्यजीव अभ्यारण्य अपनी पहाड़ियों, गर्म जलस्रोतों और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। अमवा मन झील और उदयपुर वन्यजीव अभ्यारण्य जैसे स्थल भी प्रकृति प्रेमियों और बर्ड वॉचर्स के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

नालंदा जिले का राजगीर अब बिहार के सबसे चर्चित पर्यटन स्थलों में शामिल हो चुका है। यहां का नेचर सफारी, जू सफारी और घोड़ा कटोरा झील पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रहे हैं। खास तौर पर देश का पहला ग्लास स्काई वॉक रोमांच पसंद लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं नवादा का ककोलत जलप्रपात गर्मियों में पर्यटकों का पसंदीदा ठिकाना बन जाता है। इसके साथ ही रोहतास के तुतला भवानी जलप्रपात, मांझर कुंड, धुआं कुंड और इंद्रपुरी बैराज भी प्राकृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।

बिहार के कई इलाके पक्षी प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं हैं। बेगूसराय की कांवर झील, जो एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में गिनी जाती है, सर्दियों में हजारों प्रवासी पक्षियों का घर बन जाती है। दरभंगा का कुशेश्वर स्थान पक्षी अभ्यारण्य भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है, जहां दूर-दराज के देशों से पक्षी हर साल आते हैं। जमुई का नागी-नकटी पक्षी अभ्यारण्य, बांका का ओढ़नी बांध और कैमूर का वन्यजीव अभ्यारण्य भी तेजी से इको टूरिज्म हब बनते जा रहे हैं।

बिहार में इको टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं और जिस गति से इन स्थलों का विकास हो रहा है, वह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में यह राज्य देश के प्रमुख इको टूरिज्म गंतव्यों में शामिल हो सकता है। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए पर्यटन को बढ़ावा देने की यह पहल न सिर्फ पर्यावरण के लिए सकारात्मक है, बल्कि स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही है। अगर यही रफ्तार बनी रही, तो बिहार आने वाले समय में नेचर टूरिज्म का नया केंद्र बनकर उभरेगा।

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